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UP का ‘मिनी गया’, जहां पर आए थे भगवान शंकर, यहां पिंडदान के लिए उमड़ते हैं श्रद्धालु

UP का 'मिनी गया', जहां पर आए थे भगवान शंकर, यहां पिंडदान के लिए उमड़ते हैं श्रद्धालु

देवयानी सरोवर

बिहार के गया को मोक्ष की नगरी के नाम से भी जाना जाता है. सनातन धर्म के लाखों लोग हर साल पितृपक्ष में पिंडदान के लिए गया आते हैं. मान्यता है कि गया में पिंडदान करने से पितरों की आत्मा को मोक्ष की प्राप्ति होती है. लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि कानपुर देहात में भी एक ऐसी ही पवित्र जगह है, जहां पर लोग पिंडदान के लिए आते हैं. इस जगह को छोटी गया भी कहा जाता है.

यह स्थान मूसानगर कानपुर में स्थित देवयानी सरोवर है. भोगनीपुर से लगभग 19 किलोमीटर और कानपुर शहर से कुछ दूरी पर स्थित यह सरोवर पितृ पक्ष में विशेष महत्व रखता है. हर साल पितृ पक्ष के दौरान हजारों श्रद्धालु यहां पहुंचकर अपने पितरों का विधिपूर्वक श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करते हैं.

छोटी गया की मान्यता

स्थानीय मान्यता के अनुसार, बोधगया में पिंडदान करने से पहले छोटी गया यानी देवयानी सरोवर के तट पर प्रथम पिंडदान की परंपरा है. कहा जाता है कि यहां पिंडदान करने से वही फल प्राप्त होता है, जो गया जाकर करने से मिलता है. विशेषकर अमावस्या के दिन यहां पर भीड़ उमड़ती है, जब दूर-दराज़ से लोग अपने पितरों की आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध कर्म करने पहुंचते हैं. यह भी मान्यता है कि जिन परिवारों को अपने पूर्वजों की मृत्यु तिथि हिंदू पंचांग के अनुसार ज्ञात नहीं होती, वे पितृ विसर्जन की अमावस्या को यहां आकर पिंडदान अवश्य करते हैं.

देवयानी सरोवर से लगभग दो किलोमीटर दूर यमुना नदी बहती है. खास बात यह है कि यह धारा यहां उत्तरगामी है. हिंदू धर्मग्रंथों में उत्तरगामी यमुना के तट पर स्नान और पिंडदान को अत्यंत पुण्यदायी माना गया है. श्रद्धालु सरोवर में स्नान कर शुद्धिकरण करने के बाद अपने पितरों का तर्पण करते हैं.

देवयानी सरोवर की पौराणिक कथा

देवयानी सरोवर केवल पितृ तर्पण के कारण ही नहीं, बल्कि अपनी पौराणिक कथा के लिए भी प्रसिद्ध है. लोककथा के अनुसार, दैत्यराज वृषपर्वा की पुत्री शर्मिष्ठा और दैत्य गुरु शुक्राचार्य की पुत्री देवयानी कभी इस क्षेत्र के जंगलों में घूमते हुए इस सरोवर पर पहुंचीं. दोनों ने यहां स्नान करने का निर्णय लिया. भगवान शिव यहां से गुजर रहे थे. घबराहट में शुक्राचार्य की बेटी देवयानी ने जल्दी-जल्दी शर्मिष्ठा के वस्त्र धारण कर लिए. इसे देखकर शर्मिष्ठा क्रोधित हो उठी और उसने देवयानी को पास के कुएं में धकेल दिया.

उसी समय पास से गुजर रहे जाजमऊ के राजा ययाति ने देवयानी को कुएं से बाहर निकाला. शुक्राचार्य इससे प्रसन्न हुए और अपनी पुत्री देवयानी का विवाह राजा ययाति से कर दिया. विवाह के बाद ययाति ने इस सरोवर का भव्य स्वरूप बनवाया, ताकि यह घटना हमेशा यादगार बनी रहे. तभी से यह स्थान देवयानी सरोवर के नाम से प्रसिद्ध हो गया.

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