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UP: इस गांव में भालू बन गए लोग! बंदरों के आतंक से परेशान, भगाने के लिए धर लिया इस तरह का भेष

UP: इस गांव में भालू बन गए लोग! बंदरों के आतंक से परेशान, भगाने के लिए धर लिया इस तरह का भेष

भालू बना शख्स

उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर से चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक इंसान भालू का वेश रखकर गली-गली घूम रहा है. गांव वालों का कहना है कि इंसान को भालू सिर्फ इसलिए बनाना पड़ा क्योंकि गांव वाले बंदरों की वजह से बहुत परेशान थे. बंदर आए दिन नुकसान तो करते ही थे, इंसानों पर हमले करके उन्हें भी घायल करते थे. अब जब से इंसान ने भालू का भेष धारण किया है, तब से बंदरों के आतंक से निजात मिलती हुई नजर आ रही है.

यह मामला निगोही थाना क्षेत्र के नौगवां गांव का है. यहां के गांव वाले लंबे समय से बंदरों के आतंक से त्रस्त थे. बंदर न सिर्फ घरों के सामान और फसलों को नुकसान पहुंचाते थे, बल्कि बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं पर हमला करके उन्हें घायल भी कर देते थे. गांव के दर्जनों लोग इन हमलों का शिकार हो चुके हैं और अभी तक अपना इलाज करवा रहे हैं.

लोगों ने बनाया प्लान

गांव के ही रहने वाले गौरव त्रिपाठी ने बताया कि सभी गांव वालों ने एकजुट होकर इस समस्या का समाधान निकालने का फैसला किया. इसके बाद तय हुआ कि एक भालू की ड्रेस खरीदी जाए और एक व्यक्ति को पहनाकर बंदरों के सामने लाया जाए. उनका मानना था कि शायद इससे बंदर डरकर भाग जाएं.

तरकीब हुई सफल

इस तरकीब से हुआ भी वैसा ही. अब गांव में जब इंसान भालू बनकर निकलता है तो बंदर तो भागते ही हैं, साथ में गांव के कुत्ते भी दुम दबाकर भागते हुए नजर आते हैं. भालू के पीछे-पीछे बच्चे मौज मस्ती करते हुए दिखाई देते हैं. इस तरकीब से अब बंदरों से तो निजात मिल ही रही है, गांव के होने वाले नुकसान से भी लोगों को राहत मिली है.

भालू बने शख्स ने क्या कहा?

भालू बने जितेंद्र का कहना है कि बंदरों के आतंक से ग्रामीणों को बचाने के लिए भालू का ड्रेस पहनकर भालू बनना पड़ा. नौगवां के गांव वाले अब भालू को लेकर गलियों में निकलते हैं तो बंदर दूर-दूर तक दिखाई नहीं देते. उनके इंसान के भालू बनने से गांव वाले ने राहत की सांस ली है.

वहीं, गांव के बच्चे भालू बने इंसान के पीछे-पीछे तालियां बजाकर शोर मचाते हुए गलियों में मौज मस्ती करते दिखाई दे रहे हैं, जबकि इससे पहले ग्रामीण अपने बच्चों को घरों से निकलने नहीं देते थे. क्योंकि, बंदर बच्चों और बुजुर्गों के साथ-साथ महिलाओं को भी घायल करने के साथ नुकसान पहुंचाते थे.

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