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बरेली में खुले नाले में मौत! शव निकालने में लगे 16 लाख, अब किस पर गिरी गाज?

बरेली में खुले नाले में मौत! शव निकालने में लगे 16 लाख, अब किस पर गिरी गाज?

बरेली में खुले नाले में गिरकर हुई यात्री युवक की मौत के मामले में हुई कार्रवाई को लेकर सवाल उठने लगे हैं. आरोप है कि इस मामले में छोटे कर्मचारियों पर गाज गिरी है, जबकि बड़े अफसरों को क्लीन चिट दे दी गई है. दरअसल, बरेली के सेटेलाइट बस अड्डे के पास खुले नाले में गिरकर हरदोई निवासी तौहीद की मौत के मामले में नगर निगम की जांच रिपोर्ट सामने आ गई है.

24 मार्च की रात हुए इस हादसे के करीब 30 घंटे बाद तौहीद का शव बरामद किया गया था. नगर निगम के सूत्रों और ऑफ द रिकॉर्ड नगर आयुक्त ने बताया कि मलबा तोड़ने, जेसीबी के डीजल और सड़क तोड़ने में लगभग 16 लाख रुपये खर्च हुए हैं.

मामले की गंभीरता को देखते हुए नगर आयुक्त ने अपर नगर आयुक्त शशिभूषण राय के नेतृत्व में जांच टीम गठित की थी. इसकी रिपोर्ट सौंप दी गई है. रिपोर्ट में दो जूनियर इंजीनियर, एक सफाई निरीक्षक, सफाई नायक, सुपरवाइजर और संबंधित ठेकेदार को दोषी ठहराया गया है.

जांच में साफ कहा गया है कि नाले का खुला होना और सुरक्षा मानकों की अनदेखी ही तौहीद की मौत की मुख्य वजह बनी.स्थानीय लोगों का कहना है कि नाले की सुरक्षा और निगरानी की जिम्मेदारी बड़े अधिकारियों की होती है, लेकिन उन्हें जिम्मेदार नहीं ठहराया गया.

नगर निगम के सूत्रों के मुताबिक, तौहीद के शव को निकालने में करीब 16 लाख रुपये खर्च हुए. इसमें जेसीबी, डीजल, नाला तोड़ने और सड़क खुदाई का खर्च शामिल है.

वहीं, नगर निगम अब हरकत में आया है. खुले नालों के आसपास बैरिकेडिंग और ढक्कन लगाने का काम शुरू कर दिया गया है. लोगों का कहना है कि एक मौत के बाद ही प्रशासन जागा है.

पूरे मामले में नगर आयुक्त संजीव मौर्य का कहना है कि जांच रिपोर्ट तथ्यों के आधार पर तैयार की गई है. रिपोर्ट मिल चुकी है और अब दोषी पाए गए कर्मचारियों के खिलाफ सस्पेंशन सहित आगे की कार्रवाई की जाएगी. साथ ही, शहर में खुले नालों को ढकने और सुरक्षा इंतजाम पुख्ता करने के निर्देश दिए गए हैं.

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