उत्तर प्रदेशभारत

कांवड़ यात्रा यानी आस्था और अनुशासन का संगम, योगी सरकार ने अधिकारियों को दिए सख्त निर्देश

हमारी पौराणिक मान्यता है कि शिव की भक्ति ही सबसे बड़ा तीर्थ है और सबसे बड़ा तप भी. श्रावण मास में प्रवाहित होने वाली कांवड़ यात्रा भी ऐसा ही तप है जो भक्तों के संकल्प को मूर्त रूप देता है. कांधे पर गंगाजल, नंगे पांव, सैकड़ों किलोमीटर की यात्रा करके शिवालयों तक पहुंचना. वस्तुतः यह यात्रा केवल जलाभिषेक की परंपरा नहीं, बल्कि तप, संयम और समर्पण की उस त्रिवेणी का प्रवाह है, जो सनातन परंपरा में सदियों से अनवरत बह रहा है.

इतनी विराट, इतनी संवेदनशील और इतनी विशाल आस्था की धारा को सुव्यवस्थित रूप देना, उसे अनुशासन की मर्यादा में बांधकर उसकी गरिमा को अक्षुण्ण रखना, यह ऐसी प्रशासनिक दृढ़ता से संभव होता है जो श्रद्धा के महत्व को समझती है. योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार ने पिछले नौ वर्षों में इसी दिशा में जो प्रतिबद्धता दिखाई है, वह आस्था और अनुशासन के दुर्लभ संतुलन का उदाहरण है.

अधिकारियों को गंभीरता से किया आगाह

कांवड़ यात्रा के दृष्टिगत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्वयं अधिकारियों को जिस गंभीरता से आगाह किया है, वह इस बात का प्रमाण है कि सरकार के लिए यह यात्रा प्रशासनिक चुनौती ही नहीं, करोड़ों हृदयों की आस्था का प्रश्न है. मुख्यमंत्री ने अपनी सोच स्पष्ट कर दी है कि प्रत्येक श्रद्धालु की सुरक्षा, सुविधा और सम्मान उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है.

यह राजकीय दृष्टि का संवेदनशील उद्घोष है, जिसमें शासन स्वयं को श्रद्धालु का सहयात्री मानता है. कांवड़ यात्रा के दौरान रुहेलखंड, ब्रज, बुंदेलखंड, अवध, पूर्वांचल और पश्चिमी उत्तर प्रदेश अर्थात प्रदेश के लगभग हर जिले में आस्था की हिलोरें उठती हैं. ऐसे विराट फलक पर मुख्यमंत्री का यह निर्देश कि हर जिले में व्यवस्था का स्तर समान होना चाहिए, दर्शाता है कि सरकार की दृष्टि समावेशी है और उसके लिए हर श्रद्धालु के मायने हैं.

Acharya Dr Vikramaditya

आचार्य डॉ. विक्रमादित्य, पीतांबरा पीठाधीश एवं अध्यक्ष, विवेकानंद प्रतिष्ठान

कांवड़ यात्रा अब राष्ट्रव्यापी आध्यात्मिक चेतना का प्रतीक है. शिवपुराण में वर्णित है कि सच्चे मन से किया गया जलाभिषेक भक्त के समस्त पापों का नाश करता है और उसे शिवत्व की ओर अग्रसर करता है. यही कारण है कि कांवड़िया मार्ग में पग-पग पर नियमों का पालन करता है. भूमि पर कांवड़ न रखना, मार्ग में मर्यादा बनाए रखना, शुद्ध आचरण का निर्वहन करना, यह सब उस आत्मानुशासन का प्रमाण है जो सनातन धर्म की मूल आत्मा में रचा-बसा है.

हरियाणा, राजस्थान, दिल्ली व उत्तराखंड से समन्वय

इसी आत्मानुशासन को सम्मान देते हुए मुख्यमंत्री ने हरियाणा, राजस्थान, दिल्ली व उत्तराखंड के अधिकारियों से समन्वय स्थापित करने और वहां के कांवड़ संघों से नियमित संवाद बनाए रखने के निर्देश दिए हैं. यह पहल दर्शाती है कि आस्था की मर्यादा केवल एक राज्य की सीमा में नहीं बंधी, अपितु उसे अंतरराज्यीय समन्वय के माध्यम से एक समरूप, सुसंगत स्वरूप देने का प्रयत्न किया जा रहा है.

कांवड़ यात्रा के तपस्वियों के लिए सड़क मार्ग सुचारु होना चाहिए. इसको लेकर मुख्यमंत्री योगी भी गंभीर हैं और क्षतिग्रस्त सड़कों की तत्काल मरम्मत के निर्देश दिए हैं ताकि किसी भी श्रद्धालु को भौतिक बाधा का सामना न करना पड़े. सरकार भक्त की देह और मन, दोनों की चिंता करती है. इसीलिए मार्गों पर पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था, स्वच्छता, पेयजल, शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाओं के साथ ही चिकित्सा शिविरों को प्रभावी ढंग से संचालित करने, तथा एंटी वेनम और एंटी रैबीज इंजेक्शन सहित आवश्यक औषधियों की पर्याप्त उपलब्धता भी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं.

अनुशासन की यह व्यवस्था बहुआयामी है और इसका एक अत्यंत संवेदनशील पक्ष खाद्य सुरक्षा से जुड़ा है. मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिया कि कांवड़ यात्रा मार्ग पर मांस-मदिरा की दुकानें बंद रखी जाएं, ताकि श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाओं को कोई ठेस न पहुंचे. प्रत्येक दुकान पर संचालक का नाम स्पष्ट रूप से प्रदर्शित रहने की व्यवस्था पारदर्शिता और उत्तरदायित्व, दोनों को सुनिश्चित करती है. साथ ही डीजे की ध्वनि निर्धारित मानकों के अनुरूप रखने और कानफोड़ू आवाज को किसी भी परिस्थिति में स्वीकार न करने का निर्देश यह दर्शाता है कि भक्ति के इस उत्सव में उल्लास तो हो, किंतु वह मर्यादा की सीमा को न लांघे.

लहर से बचाना भी सरकार का दायित्व

आस्था की इस विराट धारा को भ्रम व द्वेष की किसी भी लहर से बचाना भी सरकार का दायित्व है. इसीलिए भ्रामक और फर्जी सूचनाओं का तत्काल खंडन करने तथा अफवाह फैलाकर सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने वालों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई को कहा गया है. अनुशासन की इस व्यवस्था में समाज की सक्रिय सहभागिता भी महत्वपूर्ण है. इसीलिए स्थानीय प्रशासन को कांवड़ संघों के साथ निरंतर संवाद बनाए रखने के लिए कहा गया है. अनुशासन जब जनसमर्थन और संवाद से जुड़ता है, तो वह केवल थोपी गई व्यवस्था नहीं रह जाता, बल्कि सामूहिक चेतना का स्वाभाविक प्रवाह बन जाता है.

योगी सरकार से पहले उत्तर प्रदेश में आस्था के प्रति जो उदासीनता दिखाई देती थी, उससे कई बार अव्यवस्था सामने आई और श्रद्धालुओं की सुरक्षा भी संकट में पड़ी. इसके विपरीत योगी सरकार ने कांवड़ यात्रा को जो व्यवस्थित स्वरूप दिया है, वह निरंतर परिष्कृत होती एक दीर्घकालिक नीति का परिणाम है. उनका दृष्टिकोण राज्य और आस्था के संबंध को नई परिभाषा देता है, जहां सरकार स्वयं को धर्मनिरपेक्षता के नाम पर आस्था से दूर नहीं करती, अपितु उसे संरक्षण देना अपना कर्तव्य मानती है. इस संपूर्ण व्यवस्था का एक और गंभीर पक्ष यह है कि इसमें राज्य की सांस्कृतिक प्रतिबद्धता भी परिलक्षित होती है. जब कोई सरकार वर्षों तक निरंतर, बिना किसी व्यवधान के, इतने विशाल जनसमूह की आस्था को सम्मान और सुरक्षा प्रदान करती है, तो सभ्यतागत विरासत की रक्षा भी करती है.

अनुशासन का पालन करते हुए भक्ति की गरिमा

कांवड़ यात्रा में आस्था और अनुशासन का यह संगम इस सत्य को प्रतिपादित करता है कि श्रद्धा जब समुचित व्यवस्था के साथ संयुक्त होती है, तो वह अधिक प्रभावशाली, अधिक सुरक्षित और अधिक समावेशी बन जाती है. योगी सरकार ने अपने ठोस प्रयासों से यह सिद्ध किया है कि आस्था का सम्मान करते हुए भी सुदृढ़ अनुशासन स्थापित किया जा सकता है, और अनुशासन का पालन करते हुए भी भक्ति की मूल गरिमा को अक्षुण्ण रखा जा सकता है.

कांवड़ यात्रा का यह स्वरूप न केवल शिवभक्ति की शाश्वत परंपरा को जीवंत रखता है, बल्कि प्रशासनिक कुशलता और सामाजिक समर्पण के एक आदर्श प्रतिमान के रूप में भी स्थापित होता है, जो भविष्य में भी अनुकरणीय बना रहेगा. यह यात्रा हमें बार-बार यह स्मरण कराती है कि जब राज्य और समाज एक साझा उद्देश्य के लिए संगठित होते हैं, तब आस्था केवल व्यक्तिगत अनुभूति नहीं रह जाती, बल्कि वह एक सुसंस्कृत, सुरक्षित और गरिमापूर्ण सामूहिक चेतना का रूप धारण कर लेती है. (ये लेखक के निजी विचार हैं.)

TV9 Bharatvarsh

TV9 Bharatvarsh

टीवी9 भारतवर्ष डिजिटल TV9 नेटवर्क का प्रमुख हिंदी न्यूज़ प्लेटफॉर्म है. इस वेबसाइट पर देश-विदेश की ताज़ा खबरें, ब्रेकिंग न्यूज़, विश्लेषण और ग्राउंड रिपोर्टिंग से पाठकों को रूबरू कराया जाता है. टीवी9 की वेबसाइट tv9hindi.com प्रमुख हिंदी वेबसाइटों में अपना स्थान रखती है. टीवी9 हिंदी का अपना मोबाइल ऐप भी है, जहां टेक्स्ट और वीडियो दोनों माध्यम से खबरें पढ़ीं और देखी जा सकती हैं. टीवी9 वेबसाइट पर राजनीति, अर्थव्यवस्था, खेल, मनोरंजन, स्वास्थ्य, टेक और अंतरराष्ट्रीय मामलों जैसी विविध श्रेणियों में खबरें कवर की जाती हैं. यहां एक्सप्लेनर्स, एक्सक्लूसिव स्टोरीज, वीडियो रिपोर्ट्स और लाइव अपडेट्स मिलते हैं. TV9 नेटवर्क का डिजिटल सेगमेंट तेजी से बढ़ा है और मिलियंस की संख्या में यूनिक यूजर्स तक पहुंचता है.

Read More

Show More

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button