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वाराणसी: शरीर पर 17 घाव… सिर से किडनी तक चोट; दरोगा से मारपीट मामले में 10 वकीलों समेत 60 पर FIR

वाराणसी: शरीर पर 17 घाव... सिर से किडनी तक चोट; दरोगा से मारपीट मामले में 10 वकीलों समेत 60 पर FIR

वाराणसी में कचहरी परिसर में दरोगा के साथ मारपीट

उत्तर प्रदेश के वाराणसी में कचहरी परिसर में दरोगा मिथिलेश कुमार प्रजापति पर हुए हमले का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है. देर रात कैंट थाने में इस मामले में एफआईआर दर्ज की गई. घायल दरोगा मिथिलेश कुमार की तहरीर पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया है. दस वकीलों समेत करीब साठ अज्ञात लोगों को नामजद किया गया है.

एफआईआर में आरोप लगाया गया है कि आपराधिक प्रवृत्ति के वकीलों ने गुट बनाकर षड्यंत्र रचा और सरकारी कार्य में बाधा उत्पन्न करते हुए खतरनाक हथियारों से लैस होकर दरोगा पर जानलेवा हमला कर दिया. आरोपियों ने मिथिलेश कुमार को बुरी तरह पीट-पीटकर बेहोश कर दिया और उनके पास से 4200 रुपये भी लूट लिए.

दरोगा को बचाने पहुंचे कांस्टेबल को भी आईं चोटें

घटना का सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया है, जिसमें साफ दिखाई दे रहा है कि असामाजिक वकीलों की भीड़ दरोगा को घेरकर बेरहमी से पिटाई कर रही है. इस दौरान दरोगा को बचाने पहुंचे कांस्टेबल राणा प्रसाद को भी चोटें आईं. पुलिस ने इस मामले में मोहित मौर्य और अजीत मौर्य को मुख्य आरोपी माना है.

मारपीट की वजह एक पुराने विवाद से जुड़ी बताई जा रही है. जानकारी के मुताबिक, मोहित मौर्य का अपने पट्टीदार प्रेमचंद मौर्य से जमीन का विवाद चल रहा है. इस विवाद में बड़ागांव थाने में तैनात दरोगा मिथिलेश कुमार ने कार्रवाई करते हुए मोहित मौर्य को हिरासत में लिया था और उस पर मारपीट का आरोप भी लगा था. बाद में वकीलों के हस्तक्षेप से मोहित मौर्य को थाने से छोड़ा गया. माना जा रहा है कि कचहरी में हुई मारपीट की घटना उसी विवाद की कड़ी है.

बनारस बार काउंसिल ने हमले की निंदा की

इस घटना को लेकर बार काउंसिलों ने भी कड़ा रुख अपनाया है. सेंट्रल बार काउंसिल और बनारस बार काउंसिल दोनों ने हमले की निंदा की है. उन्होंने आश्वासन दिया है कि मारपीट में शामिल असामाजिक तत्वों की पहचान कर उन पर विधिक कार्रवाई की जाएगी. सेंट्रल बार अध्यक्ष मंगलेश दुबे और महामंत्री राजेश गुप्ता ने बताया कि बुधवार सुबह 11 बजे बार सभागार में बैठक बुलाई गई है.

इस बैठक में असामाजिक प्रवृत्ति के वकीलों को लेकर गाइडलाइन जारी की जाएगी और एक मेमोरेंडम भी जारी होगा. काउंसिल ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि कोई अधिवक्ता इस दिशा-निर्देश का उल्लंघन करता है, तो उस पर भी सख्त कार्रवाई की जाएगी.

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