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नोएडा: चुंबक की मदद से चुराते थे कार, फिर उसे 50 हजार रुपये में बेच देते; 50 से अधिक गाड़ियां चुराने वाले गिरोह की कहानी

नोएडा: चुंबक की मदद से चुराते थे कार, फिर उसे 50 हजार रुपये में बेच देते; 50 से अधिक गाड़ियां चुराने वाले गिरोह की कहानी

50 से अधिक कारें चुराईं

कारों की चोरी इनके लिए जैसे किसी खेल की बात थी. ये गाड़ियां चुराकर ऐसे गायब कर देते थे, जिनका पता लगाना असंभव सा था. पुलिस के लिए ये गिरोह एक बड़ी सरदर्दी बन चुका था. पर अब नोएडा पुलिस ने आखिरकार गिरोह के तीन सदस्यों को दबोच लिया. जब उन्होंने चोरी करने का पूरा तरीका पुलिस को बताया, तो अधिकारी भी हैरान रह गए.

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान हेमंत कुमार, अमित और बलजीत उर्फ बाबी के रूप में हुई है. पुलिस ने इनके पास से कार चोरी के उपकरण, चार फर्जी नंबर प्लेटें और 50 हजार रुपये कैश बरामद किए हैं. डीसीपी यमुना प्रसाद ने बताया कि ये तीनों वाहन चोर हैं और इन पर अब तक 40 से ज्यादा मुकदमे दर्ज हैं.

चोरी का शातिर तरीका

पुलिस टीम सेक्टर-82 पर नियमित चेकिंग कर रही थी, तभी बिना नंबर की स्कूटी पर ये तीनों संदिग्ध दिखाई दिए. पूछताछ में नकदी और चोरी के उपकरण बरामद हुए. पुलिस की पूछताछ में इन चोरों ने अपने पूरे मॉड्यूल का खुलासा किया. अपराधियों ने 50 से अधिक कारें चुराई हैं.

ये गिरोह खासतौर पर ब्रेजा कारों को ही निशाना बनाता था. चोरी की वारदात को अंजाम देने के लिए हेमंत और अमित रात में बिना नंबर प्लेट वाली एक्टिवा स्कूटी से इलाके में घूमकर रेकी करते थे. इसके बाद, हेमंत लोहे की “टी” का इस्तेमाल करके कार की खिड़की का लॉक खोलता था, जबकि अमित एक शक्तिशाली मैग्नेट की मदद से स्टीयरिंग लॉक को तुरंत निष्क्रिय कर देता था. लॉक खुलने के बाद, वे डुप्लीकेट चाबी का उपयोग करके गाड़ी स्टार्ट करते और मौके से फरार हो जाते थे.

चोरी की गई ब्रेजा कारें वे अपने साथी बलजीत को सौंप देते थे, जिसे वे 50-50 हजार रुपये में बेचते थे. बलजीत आगे इन गाड़ियों को ठिकाने लगा देता था. आरोपियों के पास से जो नंबर प्लेटें मिली हैं, उनमें से दो नोएडा के सेक्टर-110 और सेक्टर-22 से चोरी की गई ब्रेजा कारों की हैं.

क्या बोले अधिकारी?

पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, इन शातिर चोरों पर एनसीआर के कई जिलों—जैसे बरेली, गौतमबुद्धनगर, मेरठ, दिल्ली और बुलंदशहर में मुकदमे दर्ज हैं. डीसीपी यमुना प्रसाद ने बताया कि पुलिस अब इन जिलों को गिरफ्तारी की जानकारी भेजकर अन्य मामलों की कड़ियां भी खंगाल रही है. पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि कहीं इनका संबंध किसी बड़े चोरी नेटवर्क से तो नहीं है. फिलहाल, तीनों आरोपियों को जेल भेज दिया गया है और आगे की कार्रवाई जारी है.

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