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मुजफ्फरनगर में बंधुआ मजदूरी: NHRC ने लिया स्वत: संज्ञान, यूपी सरकार से दो हफ्ते में मांगी रिपोर्ट

मुजफ्फरनगर में बंधुआ मजदूरी: NHRC ने लिया स्वत: संज्ञान, यूपी सरकार से दो हफ्ते में मांगी रिपोर्ट

मुजफ्फरनगर बंधुआ मजदूरी मामले में NHRC ने लिया स्वत: संज्ञानImage Credit source: X/@India_NHRC

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले में कथित बंधुआ मजदूरी और मजदूरों के साथ अमानवीय व्यवहार के मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने स्वत: संज्ञान लिया है. आयोग ने उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक (DGP) को नोटिस जारी कर दो हफ्ते के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है. ये मामला मुजफ्फरनगर के मंडी गांव स्थित एक पेपर प्लेट बनाने वाली फैक्ट्री का है, जहां 12 मजदूरों को करीब डेढ़ साल तक कथित रूप से बंधक बनाकर काम कराया गया. आरोप है कि उनसे आधी रात तक काम लिया जाता था और पर्याप्त भोजन और मजदूरी नहीं दी जाती थी, जबकि विरोध करने पर उनके साथ मारपीट की जाती थी.

बताया गया है कि एक मजदूर किसी तरह फैक्ट्री से भागने में सफल रहा. उसकी शिकायत के बाद तितावी थाना पुलिस ने कार्रवाई करते हुए बाकी मजदूरों को मुक्त कराया. मेडिकल जांच में मजदूरों के शरीर पर चोट, फ्रैक्चर, कट के निशान और लंबे समय तक शारीरिक प्रताड़ना के सबूत मिले हैं. पुलिस जांच में एक व्यक्ति की मौत की भी जानकारी सामने आई है. अब यह पता लगाया जा रहा है कि क्या इस मामले में और भी मौतें हुई हैं.

मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन का मामला

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने कहा है कि अगर दावे सही हैं तो यह मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन का मामला है. आयोग ने मुजफ्फरनगर के जिलाधिकारी को भी निर्देश दिया है कि श्रम एवं रोजगार मंत्रालय की स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) और बंधुआ मजदूरी प्रथा (उन्मूलन) अधिनियम, 1976 के तहत पूरे मामले की जांच कर कार्रवाई करें. इसके साथ ही आयोग ने सभी मुक्त कराए गए मजदूरों का तत्काल ई-श्रम पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कराने का भी निर्देश दिया है।. यह कार्रवाई NHRC की एडवाइजरी 2.0 (8 दिसंबर 2021) के अनुरूप करने को कहा गया है.

यूपी-बिहार समेत कई राज्यों के रहने वाले पीड़ित

पीड़ित मजदूर उत्तर प्रदेश, बिहार, उत्तराखंड, राजस्थान, हरियाणा, छत्तीसगढ़, झारखंड समेत नेपाल के भी रहने वाले हैं. आरोप है कि उन्हें रेलवे स्टेशन, बस अड्डों और सार्वजनिक स्थानों से नौकरी, नियमित वेतन, भोजन और रहने की सुविधा का लालच देकर फैक्ट्री लाया गया. वहां पहुंचने के बाद उनके मोबाइल फोन और पहचान पत्र छीन लिए गए, ताकि वो अपने परिवार से संपर्क न कर सकें. रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि मजदूरों को डराने और भागने से रोकने के लिए पिटबुल कुत्तों का इस्तेमाल किया जाता था.

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शिवांग माथुर

शिवांग माथुर

शिवांग माथुर टीवी 9 भारतवर्ष में एसोसियेट एडिटर के रूप में कार्यरत हैं.

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