‘बुर्के में कांवड़ क्यों?’… तमन्ना मलिक को संभल SDM कोर्ट से मिला नोटिस, पति को भी किया तलब

बुर्का पहने कांवड़ ले जाने पर रोक
Sambhal Kanwar Yatra controversy: उत्तर प्रदेश के संभल जिले में बुर्का पहनकर कांवड़ यात्रा में शामिल होने की घोषणा को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है. मामले में प्रशासन ने सख्ती दिखाते हुए तमन्ना मलिक और उनके पति अमन त्यागी के खिलाफ कार्रवाई की है. शांति भंग होने की आशंका जताते हुए SDM कोर्ट ने दोनों को छह महीने के लिए 20-20 हजार रुपये के निजी मुचलके पर पाबंद कर दिया है. साथ ही दोनों को नोटिस जारी कर तलब किया गया.
जानकारी के अनुसार, तमन्ना मलिक ने बुर्का पहनकर कांवड़ यात्रा में शामिल होने की बात कही थी. इस घोषणा के बाद प्रशासन ने संभावित कानून-व्यवस्था की स्थिति को देखते हुए मामले का संज्ञान लिया. SDM कोर्ट ने नोटिस जारी कर पूछा कि वह बुर्का पहनकर कांवड़ यात्रा में क्यों शामिल होना चाहती हैं. प्रशासन का मानना है कि इस तरह की घोषणा से क्षेत्र में शांति व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका उत्पन्न हो सकती है.
कोर्ट ने पति-पत्नी को भेजा नोटिस
नोटिस मिलने के बाद तमन्ना मलिक और उनके पति अमन त्यागी अपने अधिवक्ताओं के साथ SDM कार्यालय पहुंचे और अपना पक्ष रखा. कोर्ट ने दोनों को छह महीने तक शांति बनाए रखने के निर्देश देते हुए 20-20 हजार रुपये के निजी मुचलके पर पाबंद कर दिया. मीडिया से बातचीत में अमन त्यागी ने कहा कि कांवड़ यात्रा पूरी तरह आस्था का विषय है. उन्होंने कहा कि वह अपनी पत्नी के साथ कांवड़ यात्रा में शामिल होंगे. उन्होंने यह भी कहा कि तमन्ना बुर्का पहनें या साड़ी, यह उनका व्यक्तिगत निर्णय है और इसमें किसी को हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए. अमन त्यागी का दावा है कि तमन्ना ने सनातन धर्म अपनाया है और उन्हें अपनी धार्मिक आस्था व्यक्त करने का पूरा अधिकार है.
शांति भंग की आशंका में की गई कार्रवाई
वहीं प्रशासन का कहना है कि उसका उद्देश्य किसी की धार्मिक स्वतंत्रता पर रोक लगाना नहीं, बल्कि जिले में कानून-व्यवस्था और सामाजिक सौहार्द बनाए रखना है. अधिकारियों के अनुसार, एहतियात के तौर पर दोनों के खिलाफ शांति भंग की आशंका में कार्रवाई की गई है. एसडीएम विकास चंद्र ने बताया कि मामले में नियमानुसार कार्रवाई की गई है और दोनों पक्षों को नोटिस देकर उनका पक्ष सुना गया है. प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है ताकि कांवड़ यात्रा के दौरान किसी प्रकार की अप्रिय घटना न हो.
पति-पत्नी ने क्या कहा?
फिलहाल यह मामला जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है. एक ओर दंपती इसे अपनी धार्मिक आस्था और व्यक्तिगत अधिकार का प्रश्न बता रहे हैं, वहीं प्रशासन इसे केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखने के दृष्टिकोण से उठाया गया एहतियाती कदम बता रहा है. अब इस मामले में आगे की कार्रवाई और परिस्थितियों पर सभी की नजर बनी हुई है.





