Iran-China Rail Network: ईरान के इस बड़े फैसले का चीन पर नहीं पड़ेगा असर! जानें क्या है वह चीज जिसकी वजह से ड्रैगन का काम हो जाएगा आसान, समझें

ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया है. यह फारस की खाड़ी में मौजूद एक बेहद अहम समुद्री रास्ता है, जहां से दुनिया के करीब 20 प्रतिशत तेल की सप्लाई गुजरती है. ईरान की ताकतवर सेना Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) ने कहा है कि यह रूट अब जहाजों के लिए बंद है और अगर कोई जहाज यहां से गुजरने की कोशिश करेगा तो उसे निशाना बनाया जा सकता है. इसके बाद वैश्विक तेल बाजार में तनाव बढ़ गया है.
बिजनेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट के मुताबिक, मिडिल ईस्ट में छिड़ी जंग की स्थिति में सबसे ज्यादा चर्चा चीन को लेकर हो रही है क्योंकि वह ईरान का सबसे बड़ा तेल खरीदार है. साल 2025 में चीन ने हर दिन करीब 13.8 लाख बैरल ईरानी कच्चा तेल आयात किया था. यह मात्रा ईरान के कुल तेल निर्यात का लगभग 80 प्रतिशत से भी ज्यादा है. आंकड़ों के अनुसार ईरान रोजाना करीब 17 लाख से 21 लाख बैरल तेल निर्यात करता है, जिसमें से ज्यादातर चीन को जाता है. ऐसे में अगर होरमुज जलडमरूमध्य लंबे समय तक बंद रहता है तो समुद्र के रास्ते चीन को मिलने वाली ईरानी तेल सप्लाई प्रभावित हो सकती है.
ईरान-चीन का रेल नेटवर्क
हालांकि स्थिति पूरी तरह चीन के खिलाफ नहीं है क्योंकि उसने कई साल पहले ही समुद्री रास्तों पर निर्भरता कम करने की तैयारी शुरू कर दी थी. चीन और ईरान के बीच पिछले एक दशक से रेल संपर्क मौजूद है. दिसंबर 2014 में कजाकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान और ईरान के बीच रेल लिंक शुरू हुआ था, जिससे चीन से सीधे ईरान तक जमीन के रास्ते पहुंचने वाला रास्ता तैयार हो गया. फरवरी 2016 में चीन से पहली मालगाड़ी सीधे ईरान पहुंची थी. यह ट्रेन चीन के शहर यिवू से चली थी और करीब 10,399 किलोमीटर की दूरी तय कर लगभग 14 दिनों में तेहरान पहुंची थी. यह रास्ता चीन के शिनजियांग क्षेत्र से निकलकर अलाताव पास होते हुए कजाकिस्तान और तुर्कमेनिस्तान से गुजरते हुए ईरान पहुंचता है. समुद्र के रास्ते जहां सामान पहुंचने में 30 से 40 दिन लगते हैं, वहीं रेल मार्ग से यह समय करीब 14 से 15 दिन रह जाता है.
क्या है सिल्क रोड ट्रेन?
ईरान के परिवहन मंत्री मोहसिन पूर-अक़ाएई के अनुसार इस ट्रेन को सिल्क रोड ट्रेन भी कहा गया और इसका मकसद पुराने सिल्क रोड व्यापार मार्ग को फिर से मजबूत करना था. यह ट्रेन तेहरान के पास स्थितएप्रिन ड्राई पोर्ट तक पहुंचती है, जो एक बड़ा आंतरिक माल टर्मिनल है और वहां से सामान पूरे ईरान में भेजा जा सकता है. मार्च 2021 में चीन और ईरान ने 25 साल के लिए लगभग 400 अरब डॉलर का रणनीतिक समझौता भी किया था. इस समझौते में व्यापार, ऊर्जा, बुनियादी ढांचे और सैन्य सहयोग जैसे कई क्षेत्र शामिल हैं. इसी समझौते के तहत दोनों देशों ने रेल मार्ग को और मजबूत किया ताकि समुद्री रास्तों में रुकावट आने पर भी व्यापार जारी रह सके.
चीन से ट्रेन पहुंची थी ईरान
जून 2025 में ईरान की समाचार एजेंसी मेहर समाचार एजेंसी ने बताया कि चीन के शहर Xi’an से एक नई बिजनेस मालगाड़ी शुरू की गई, जिसने लगभग 5,300 किलोमीटर की दूरी तय कर तेहरान के पास एप्रिन ड्राई पोर्ट तक पहुंच बनाई. ईरानी अधिकारियों के मुताबिक यह रेल मार्ग अमेरिकी सैन्य मौजूदगी वाले समुद्री इलाकों से दूर है, इसलिए अगर समुद्री व्यापार में बाधा आती है तो भी चीन और ईरान के बीच व्यापार जारी रह सकता है. हालांकि इस व्यवस्था की कुछ सीमाएं भी हैं. ईरान से चीन जाने वाले निर्यात का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा तेल और उससे जुड़े उत्पादों का होता है, जैसे पेट्रोकेमिकल और गैस. इतना बड़ा तेल कारोबार रेल के जरिए पूरी तरह संभव नहीं है, क्योंकि कच्चा तेल आम तौर पर जहाजों से ही बड़ी मात्रा में भेजा जाता है. फिर भी यह रेल मार्ग गैर-तेल सामान और सीमित व्यापार के लिए एक वैकल्पिक रास्ता देता है.
चीन की बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव योजना
यह परियोजना चीन की बड़ी योजना बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव का भी हिस्सा है, जिसकी घोषणा शी जिनपिंग ने 2013 में की थी. इस योजना के तहत एशिया, यूरोप और अफ्रीका को जोड़ने के लिए बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचा तैयार किया जा रहा है. मई 2025 में ईरान, चीन, कजाकिस्तान, उज़्बेकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान और तुर्की के रेल अधिकारियों की तेहरान में बैठक भी हुई थी, जिसमें एशिया से यूरोप तक एक बड़ा रेल नेटवर्क बनाने पर चर्चा हुई. यह नेटवर्क उस आर्थिक कॉरिडोर के विकल्प के रूप में भी देखा जा रहा है जिसे India–Middle East–Europe Economic Corridor कहा जाता है.



