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‘पाक से कोई मुकाबला नहीं, भगवा जर्सी का फैसला…’, हॉकी कोच की ABP से बातचीत

इसी महीने यानी अगस्त की 15 तारीख से हॉकी वर्ल्ड कप 2026 का आगाज होने जा रहा है. इस बार हॉकी विश्व कप की मेजबानी बेल्जियम और नीदरलैंड्स कर रहे हैं. भारतीय हॉकी टीम अपने वर्ल्ड कप अभियान की शुरुआत 15 अगस्त को वेल्स के खिलाफ मुकाबले से करेगी.

ओलंपिक में लगातार दो बार ब्रॉन्ज मेडल जीत चुकी भारतीय टीम से इस बार वर्ल्ड कप में भी दमदार प्रदर्शन की उम्मीद है. लेकिन क्या भारत इस बार 51 साल से चले आ रहे वर्ल्ड कप के गोल्ड मेडल के सूखे को खत्म कर पाएगा?

वर्ल्ड कप से पहले भारतीय टीम की तैयारियों, उसकी ताकत, पाकिस्तान के मौजूदा हालात और जर्सी के रंग को लेकर उठे विवाद समेत तमाम मुद्दों पर ABP News Consultant रवीश बिष्ट ने पूर्व भारतीय हॉकी कोच हरेंद्र सिंह से एक्सक्लूसिव बातचीत की.

सवाल 1: आप भारतीय टीम की वर्ल्ड कप के लिए तैयारियों को किस तरह देखते हैं?

हरेंद्र सिंह: मैं साफ तौर पर कहूंगा कि भारत का कम से कम सेमीफाइनल तो पक्का है. भारतीय टीम इस समय काफी बेहतरीन पोजिशन में है. अगर भारत के अलावा देखें तो बेल्जियम और हॉलैंड की टीमें भी काफी बेहतर हैं. लेकिन अगर इस वर्ल्ड कप की टॉप-3 टीमों की बात की जाए, तो भारत निश्चित तौर पर टॉप-3 में आता है. टीम की तैयारी अच्छी है और इस बार हमारे पास काफी मजबूत स्क्वॉड है.

सवाल 2: इस भारतीय टीम का सबसे  स्ट्रॉन्ग पॉइंट क्या है?

हरेंद्र सिंह: भारतीय टीम का सबसे बड़ा स्ट्रॉन्ग पॉइंट उसका काउंटर अटैक है. जब हम लो-ब्लॉक हॉकी खेलते हैं, यानी जब हम ग्राउंड के सेंटर में एक कॉम्पैक्ट यूनिट के तौर पर खेलते हैं, तो हमारी टीम काफी मजबूत हो जाती है. पहले भारतीय टीम में हमारे स्ट्राइकर काफी तेज होते थे. लेकिन अब अच्छी बात ये है कि हमारा मिडफील्ड और डिफेंस भी काफी मजबूत हो चुका है. इसलिए अब टीम सिर्फ फॉरवर्ड लाइन पर निर्भर नहीं है.

सवाल 3: वर्ल्ड कप में भारतीय टीम के मुख्य खिलाड़ी कौन रहेंगे?

हरेंद्र सिंह: मैं किसी एक खिलाड़ी का नाम नहीं लूंगा, क्योंकि हमारी टीम काफी ज्यादा स्ट्रॉन्ग है. सभी खिलाड़ी बेहतरीन तैयारी के साथ आए हैं. हरमनप्रीत, जुगराज, रोहित दास और राजेंद्र जैसे खिलाड़ी काफी तगड़े हैं. राजेंद्र तो बहुत अच्छे ड्रैग फ्लिकर भी हैं. रोहित दास की बात करें तो इस समय अगर वर्ल्ड हॉकी की बात करें, तो वह बेहतरीन हिटर्स में से एक हैं. 

भारत के पास काफी वैरायटी है. मिडफील्ड में मनप्रीत के आने से टीम और मजबूत हुई है. वह एक लीडर हैं और सबसे अच्छी बात ये है कि उनके अंदर गेम को रीड करने की क्षमता बहुत ज्यादा है. वह बहुत जल्दी गेम को समझ लेते हैं. इसका फायदा हार्दिक और विवेक जैसे खिलाड़ियों को मिलता है, क्योंकि उन्हें ज्यादा फ्रीडम के साथ खेलने का मौका मिलता है.

सवाल 4: भारत के ग्रुप में इंग्लैंड, पाकिस्तान और वेल्स हैं. ऐसे में भारत के ग्रुप से टॉप करने के कितने चांस हैं?

हरेंद्र सिंह: भारत अपने ग्रुप में टॉप करेगा. मेरे हिसाब से इंग्लैंड दूसरे स्थान पर रहेगा. जहां तक पाकिस्तान की बात है, तो फिलहाल पाकिस्तान का कोई चांस नहीं है. भारत ग्रुप में टॉप करेगा और इंग्लैंड उसके बाद रहेगा.

सवाल 5: क्या पाकिस्तान की हॉकी में अब दम नहीं रहा?

हरेंद्र सिंह: पाकिस्तान के पास कुछ अच्छे खिलाड़ी जरूर हैं, लेकिन उनकी टीम स्ट्रॉन्ग नहीं है. पाकिस्तान ने सबसे बड़ी गलती ये रही कि उन्होंने अपने कोच ताहिर जमां को हटा दिया. मेरे हिसाब से ये उनका सबसे गलत कदम था. ताहिर जमां जिस तरीके से टीम को तैयार कर रहे थे, उससे पाकिस्तान की टीम काफी मजबूत बन सकती थी और वर्ल्ड कप में अच्छी टक्कर दे सकती थी.

अभी इस टीम को हम ज्यादा रेट नहीं कर सकते. लेकिन अगर पाकिस्तान इसी टीम के साथ आगे बढ़ता है और खिलाड़ियों को लगातार मौका देता है, तो 2028 के लॉस एंजेलिस ओलंपिक में उनकी टीम मजबूत बन सकती है. हालांकि भारत और पाकिस्तान का अब कोई मुकाबला नहीं है- न हॉकी में और न क्रिकेट में. पाकिस्तान हमसे बहुत दूर हो चुका है. इसलिए अब उनके साथ मुकाबले की बात करना भी बेकार हो चुका है.

सवाल 6: भारत ने टोक्यो और पेरिस ओलंपिक में ब्रॉन्ज मेडल जीता, लेकिन हॉकी वर्ल्ड कप में हमारा प्रदर्शन बेहद खराब रहा है. 1975 में हमने गोल्ड जीता था और उसके बाद से अभी तक खाली हाथ हैं. इस पर आप क्या कहेंगे?

हरेंद्र सिंह: हम काफी समय तक कन्फ्यूजन में रहे कि हमें इंडियन स्टाइल की हॉकी खेलनी है या यूरोपियन स्टाइल की हॉकी.
हमारे पास लॉन्ग टर्म प्लानिंग नहीं थी. 2012 और 2018 हमारे लिए डिजास्टर रहे. लेकिन उसके बाद हॉकी फेडरेशन और SAI ने लॉन्ग टर्म विजन के साथ काम किया.

2016 की जिस टीम को मैंने कोच किया था, उस टीम के कई खिलाड़ी आज भी भारतीय टीम का हिस्सा हैं. खिलाड़ियों के साथ जो कंटिन्यूटी बनी, उसका फायदा अब हमें मिल रहा है. मुझे पूरा विश्वास है कि 51 साल से चला आ रहा वर्ल्ड कप का सूखा भारतीय टीम इस बार खत्म करेगी. इस टीम में डेप्थ है और सबसे बड़ी बात ये है कि भारतीय टीम किसी एक खिलाड़ी पर निर्भर नहीं है. यही हमारी सबसे बड़ी ताकत है.

सवाल 7: भारतीय हॉकी टीम की जर्सी का रंग नीले से भगवा हो गया है. इस पर काफी चर्चा हो रही है. आप इसे किस तरह देखते हैं?

हरेंद्र सिंह: मेरे हिसाब से जर्सी तो पहले ही बदल जानी चाहिए थी. भगवा रंग हमारे तिरंगे में भी है. जबकि आसमानी नीला रंग हमारे झंडे में नहीं है. इससे पहले भी भारतीय टीम की जर्सी का रंग बदला गया है. पीला रंग भी आया था. तब किसी ने कोई आवाज नहीं उठाई.

आपने टेस्ट क्रिकेट में सफेद गेंद से टेस्ट मैच होते हुए देखा है? नहीं होता है. क्योंकि उसके पीछे साइंटिफिक रीजन होता है. इसी तरह अगर साइंटिफिक पहलू से देखें तो भगवा जर्सी का भी अपना फायदा है. ब्लू एस्ट्रो टर्फ पर भगवा रंग की जर्सी खिलाड़ियों को दूसरे खिलाड़ियों को देखने में ज्यादा आसानी दे सकती है. ब्लू जर्सी के साथ ये चीज उतनी आसान नहीं थी. इसलिए मेरे हिसाब से जर्सी का रंग बदलने का फैसला सही है.

 

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