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‘पत्नी से पीछा छुड़ा दो भगवान…’ मन्नत हो गई पूरी तो पति ने की 9KM की दंडवत यात्रा, बोला-नरक से मिला छुटकारा

‘पत्नी से पीछा छुड़ा दो भगवान…’ मन्नत हो गई पूरी तो पति ने की 9KM की दंडवत यात्रा, बोला-नरक से मिला छुटकारा

कहते हैं कि शादियों के जोड़े स्वर्ग में बनते हैं और सात जन्मों का साथ निभाने की कसमें खाकर लोग एक-दूसरे का हाथ थामते हैं, लेकिन बस्ती जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने वैवाहिक सुख की परिभाषा ही बदल दी. यहां एक पति अपनी पत्नी से इस कदर परेशान हुआ कि उसने भगवान से साथ रहने की नहीं, बल्कि ‘पीछा छुड़ाने’ की मन्नत मांग ली. वहीं मन्नत पूरी होने पर जो हुआ, उससे पूरे इलाके में चर्चाओं का बाजार गर्म है.

मामला सोनहा थाना क्षेत्र के एक गांव का है. यहां के एक युवक का वैवाहिक जीवन शादी के मात्र 2 साल के भीतर ही कलह की भेंट चढ़ गया. आपसी विवाद और मानसिक तनाव से तंग आकर पति ने पौराणिक मंदिर मां बैड़वा समय माता के दरबार में अरजी लगाई. युवक ने मां से मन्नत मांगी कि यदि उसे पत्नी से छुटकारा मिल गया तो वह घर से मंदिर तक दंडवत यात्रा करेगा.

9 किलोमीटर तक की दंडवत यात्रा

पत्नी से जब कानूनी या सामाजिक रूप से पीछा छूटा तो युवक ने अपनी मन्नत पूरी करने का फैसला किया. सुबह बिना अन्न-जल ग्रहण किए पत्नी से पीड़ित पति ने अपने गांव से भानपुर स्थित माता के मंदिर तक 9 किलोमीटर लंबी यात्रा की. युवक दंडवत होकर मंदिर की चौखट तक पहुंचा. हैरानी की बात यह रही कि इस यात्रा में युवक अकेला नहीं था. उसके माता-पिता और गांव के दर्जनों लोग गाजे-बाजे और माता के जयकारों के साथ उसके पीछे चल रहे थे. समाज में जहां अक्सर टूटे रिश्तों पर मातम मनाया जाता है, यहां एक रिश्ता टूटने की खुशी में भक्ति का सैलाब उमड़ा था.

‘अब शांति महसूस कर रहा हूं’

शाम 6 बजे जब वह लहूलुहान घुटनों और थकान से चूर शरीर के साथ मंदिर पहुंचा, तो उसने माता के दर्शन किए और प्रसाद चढ़ाकर आभार व्यक्त किया. युवक के चेहरे पर शारीरिक थकान से ज्यादा मानसिक सुकून की चमक थी. उसने मीडिया और स्थानीय लोगों से बातचीत में बस इतना ही संकेत दिया कि वह अपने वैवाहिक जीवन के नरक से निकलकर अब शांति महसूस कर रहा है. पत्नी पीड़ित पति ने बताया कि वह अपनी पत्नी से प्रताड़ित था, जिससे छुटकारा पाने के लिए उसने कोर्ट में अपील की थी और दो साल केस चलने के बाद आखिरकार आज उसे तलाक मिल गया है. इस फैसले से वो और उसका पूरा परिवार बहुत खुश है.

यह घटना आज के दौर में वैवाहिक रिश्तों के गिरते स्तर और बढ़ते मानसिक तनाव का जीवंत उदाहरण है. यहां लोग अपनी पत्नी की लंबी उम्र के लिए करवाचौथ का व्रत रखते हैं. वहीं इस पीड़ित पति की दंडवत यात्रा ने समाज को सोचने पर मजबूर कर दिया है. क्या अब रिश्तों का बोझ आस्था के सहारे ही उतारा जाएगा?

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