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नोएडा: 2 बिल्डर अरेस्ट, ऑफिस भी सील, स्पॉट पर पहुंची SIT… इंजीनियर मौत मामले में आज क्या कुछ हुआ?

नोएडा के सेक्टर 150 में सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत के मामले में पुलिस ने ताबातोड़ कार्रवाई की है. आज हुई दो बिल्डरों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने आरोपी बिल्डरों के दफ्तरों को सील कर दिया. यह कार्रवाई ग्रेटर नोएडा की नॉलेज पार्क थाना पुलिस ने की है. जिन बिल्डरों के दफ्तर सील किए हैं उनमें लोटस ग्रीन और एमजेड विशटाउन से जुड़े आरोपी शामिल हैं. पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह कदम जांच को प्रभावित होने और सबूत को सुरक्षित करने के लिए उठाया गया है.

ग्रेटर नोएडा के एसीपी हेमंत उपाध्याय ने बताया कि बीती 16 जनवरी को नोएडा सेक्टर 150 में हुए सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता कि हादसे में दर्दनाक मौत के बाद पुलिस लगातार जांच कर रही थी. पीड़ित पिता राजकुमार मेहता की तहरीर पर पुलिस ने दो बिल्डरों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था, जिसमें एक बिल्डर अभय सिंह को पुलिस पहले ही न्यायिक हिरासत में जेल भेज चुकी है. वहीं, आज फिर नॉलेज पार्क पुलिस ने दो और बिल्डर रवि बंसल और सचिन करनावल को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया. इसके साथ ही उनके दफ्तरों को सील कर दिया गया.

घटनास्थल पर SIT ने की जांच

सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत के बाद लगातार यह मामला सुर्खियों में था. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस मामले का संज्ञान लेकर तुरंत तीन सदस्यीय एसआईटी टीम का गठन किया. 21 जनवरी को एसआईटी की टीम नोएडा प्राधिकरण दफ्तर पहुंची थी और उसके बाद तीन सदस्यीय टीम ने घटना स्थल का भी निरीक्षण किया था. आज एक बार फिर एसआईटी की टीम फिर से उसी जगह पहुंची जहां पर यह हादसा हुआ था. करीब आधे घंटे तक टीम मौके पर मौजूद रही और घटनास्थल से कुछ साक्ष्य भी प्राप्त किया. इस दौरान नोएडा ज्वाइंट सीपी राजीव नारायण मिश्रा भी मौजूद रहे.

SIT की टीम ने जुटाए सबूत

एसआईटी की टीम करीब 6 बजे के आसपास नोएडा के सेक्टर 150 घटनास्थल पर पहुंची और वहां स्पीड ब्रेकर से लेकर गाड़ी गिरने की दूरी को चिहिंत किया, क्योंकि जिस जगह यह हादसा हुआ था उसे ठीक 20 मीटर पहले एक सड़क पर ब्रेकर था, जिस पर किसी भी तरह की मार्किंग नहीं की गई थी. घने कोहरे के वक्त इसी ब्रेकर से मृतक युवराज मेहता की गाड़ी होकर गुजरी और सीधे बिल्डर की साइट पर करीब 70 फीट गहरे गड्ढे में जा गिरी थी जिसमें पानी भरा हुआ था. करीब आधे घंटे चली जांच में एसआईटी की टीम ने यह जानने की कोशिश की, आखिर सड़क निर्माण में क्या लापरवाही हुई और क्यों सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया गया. टीम ने यह भी देखा कि हादसे के वक्त ना तो वहां पर कोई रिफ्लेक्टिंग लाइट थी और ना ही घटना स्थल पर कोई भी बैरिकेडिंग.

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जब इस मामले का संज्ञान लिया तो तीन सदस्य एसआईटी टीम का गठन किया और इस टीम से 5 दिन के अंदर रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए. रिपोर्ट के आधार पर तय किया जाएगा कि आखिरकार इस हादसे में प्रशासन प्राधिकरण और पुलिस, फायर विभाग, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ इन सभी की कहां-कहां लापरवाही रही. रिपोर्ट में दोषी बिल्डरों संबंधित प्राधिकरण के अधिकारियों और अन्य विभाग के अधिकारियों की स्पष्ट जानकारी दी जाएगी.

लोगों ने क्या कहा?

मृतक के पिता राजकुमार मेहता और सोसायटी के निवासियों ने बताया कि लोग कई सालों से प्राधिकरण से मांग कर रहे थे कि सेक्टर में लोगों की सुरक्षा मानकों, स्ट्रीट लाइट, सड़कों में गड्ढे आदि सभी दुरुस्त कराया जाए. लेकिन हादसे के बाद एक ही दिन में इस सेक्टर की सूरत को बदल कर रख दिया. अधिकारियों के आने से पहले इस रोड को शीशे की तरह चमका दिया जगह-जगह स्पीड ब्रेकर, रिफ्लेक्टर बोर्ड, साइन बोर्ड और सड़कों पर डिवाइडर पर मार्किंग भी कर दी, जिस सड़क पर आज तक झाड़ू तक नहीं लगी थी उस रोड को पानी से धो डाला. काश यही काम प्राधिकरण पहले कर देता तो शायद युवराज की जान बच जाती.

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