उत्तर प्रदेशभारत

‘हर आंगनबाड़ी से 10000 चाहिए’… एटा के CDO ने मांगी रिश्वत, डिप्टी CM केशव ने लिया एक्शन; हो गए सस्पेंड

‘हर आंगनबाड़ी से 10000 चाहिए’… एटा के CDO ने मांगी रिश्वत, डिप्टी CM केशव ने लिया एक्शन; हो गए सस्पेंड

उत्तर प्रदेश के एटा जिले में तैनात मुख्य विकास अधिकारी डॉ. नागेंद्र नारायण मिश्रा पर रिश्वत मांगने का बड़ा आरोप लगा है. सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो में वे कथित तौर पर जिले की आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं से प्रति व्यक्ति 10 हजार रुपए की ‘व्यवस्था’ कराने की बात करते सुनाई दे रहे हैं. वीडियो सामने आने के बाद मामला तेजी से सरकार तक पहुंचा और उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के निर्देश पर शासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए सीडीओ को निलंबित कर दिया. उन्हें मुख्यालय से संबद्ध किया गया है. नियम-7 के तहत विभागीय जांच शुरू कर दी गई है.

डिस्ट्रिक्ट कॉर्डिनेटर के सामने रखी डिमांड

वीडियो में सीडीओ नागेंद्र नारायण मिश्रा डिस्ट्रिक्ट कॉर्डिनेटर संजीव पचौरी से बातचीत करते दिख रहे हैं. इसमें वे स्पष्ट रूप से कहते हैं कि हर आंगनबाड़ी से 10 हजार रुपए चाहिए और संजीव पचौरी को अपना आदमी बताते हुए इस राशि की व्यवस्था करने को कहते हैं. डिस्ट्रिक्ट कॉर्डिनेटर ने इस मांग को मानने से इनकार कर दिया, जिसके बाद बातचीत में असहजता झलकती है. यह वीडियो एटा के विकास भवन में रिकॉर्ड किया गया माना जा रहा है.

एटा में चल रही आंगनबाड़ी की भर्ती

मामला आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका की भर्ती प्रक्रिया से जुड़ा प्रतीत होता है, जो इन दिनों जिले में चल रही है. कयास लगाए जा रहे हैं कि यह राशि उम्मीदवारों से उगाही के रूप में ली जा रही थी. हालांकि वीडियो में सीधे कैंडिडेट से लेने की बात नहीं कही गई है. वीडियो वायरल होने के बाद प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया और यह मुद्दा लखनऊ तक पहुंच गया.

डिप्टी CM केशव ने एक्स पर किया पोस्ट

उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने खुद एक्स पर इसकी पुष्टि करते हुए लिखा कि, “नागेंद्र नारायण मिश्रा, मुख्य विकास अधिकारी, एटा द्वारा कथित रूप से रिश्वत मांगने से संबंधित वीडियो वायरल होने के प्रकरण में उनके विरुद्ध नियम-7 के अंतर्गत विभागीय कार्रवाई प्रारंभ की गई है. उन्हें निलंबित कर दिया गया है.”

ये भी पढ़ें- खुशखबरी! अब UP के हर गांव तक पहुंचेगी बस, शहर तक आसानी से करें सफर; योगी सरकार का फैसला

यह कार्रवाई यूपी सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के अनुरूप बताई जा रही है. वीडियो में निष्पक्षता और सिफारिश की भी चर्चा चल रही है. यह घटना ग्रामीण विकास और महिला-बाल विकास विभाग से जुड़े अधिकारियों की जवाबदेही पर सवाल खड़े करती है. आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, जो समाज के सबसे निचले स्तर पर गरीब परिवारों की सेवा करती हैं, उनके साथ इस तरह का व्यवहार बेहद आपत्तिजनक है.

एक दिन पहले हटाए गए थे बागपत के CDO

अभी एक दिन पहले बागपत जिले के सीडीओ बृजेंद्र शुक्ल को उनके पद से हटा दिया गया था. जिले के प्रभारी मंत्री जसवंत सैनी की सिफारिश पर ये कार्रवाई हुई थी. दरअसल, सीडीओ बृजेंद्र शुक्ल के खिलाफ विकास कार्यों में लापरवाही बरतने की शिकायतें लखनऊ तक पहुंची थीं. ग्राम विकास अधिकारी, क्षेत्र पंचायत अधिकारियों ने तीन दिन तक उनके खिलाफ धरना दिया था, जिसके बाद प्रभारी मंत्री जसवंत सैनी ने शासन से पत्र लिखकर सीडीओ को हटाने का आग्रह किया था.

Show More

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button