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पार्वती, रोशनी और प्रीती… फर्जी डॉक्यूमेंट लगा ITBP में बनीं कांस्टेबल, अब चली गई नौकरी

यूपी के बरेली जिले में भारत-तिब्बत सीमा पुलिस बल (आईटीबीपी) की कांस्टेबल (जीडी) भर्ती में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है. आईटीबीपी की तृतीय वाहिनी, जो बरेली में स्थित है, ने दस्तावेजों की जांच के दौरान पाया कि तीन महिला रिक्रूट्स ने फर्जी स्थायी निवास प्रमाण पत्र लगाकर नौकरी हासिल कर ली थी. मामला उजागर होने के बाद इन तीनों के खिलाफ कैंट थाने में एफआईआर दर्ज करा दी गई है. आईटीबीपी ने जिन तीन महिलाओं के खिलाफ केस दर्ज कराया है, उनके नाम पार्वती कुमारी, रोशनी प्रजापति और प्रीती यादव है. इन पर आरोप है कि इन्होंने गलत पते और फर्जी प्रमाण पत्र के आधार पर फोर्स में भर्ती ली.

दरअसल, आईटीबीपी ने जब चयनित अभ्यर्थियों के दस्तावेजों का सत्यापन कराया, तभी यह गड़बड़ी पकड़ में आई. पार्वती कुमारी, जो मोहर सिंह की बेटी है, ने असम के नगांव जिले का स्थायी निवास प्रमाण पत्र दिया था. जब इसकी जांच कराई गई तो पता चला कि न तो यह प्रमाण पत्र असली था और न ही पार्वती उस पते पर रहती थी. दूसरी महिला रोशनी प्रजापति, वीर बहादुर प्रजापति की बेटी, ने असम के कछार जिले का प्रमाण पत्र लगाया था. उपायुक्त कार्यालय, कछार (सिलचर) की रिपोर्ट में साफ हुआ कि यह प्रमाण पत्र भी फर्जी है.

तीसरे केस में प्रीती यादव, पुत्री रामकिरत यादव, ने भी कछार जिले के डूलोग्राम का प्रमाण पत्र प्रस्तुत किया, जो जांच में झूठा निकला. जिला प्रशासन ने इस प्रमाण पत्र को अमान्य घोषित कर दिया. इन तीनों ने कर्मचारी चयन आयोग (एसएससी) द्वारा 2024 में आयोजित कांस्टेबल (जीडी) परीक्षा पास की थी, लेकिन फाइनल डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन में यह सारा मामला पकड़ में आ गया.

पुलिस ने दर्ज किया केस, होगी सख्त कार्रवाई

आईटीबीपी ने फौरन इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए कैंट थाने में एफआईआर दर्ज करा दी. कैंट थाना इंचार्ज राजेश कुमार ने बताया कि तीनों आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है. जल्द ही तीनों को गिरफ्तार किया जाएगा. वहीं आईटीबीपी ने भी साफ कर दिया है कि बल में पूरी भर्ती प्रक्रिया पारदर्शी है और फर्जी दस्तावेजों या गलत जानकारी के दम पर नौकरी पाना नामुमकिन है. ऐसे मामलों में जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जा रही है.

पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया की मिसाल

आईटीबीपी की इस सजगता से साफ होता है कि फोर्स भर्ती के मामले में किसी तरह का समझौता नहीं किया जाता. बरेली की तृतीय वाहिनी ने दस्तावेजों की बारीकी से जांच कर न सिर्फ फर्जीवाड़े को पकड़ा, बल्कि फर्जी अभ्यर्थियों के खिलाफ तुरंत कानूनी कदम भी उठाया. इससे यह भी साबित होता है कि भले ही कुछ लोग शॉर्टकट से नौकरी पाने की कोशिश करें, लेकिन पुलिस और बल की सख्ती के चलते ऐसे लोग जल्दी पकड़े जाएंगे.



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