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DM ऑफिस, रेलवे स्टेशन सब वक्फ बोर्ड की प्रॉपर्टी! लखनऊ में 4 हजार से ज्यादा जमीनें सुन्नी-शिया बोर्ड की

DM ऑफिस, रेलवे स्टेशन सब वक्फ बोर्ड की प्रॉपर्टी! लखनऊ में 4 हजार से ज्यादा जमीनें सुन्नी-शिया बोर्ड की

लखनऊ जंक्शन (फाइल फोटो).

महज कुछ घंटों में वक्फ संशोधन बिल लोकसभा में पेश होने जा रहा है और एक बार फिर वक्फ बोर्ड द्वारा उनकी सम्पत्तियों के दावों पर बहस छिड़ गई है. अकेले उत्तर प्रदेश में कुल 1,32,000 (एक लाख 32 हजार) वक्फ सम्पत्ति का दावा किया जा रहा है. इसमें शिया और सुन्नी दोनों वक्फ बोर्ड की सम्पत्तियां शामिल हैं, लेकिन इनमें से 57, 000 से ज्यादा ऐसी सम्पत्तियां हैं, जो सरकारी जमीन पर बनी हुई हैं, जिन पर विवाद है.

यूपी की राजधानी लखनऊ में चार हजार से ज्यादा वक्फ सम्पत्ति का दावा किया जा रहा है. पूर्व अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री मोहसिन रजा का कहना है कि वक्फ बोर्ड की मानेंगे तो लखनऊ का डीएम कार्यालय, राजभवन और रेलवे स्टेशन तक वक्फ की सम्पत्ति पर बने हुए हैं. मोहसिन रजा कहते हैं कि ज्यादातर प्रॉपर्टी के राजस्व से जुड़े अभिलेख (कागज) इनके पास नही हैं और कई सम्पत्तियां ऐसी हैं, जिनका कब्जा इनके पास नहीं है.

मोहसिन रजा ने वक्फ बिल का किया समर्थन

कांग्रेस ने जो तुष्टिकरण की राजनीति के तहत वक्फ बोर्ड को ताकत दी, उसका गलत इस्तेमाल कर मुस्लिम धर्म गुरु और मुस्लिम नेताओं ने वक्फ सम्पत्तियों पर कब्जा किया. दो अप्रैल को जब ये संशोधित बिल लोकसभा में रखा जाएगा तो करोड़ों गरीब और दबे हुए मुसलमान वक्फ मुस्लिम कल्याण दिवस मनाएंगे.

यूपी में वक्फ के नाम पर सरकारी जमीनें कब्जाने में प्रदेश में अयोध्या, शाहजहांपुर, रामपुर, जौनपुर और बरेली जिले सबसे आगे हैं. इनमें से प्रत्येक जिले में वक्फ बोर्ड दो हजार या उससे ज्यादा संपत्तियों पर अपना दावा कर रहा है, जबकि राजस्व रिकॉर्ड में ये जमीनें सार्वजनिक उपयोग वाली श्रेणी में हैं. संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) ने यूपी की ऐसी वक्फ संपत्तियों का जिले वार ब्योरा लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला को सौंप दिया है.

40 जिलों में एक भी प्रॉपर्टी का नामांतरण नहीं

यूपी के 40 जिलों में वक्फ के नाम एक भी संपत्ति का नामांतरण नहीं है. ये 40 जिले वो हैं, जहां बोर्डों के रिकॉर्ड में सैकड़ों की संख्या में वक्फ संपत्तियां दर्ज हैं, लेकिन तहसील रिकॉर्ड में एक का भी नामांतरण नहीं है. ये जिले हैं, फिरोजाबाद, मैनपुरी, मथुरा, अलीगढ़, एटा, कासगंज, अयोध्या, आजमगढ़, बलिया, बदायूं, शाहजहांपुर, सिद्धार्थनगर, बहराइच, बलरामपुर, गोंडा, श्रावस्ती, देवरिया, कुशीनगर, महराजगंज, जालौन, ललितपुर, औरेया, फर्रूखाबाद, कन्नौज, कानपुर देहात, हरदोई, रायबरेली, बुलंदशहर, गाजियाबाद, हापुड़, भदोही, मिर्जापुर, सोनभद्र, बिजनौर, कौशांबी, प्रयागराज, चंदौली, जौनपुर, वाराणसी, महोबा.

इन दो जिलों ने ही भेजी जानकारी

जानकार बता रहे हैं कि सरकार द्वारा दो महीने पहले ही सूचना मांगी गई थी, लेकिन अब तक प्रतापगढ़ समेत सिर्फ दो जिलों ने ही सूचना भेजी है. पर, इन दोनों जिलों ने सभी सूचनाओं के जवाब में शून्य लिखकर भेज दिया है. यानि इनके यहां इस तरह की कोई संपत्ति ही नहीं है, लेकिन शासन के पास पुख्ता जानकारी है कि इन दो जिलों से आई सूचना सही नहीं है. इसलिए संबंधित अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने पर भी विचार चल रहा है.



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