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Bone Cancer Symptoms Causes Treatment Know How To Detect Bone Cancer

Bone Cancer: शरीर की हड्डियों को प्रभावित करने वाला कैंसर ‘बोन कैंसर’ कहलाता है. यह एक ऐसी खतरनाक बीमारी है, जो हड्डियों में पनपना शुरू होती है. जब बोन में कैंसर सेल्स बढ़ने लगते हैं तो ये टीशूज़ को नुकसान पहुंचाना शुरू कर देते हैं. बोन कैंसर को इसलिए भी खतरनाक माना जाता है, क्योंकि ये तेजी से बढ़ता है और शरीर के बाकी आंगों तक फैल सकता है. इस कैंसर की दो कैटेगरीज होती हैं- ‘प्राइमरी’ और ‘सेकेंडरी’. 

प्राइमरी बोन कैंसर में हड्डी की कोशिकाएं यानी सेल्स ही कैंसर सेल्स में तब्दील होने लगती हैं. जबकि सेकेंडरी बोन कैंसर तब होता है, जब किसी व्यक्ति को शरीर के किसी दूसरे अंग में कैंसर हुआ होता है, जो फैलते-फैलते हड्डियों तक पहुंच जाता है. सेकेंडरी बोन कैंसर को मेटास्टैटिक बोन कैंसर भी कहा जाता है.

बोन कैंसर के लक्षण क्या हैं?

बोन कैंसर शरीर की किसी भी हड्डी को प्रभावित कर सकता है. हालांकि इसके ज्यादातर मामले पैरों की हड्डियों और ऊपरी बांहों की लंबी हड्डियों के देखे जाते हैं. बोन कैंसर का सबसे आम लक्षण हड्डियों में होने वाला दर्द है, जो वक्त के साथ बदतर होता चला जाता है. हड्डी पर सूजन और रेडनेस होना या कोई गांठ बनना इस खतरनाक बीमारी के संकेत हो सकते हैं. इसके अलावा, अगर आपकी हड्डी छोटी सी चोट से भी टूट जाती है या इसे घूमाने में समस्या महसूस होती है तो इस स्थिति को भी हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए. 

बोन कैंसर कितने टाइप के होते हैं?

1. ओस्टियोसारकोमा: बोन कैंसर का सबसे कॉमन टाइप ‘ओस्टियोसारकोमा’ है. यह आमतौर पर 20 साल से कम उम्र के लोगों और युवाओं को प्रभावित करता है. 

2. इविंग सरकोमा: इविंग सरकोमा भी बोन कैंसर का ही एक प्रकार है, जो आमतौर पर 10 से 20 साल की उम्र के लोगों को अपनी चपेट में लेता है. युवावस्था में शरीर में होने वाली तेज वृद्धि के दौरान युवा इस बीमारी से प्रभावित होते हैं. उनकी हड्डी में ट्यूमर बन सकता है, जो बढ़कर कैंसर का रूप ले सकता है.

3. कोंड्रोसारकोमा: बोन कैंसर का तीसरा प्रकार कोंड्रोसारकोमा है, जो आमतौर पर 40 साल से ज्यादा उम्र के लोगों को अपनी चपेट में लेता है.

बोन कैंसर के कारण क्या हैं?

वैसे तो इस सवाल का कोई सटीक और सही जवाब नहीं है कि बोन कैंसर किस वजह से होता है. हालांकि एनएचएस के मुताबिक, अगर किसी व्यक्ति ने पहले किसी बीमारी के दौरान रेडियोथेरेपी ली है, तो उसमें बोन कैंसर विकसित होने का खतरा बढ़ जाता है. इसके अलावा, पजेट बोन की बीमारी और ली-फ्राउमेनी सिंड्रोम नाम की एक दुर्लभ आनुवंशिक बीमारी भी बोन कैंसर का कारण बन सकती है. 

बोन कैंसर का इलाज कैसे होता है?

बोन कैंसर का इलाज इस बात पर निर्भर करता है कि व्यक्ति को किसी तरह का बोन कैंसर है या ये कैंसर शरीर के कितने हिस्सों तक फैल गया है. इन्ही बातों को ध्यान में रखकर डॉक्टर या तो कैंसरस बोन को रिमूव करने का सुझाव देंगे या फिर कीमोथेरेपी और रेडियोथेरेपी कराने की सलाह देंगे. 

Disclaimer: इस आर्टिकल में बताई विधि, तरीक़ों और सुझाव पर अमल करने से पहले डॉक्टर या संबंधित एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें.

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