Bangladesh Election Results 2026: नरेंद्र मोदी या शी जिनपिंग, किसके ज्यादा करीबी होंगे PM तारिक रहमान?

बांग्लादेश के चुनावी नतीजों ने तय कर दिया है कि बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बेटे और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी के मुखिया तारिक रहमान ही अब बांग्लादेश के नए प्रधानमंत्री होंगे. लेकिन सवाल ये है कि तारिक रहमान के प्रधानमंत्री बनने से बांग्लादेश और भारत के रिश्तों में क्या बदलाव होगा. आखिर बांग्लादेश का प्रधानमंत्री बनने के बाद तारिक रहमान की ज्यादा नजदीकी चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से होगी या फिर वो भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना दोस्त बनाएंगे. सबसे बड़ा सवाल कि क्या प्रधानमंत्री बनने के बाद तारिक रहमान बांग्लादेश में हो रहे हिंदुओं पर हमले रोकने में कामयाब होंगे या नहीं.
बांग्लादेश की जनता को तारिक पर भरोसा
13 फरवरी 2026 को आए बांग्लादेश के चुनावी नतीजों में अवाम ने तारिक रहमान को अपना नया प्रधानमंत्री चुन लिया है. नाम तय होने के साथ ही भारत की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें जीत की बधाई देते हुए एक्स पर लिखा, ‘यह जीत दिखाती है कि बांग्लादेश की जनता को आपके नेतृत्व पर भरोसा है. भारत एक लोकतांत्रिक, प्रगतिशील और समावेशी बांग्लादेश के समर्थन में खड़ा रहेगा. मैं बहुआयामी संबंधों को मजबूत करने और साझा विकास लक्ष्यों को आगे बढ़ाने के लिए आपके साथ काम करने के लिए उत्सुक हूं.’
लेकिन सवाल है कि क्या भारत की ओर से तारिक रहमान की जीत पर जितनी गर्मजोशी दिखाई गई है, तारिक रहमान भी भारत के साथ उतनी ही गर्मजोशी वाले रिश्ते रखेंगे. ये सवाल इसलिए भी जरूरी है, क्योंकि न सिर्फ तारिक रहमान, बल्कि उनकी मरहूम मां खालिदा जिया और उनकी BNP का इतिहास भी कभी भारत का पक्षधर नहीं रहा है. इसके कई नए पुराने उदाहरण भी मौजूद हैं. जैसे:
- तारिक रहमान की मां खालिदा जिया ने साल 1991 में अपने पहले ही चुनाव में शेख हसीना पर आरोप लगाया था कि उनकी पार्टी अवामी लीग बांग्लादेश को भारत की जंजीरों में जकड़ देगी.
- भारत-बांग्लादेश के बीच हुई 1972 की संधि का खालिदा जिया विरोध करती थीं और उसे बांग्लादेश की संप्रभुता के खिलाफ बताती थीं.
- खालिदा जिया ने भारत को ट्रांजिट राइट्स यानी कि रास्ता देने का विरोध किया था. तब उन्होंने कहा था कि भारतीय ट्रकों का बांग्लादेश की सड़कों पर टोल-फ्री चलने देना भारत की गुलामी करना है.
- खालिदा ने प्रधानमंत्री रहते हुए भारत के प्रतिबंधित संगठन उल्फा को हथियार तस्करी की खुली छूट दी थी. 2004 में चटगांव से हथियारों की जब्ती होने के बाद इसका खुलासा हुआ था, जब करीब 10 ट्रक बांग्लादेशी हथियार भारत के बॉर्डर पर पकड़े गए थे.
इसके अलावा भी खालिदा जिया की सरकार ने भारत से कभी बेहतर तालमेल नहीं रखा था. तारिक रहमान के हालिया काम भी कमोबेश इसी की तरफ इशारा कर रहे हैं. 2007 में 18 महीने की जेल और 17 साल तक लंदन में निर्वासित जीवन बिताने के बाद तारिक रहमान 26 दिसंबर 2025 को बांग्लादेश की राजधानी ढाका लौटे थे. इसके कुछ ही दिनों के बाद जनवरी 2026 में उन्होंने चीन के राजदूत याओ वेन से शिष्टाचार भेंट की थी और कहा था कि बांग्लादेश और चीन के रिश्ते करीबी और मैत्रीपूर्ण हैं.
बांग्लादेश ने वन चाइना पॉलिसी का समर्थन किया
तारिक रहमान ने चीन की सबसे कमजोर नस पर भी बांग्लादेश के समर्थन की बात की थी और कहा था कि वो वन चाइना पॉलिसी के साथ हैं. तारिक ने चीन के साथ मौजूदा बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव के तहत चल रहे करीब 6 अरब डॉलर के प्रोजेक्ट्स और रक्षा समझौतों को जारी रखने की भी बात की थी, जिसने स्वाभाविक तौर पर तारिक रहमान की पसंद को जाहिर कर दिया था.
अब जब तारिक रहमान बांग्लादेश के नए प्रधानमंत्री बनने जा रहे हैं तो वो चीन के प्रति इकतरफा झुकाव रखकर बांग्लादेश को आगे ले जा पाएंगे, इसमें संदेह है. लिहाजा वो अपनी विदेश नीति को फिलहाल बैलेंस करने में लगे हुए हैं और तभी तो वो संबंधों पर जमी बर्फ को पिघलाने की कोशिश कर रहे हैं. क्योंकि वो इस बात को भूले नहीं होंगे कि भले ही उनकी मां खालिदा जिया ने भारत के साथ रिश्ते कभी नहीं सहेजे, लेकिन जब खालिदा जिया का निधन हुआ तो खुद प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर खालिदा जिया के निधन पर शोक जताया. भारत के विदेश मंत्री डॉक्टर एस जयशंकर ढाका पहुंचे और तारिक रहमान से मुलाकात की. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी दिल्ली में बांग्लादेश उच्चायोग तक गए और खालिदा जिया के निधन पर शोक जताया.
किसके साथ होगी तारिक रहमान की नजदीकी?
ऐसे में अभी ये तय करना कि तारिक रहमान भारत या चीन किसके ज्यादा करीबी होंगे, थोड़ी जल्दबाजी होगी. क्योंकि मोहम्मद यूनूस के वक्त बांग्लादेश ने भारत के साथ रिश्ते बिगाड़कर चीन के साथ जो समझौते किए थे और जिसके जरिए चीन बांग्लादेश में बहुत अंदर तक दाखिल हो गया था, उससे पूरी तरह छुटकारा पाना तारिक रहमान के लिए कतई आसान नहीं होगा. चीन बांग्लादेश का न सिर्फ सबसे बड़ा कारोबारी साझीदार है, बल्कि चीन ने बांग्लादेश में बड़ा निवेश भी किया है. तो अभी तारिक रहमान की शपथ का इंतजार करते हैं. उनके फैसलों का इंतजार करते हैं और तब तय करते हैं कि तारिक रहमान की ज्यादा नजदीकी भारत के साथ होगी या फिर चीन के साथ.



