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UP: 2 साल में एक लाख से ज्यादा लापता, हाईकोर्ट ने लगाई फटकार, सरकार को किया तलब

UP: 2 साल में एक लाख से ज्यादा लापता, हाईकोर्ट ने लगाई फटकार, सरकार को किया तलब

इलाहाबाद हाईकोर्ट.

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने उत्तर प्रदेश में बढ़ते गुमशुदा व्यक्तियों के मामलों पर गंभीर चिंता जताते हुए खुद संज्ञान लिया है. कोर्ट ने इस मुद्दे को जनहित याचिका (PIL) के रूप में दर्ज कर राज्य सरकार से विस्तृत आंकड़े और कार्ययोजना मांगी है. एक व्यक्तिगत मामले की सुनवाई के दौरान न्यायालय के संज्ञान में आया कि जनवरी 2024 से जनवरी 2026 तक के लगभग दो वर्षों में उत्तर प्रदेश में 1,08,300 से अधिक गुमशुदगी की शिकायतें दर्ज की गईं.

इनमें से पुलिस ने मात्र 9,700 मामलों में ही कार्रवाई की और लोगों का पता लगाया. शेष अधिकांश मामलों में कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया. कोर्ट ने इन आंकड़ों को चौंकाने वाला और अत्यंत गंभीर बताते हुए पुलिस की उदासीनता पर नाराजगी जताई. बेंच ने कहा कि लापता व्यक्तियों की शिकायतें ऐसी हैं जिनमें तुरंत कार्रवाई की आवश्यकता होती है, लेकिन राज्य में संस्थागत स्तर पर ही इसकी अनदेखी हो रही है.

हाईकोर्ट ने सरकार से मांगी जानकारी

इस मामले को प्रदेश में गुमशुदा व्यक्तियों के संबंध में शीर्षक से जनहित याचिका के रूप में रजिस्टर किया गया. राज्य सरकार के संबंधित विभागों से सभी आंकड़े, रिकॉर्ड और उपलब्ध जानकारी कोर्ट के सामने पेश करने का निर्देश. अपर मुख्य सचिव गृह और पुलिस महानिदेशक को अगली सुनवाई में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने का आदेश दिया.

रिपोर्ट और आंकड़ों के आधार पर कार्रवाई तय

कोर्ट ने संकेत दिया कि प्रस्तुत रिपोर्ट और आंकड़ों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी, जिसमें जांच प्रणाली को मजबूत बनाने के लिए ठोस कदम शामिल होंगे. यह आदेश न्यायमूर्ति अब्दुल मोईन और न्यायमूर्ति बबीता रानी की खंडपीठ ने पारित किया. मूल मामले में एक पिता ने अपने बेटे की गुमशुदगी पर पुलिस की निष्क्रियता के खिलाफ याचिका दायर की थी, जहां FIR दर्ज होने में डेढ़ साल से अधिक समय लग गया था.

23 मार्च को होगी अगली सुनवाई

इस मामले की अगली सुनवाई 23 मार्च को निर्धारित की गई है. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह मुद्दा केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक तंत्र के लिए बड़ी चुनौती है. यह फैसला उत्तर प्रदेश में लापता व्यक्तियों की बढ़ती संख्या पर सवाल उठाता है और उम्मीद है कि इससे जांच और ट्रैकिंग सिस्टम में सुधार होगा.

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