उत्तर प्रदेशभारत

उत्तर प्रदेश: पूर्व BSP सांसद उमाकांत यादव को हाईकोर्ट से राहत, 30 साल पुराने हत्याकांड में उम्रकैद पर लगी रोक

उत्तर प्रदेश:  पूर्व BSP सांसद उमाकांत यादव को हाईकोर्ट से राहत, 30 साल पुराने हत्याकांड में उम्रकैद पर लगी रोक

उमाकांत यादव

उत्तर प्रदेश के जौनपुर में BSP के पूर्व सांसद बाहुबली उमाकांत यादव को हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है. करीब 30 साल पहले शाहगंज जंक्शन पर हुए GRP हत्याकांड के मामले में मिली उम्रकैद की सजा और जुर्माने को कोर्ट ने खारिज कर दिया है. बीते 18 अगस्त को हाई कोर्ट ने इसी मामले में यादव को कुछ शर्तों पर एक लाख के निजी मुचलके पर जमानत दी थी.

बुधवार (27 अगस्त) को उमाकांत की चुनाव लड़ने याचिका पर विचार करते हुए हाई कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश के आधार पर उनकी निचली अदालत की सजा को खारिज कर दिया है. ऐसे में अब उमाकांत के चुनाव लड़ने का रास्ता साफ हो गया है. फिलहाल, अभी उमाकांत यादव जौनपुर जेल में ही हैं. अन्य मामलों में जमानत मिलने के बाद वह जेल से बाहर आ सकेंगे.

करीब 7 सालों से जौनपुर की जिला जेल में बंद

दरअसल, जौनपुर की एमपी एमएलए कोर्ट ने पूर्वांचल के बाहुबली उमाकांत यादव समेत सात लोगों को 4 फरवरी 1995 को शाहगंज जंक्शन पर हुए GRP हत्याकांड के मामले में दोषी पाते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी. उमाकांत यादव पिछले करीब सात सालों से जौनपुर की जिला जेल में बंद हैं.

13 अगस्त को HC ने शर्तों पर दी थी जमानत

उम्रकैद की सजा मिलने के बाद बाहुबली उमाकांत यादव जौनपुर की जेल में बंद हैं. उनकी जमानत के लिए हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई थी. उमाकांत 72 साल के हो चुके हैं. ऐसे में कोर्ट ने उनकी उम्र को देखते हुए कुछ शर्तों पर उन्हें उम्र कैद के मामले में जमानत दी थी. कोर्ट ने कहा था कि जमानत के बाद उमाकांत अपनी किसी भी चल व अचल संपत्ति को प्रभावित नहीं करेंगे. उसका क्रय विक्रय करने के साथ ही उस पर किसी तरह का भार नहीं डालेंगे. जमानत मिलने के बाद भी उमाकांत जेल से बाहर नहीं आ सके हैं. अभी भी वह जौनपुर की जिला जेल में है. अन्य मामलों में जमानत मिलने के बाद उनके जेल से बाहर आने का रास्ता साफ हो जाएगा.

हाई कोर्ट ने उमाकांत की सजा को किया खारिज

उम्रकैद के मामले में जमानत मिलने के बाद उमाकांत ने हाई कोर्ट के एक दूसरी याचिका दायर की थी. जिसमें उन्होंने कोर्ट से चुनाव लड़ने की इच्छा जाहिर करते हुए नवजोत सिंह सिंह सिद्धू बनाम पंजाब राज्य व अन्य 2007(1) सर्वोच्च न्यायालय धारा 557 और लोक प्रहरी बनाम भारत निर्वाचन आयोग एवं अन्य के मामलों में सर्वोच्च न्यायालय के निर्णयों पर का हवाला दिया था. उनके वकील ने कोर्ट में दलील दी कि अपीलकर्ता 2004 से 2009 तक संसद सदस्य और वर्ष 1991 से 1993, 1993 से 1996 और 1996 से 2002 तक राज्य विधानसभा के सदस्य रहे हैं. हालांकि एजीए द्वारा उमाकांत के अधिवक्ता की दलीलों का विरोध करते हुए दलील दी गई कि उमाकांत अपराध की गंभीरता को देखते हुए कोई राहत पाने के हकदार नहीं हैं.

फिलहाल, अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें और बार में उद्धृत अधिकारियों की सुनवाई के बाद कहा कि इस न्यायालय द्वारा जमानत प्रदान करने के बाद यह निर्देशित किया जाता है कि अपीलकर्ता की सजा और निचली अदालत द्वारा उसे दी गई सजा उपरोक्त विख्यात अपराधी के लंबित रहने के दौरान निलंबित रहेगी. हाइ कोर्ट ने यह संशोधित आदेश बुधवार को दिया.

चुनाव लड़ने का रास्ता साफ

हाई कोर्ट ने निचली अदालत द्वारा दी गई सजा को खारिज किए जाने के बाद अब बाहुबली उमाकांत यादव के चुनाव लड़ने का रास्ता साफ हो गया है. उमाकांत के अधिवक्ता दिनेश कुमार यादव ने TV9 भारतवर्ष को बताया कि अदालत ने बड़ी राहत दी है. उन्हें कोर्ट पर भरोसा है. अन्य मामलों में भ उमाकांत यादव को जमानत मिलेगी और वह जेल से बाहर आकर चुनाव लड़ सकेंगे.

GRP हत्याकांड में हुई थी उम्रकैद

दरअसल, ये मामला 4 फरवरी 1995 का है. शाहगंज स्टेशन मास्टर कार्यालय प्लेटफार्म नंबर एक पर बेंच पर बैठने की बात को लेकर कुछ लोगों का झगड़ा हो गया. उसमें उमाकांत का ड्राइवर राजकुमार भी शामिल था. सूचना पर जीआरपी चौकी के सिपाहियों ने राजकुमार को हिरासत में लिया. इसकी खबर उमाकांत तक पहुंची तो 7 लोगों (गनर बच्चू लाल स्टेनगन(कार्बाइन), पीआरडी जवान सूबेदार, धर्मराज, महेंद्र और सभाजीत) के साथ मौके पर पहुंच गए. ड्राइवर को छुड़ाने के लिए जीआरपी पुलिसकर्मियों पर अंधाधुंध गोलियां बरसाईं. जिसमें जीआरपी सिपाही अजय सिंह की मौत हो गई, जबकि सिपाही लल्लन सिंह, रेलवे कर्मचारी निर्मल वाटसन और यात्री भरतलाल गोली लगने से जख्मी हो गए.

जांच में दोषी पाए गए उमाकांत

आरोपियों ने जीआरपी चौकी के मालखाने को लूटने की कोशिश की थी. सीबीसीआईडी ने मामले की जांच की. साक्ष्यों और गवाहों को देखते हुए अपर सत्र न्यायाधीश (MP-MLA कोर्ट) शरद कुमार त्रिपाठी ने 8 अगस्त 2022 को उमाकांत यादव समेत 7 आरोपियों को दोषी करार दिया था.

उमाकांत का राजनीतिक कैरियर

आजमगढ़ के पूर्व सांसद रमाकांत यादव के भाई बाहुबली पूर्व सांसद उमाकांत यादव खुटहन विधानसभा (अब शाहगंज विधानसभा) से 3 बार विधायक और मछलीशहर लोकसभा से बीएसपी सांसद रह चुके हैं. बाहुबली उमाकांत यादव जेल में रहकर बीजेपी उम्मीदवार केशरी नाथ त्रिपाठी को 2004 का लोकसभा चुनाव हराकर पहली बार सांसद बने थे. वह साल 1991 से 1993, 1993 से 1996 और 1996 से 2022 तक विधायक भी रह चुके हैं.

Show More

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button