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राम मंदिर: चंदा चोरी केस में CBI-ED जांच की मांग, इस सीनियर बैंक मैनेजर ने बैंकिंग व्यवस्था पर उठाए सवाल

राम मंदिर: चंदा चोरी केस में CBI-ED जांच की मांग, इस सीनियर बैंक मैनेजर ने बैंकिंग व्यवस्था पर उठाए सवाल

अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण को लेकर अब जांच के दायरे को और व्यापक बनाने की मांग उठने लगी है. ऑल इंडिया इंडियन बैंक ऑफिसर्स एसोसिएशन (यूपी एवं उत्तराखंड) के अध्यक्ष एवं इंडियन बैंक लखनऊ के वरिष्ठ प्रबंधक रामनाथ शुक्ला ने मामले की निष्पक्ष जांच के लिए CBI और ED को शामिल किए जाने की वकालत की है. उन्होंने कहा कि बैंक अगर एसओपी का पालन करता तो शायद यह नौबत ना आई होती. जब बैंक या किसी कंपनी की ओर से एसओपी बनती है तो उसमें यह नहीं लिखा जाता है कि हम प्राइवेट कर्मचारी देंगे. सिर्फ इतना रहता है कि कर्मचारी देंगे.

इंडियन बैंक लखनऊ के वरिष्ठ प्रबंधक रामनाथ शुक्ला ने कहा, बैंक को सरकारी कर्मचारी देना चाहिए, क्योंकि मंदिर का मामला था. जैसे कि जानकारी आ रही है कि आउटसोर्स कंपनी से लेकर बैंक ने काउंटिंग में लगाया, उनका काम हाउसकीपिंग और सफाई का था लेकिन उनको गणना में लगा दिया, जो एक बड़ी लापरवाही है.

रामनाथ शुक्ला ने कहा, यदि सभी नियमों और प्रक्रियाओं का पूरी तरह पालन किया गया होता तो इतनी बड़ी घटना की नौबत नहीं आती. निर्धारित व्यवस्थाओं का उल्लंघन हुआ और कुछ लालची तत्वों ने इसका लाभ उठाया. जब अवैध लाभ का सिलसिला शुरू हुआ तो कई अन्य लोग भी इसमें शामिल होते चले गए. अगर जांच में ट्रस्ट से जुड़े किसी व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उसकी भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए.

गहन जांच केवल SIT के स्तर पर संभव नहीं

उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी धनराशि के लेनदेन और वित्तीय पहलुओं की गहन जांच केवल SIT के स्तर पर संभव नहीं है. ऐसे मामलों में वित्तीय जांच एजेंसियों, विशेषकर ED, की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है. पूरे प्रकरण की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए CBI और ED दोनों से जांच कराई जानी चाहिए.

बैंकिंग व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए शुक्ला ने कहा कि जिन लोगों पर धन प्रबंधन की जिम्मेदारी थी, वे नियमित बैंक कर्मचारी नहीं बल्कि हाउसकीपिंग एजेंसी से जुड़े कर्मी बताए जा रहे हैं. उनका कहना है कि सामान्य परिस्थितियों में ऐसी संवेदनशील जिम्मेदारी बैंक के स्थायी कर्मचारियों को दी जाती है, क्योंकि वे बैंकिंग नियमों, जवाबदेही और सेवा आचरण के दायरे में होते हैं.

कई स्तरों पर जिम्मेदारी तय किए जाने की जरूरत

उन्होंने कहा कि बाहरी एजेंसी के कर्मचारियों से इस प्रकार का कार्य कराना गंभीर सवाल खड़े करता है. प्रथम दृष्टया उपलब्ध जानकारियों के आधार पर कुछ नाम चर्चा में हैं लेकिन उनकी भूमिका की पुष्टि जांच एजेंसियों द्वारा ही की जानी चाहिए. उन्होंने दावा किया कि अब तक सामने आए तथ्यों के आधार पर कई स्तरों पर जिम्मेदारी तय किए जाने की आवश्यकता है.

शुक्ला ने कहा, अगर बैंक की ओर से प्रक्रियागत लापरवाही हुई है तो उसका जवाब संबंधित बैंक और उसके अधिकारियों को देना होगा. उन्होंने कहा कि इतने बड़े धार्मिक ट्रस्ट के खाते के संचालन में उच्च स्तर की पारदर्शिता और जवाबदेही अपेक्षित थी. उन्होंने सुझाव दिया कि भविष्य में ट्रस्ट विभिन्न बैंकों को भी सेवा का अवसर देकर बेहतर प्रतिस्पर्धा और पारदर्शिता सुनिश्चित कर सकता है.

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