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घरेलू हिंसा मामले में राजा भैया को बड़ा झटका, दिल्ली हाईकोर्ट ने समन को सही ठहराया

घरेलू हिंसा मामले में राजा भैया को बड़ा झटका, दिल्ली हाईकोर्ट ने समन को सही ठहराया

रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भइया. (फाइल फोटो)

दिल्ली हाई कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के कुंडा से विधायक रघुराज प्रताप सिंह ऊर्फ राजा भैया के खिलाफ उनकी पत्नी भानवी कुमारी सिंह द्वारा दायर घरेलू हिंसा के एक मामले में राउज एवेन्यू कोर्ट द्वारा जारी समन को सही ठहराया है. सुनवाई के दौरान राजा भैया का तर्क था कि डेजिग्नेटेड MP/MLA कोर्ट के पास प्रोटेक्शन ऑफ वीमेन फ्रॉम डोमेस्टिक वायलेंस एक्ट (PWDV एक्ट) के तहत दायर केस की सुनवाई करने का अधिकार नहीं है और केस साकेत में अधिकार क्षेत्र वाली कोर्ट में दायर किया जाना चाहिए था.

30 मई को दिए गए फैसले में, जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने फैसला सुनाया कि राउज एवेन्यू कोर्ट्स में MP/MLA कोर्ट PWDV अधिनियम के तहत एक सक्षम मजिस्ट्रेट कोर्ट बनी हुई है और मौजूदा विधायकों के खिलाफ कार्यवाही सुन सकती है.

विशेष अदालतें बनाने का मकसद

कोर्ट ने कहा कि विधायकों के खिलाफ मामलों के लिए विशेष अदालतें बनाने का अंतर्निहित उद्देश्य यह था कि सांसदों और विधायकों से संबंधित मामले अनिश्चित काल तक लंबित नहीं रहने चाहिए और न्याय प्रशासन और लोकतांत्रिक संस्थाओं के कामकाज में जनता के विश्वास के बड़े विचारों को ध्यान में रखते हुए समयबद्ध तरीके से निपटाया जाना चाहिए.

कोर्ट ने राजा भैया की याचिका की खारिज

इसलिए, एक बार निर्वाचित प्रतिनिधियों से जुड़े मामलों के केंद्रीकृत और जल्द फैसलों के लिए एक प्रणाली बना दी गई है, तो इसे केवल इस आधार पर अप्रभावी नहीं ठहराया जा सकता कि PWDV अधिनियम के तहत कार्यवाही में नागरिक राहत शामिल है, खासकर जब ऐसी कार्यवाही अन्यथा आपराधिक क्षेत्राधिकार का प्रयोग करने वाले न्यायालय द्वारा आयोजित की जाती है. इसलिए, कोर्ट ने राजा भैया की याचिका खारिज कर दी.

राजा भैया के वकीलों ने क्या दिया तर्क?

राजा भैया के वकीलों ने तर्क दिया था कि PWDV एक्ट के तहत कार्रवाई ज़्यादातर सिविल नेचर की होती है और इसलिए यह चुने हुए प्रतिनिधियों से जुड़े क्रिमिनल केस देखने के लिए बनी कोर्ट के दायरे से बाहर है. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि राजा भैया की पत्नी ने साकेत कोर्ट में फाइल की गई पहले की याचिका को वापस लेकर और उसे राउज़ एवेन्यू कोर्ट में दोबारा फाइल करके ‘फोरम शॉपिंग’ की थी.

दिल्ली हाई कोर्ट ने इन दलीलों को खारिज कर दिया और कहा कि हालांकि डोमेस्टिक वायलेंस एक्ट के तहत उपाय ज़्यादातर सिविल हैं, लेकिन कानून में क्रिमिनल एनफोर्समेंट प्रोविजन भी हैं, जिसमें प्रोटेक्शन ऑर्डर तोड़ने पर सजा भी शामिल है. कोर्ट ने कहा कि PWDV एक्ट के तहत कार्रवाई खास तौर पर ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट और मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट को सौंपी जाती है और क्रिमिनल प्रोसीजर से चलती है.

28 साल की शादी के बाद तलाक को लेकर विवाद

आपको बता दें कि राजा भैया और उनकी पत्नी भानवी कुमारी सिंह के बीच 28 साल की शादी के बाद तलाक को लेकर विवाद चल रहा है. उन्होंने क्रूरता और छोड़ने का हवाला देते हुए तलाक के लिए अर्जी दी थी. भानवी सिंह ने राजा भैया पर घरेलू हिंसा, एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर और फाइनेंशियल फ्रॉड का आरोप लगाया है. दिल्ली हाई कोर्ट में रघुराज प्रताप सिंह ने राउज़ एवेन्यू कोर्ट्स के एडिशनल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट (ACJM) के जुलाई 2024 के आदेश को चुनौती दी, जो सांसदों और विधायकों के खिलाफ क्रिमिनल केस के लिए डेजिग्नेटेड कोर्ट है.

जीतेन्द्र भाटी

जीतेन्द्र भाटी

करीब डेढ़ दशक से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय. राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में पॉलिटिक्स, क्राइम, सामाजिक और मानवीय मुद्दों पर रिपोर्टिंग. BAG Films की नर्सरी से IBN7, आज़ाद न्यूज़, प्रज्ञा TV, 4 रियल न्यूज, Focus News और न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया होते हुए देश के सबसे बड़े न्यूज नेटवर्क TV9 भारतवर्ष में खबरों के बीच सफर जारी.

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