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अतुल सुभाष केस का हवाला… 14 साल तक पति को किया परेशान, बरेली कोर्ट ने पत्नी पर लगाया जुर्माना, कही ये बात

अतुल सुभाष केस का हवाला… 14 साल तक पति को किया परेशान, बरेली कोर्ट ने पत्नी पर लगाया जुर्माना, कही ये बात

उत्तर प्रदेश के बरेली की एक फैमिली कोर्ट ने तलाक के मामले में ऐसा फैसला दिया है, जिसकी चर्चा अब दूर-दूर तक हो रही है. अदालत ने कहा कि पति पर अपने बूढ़े मां-बाप को छोड़ने या वृद्धाश्रम भेजने का दबाव बनाना मानसिक क्रूरता है. कोर्ट ने यह भी माना कि ऐसे हालात किसी इंसान को अंदर से तोड़ देते हैं. यह फैसला जज ज्ञानेन्द्र त्रिपाठी ने सुनाया. मामला बरेली की अदालत में चल रहा था, जबकि पति-पत्नी मूल रूप से दिल्ली के रहने वाले हैं.

दरअसल, पति अंकुश जायसवाल ने कोर्ट को बताया कि उनकी शादी साल 2012 में हुई थी. शादी के तुरंत बाद से ही पत्नी का व्यवहार ठीक नहीं रहा. हनीमून को लेकर ही विवाद शुरू हो गया, क्योंकि पत्नी विदेश घूमने जाना चाहती थीं. गोवा जाने पर भी खर्च और होटल को लेकर झगड़ा हुआ. पति का कहना था कि उसने अपनी क्षमता से ज्यादा खर्च किया, लेकिन बदले में उसे अपमान ही मिला.

कोर्ट में यह भी बताया गया कि पत्नी ससुराल वालों के साथ रहना नहीं चाहती थी. घर में बुजुर्ग मां-बाप नीचे रहते थे और पत्नी ऊपर कमरे में. पति की मां घुटनों के दर्द के बावजूद खाना ऊपर लेकर जाती थी, लेकिन पत्नी बर्तन वापस नीचे नहीं लाती थीं. छोटी-छोटी बातों पर झगड़ा करना, चीजें फेंकना और पति को अपमानित करना रोज की बात बन गई थी.

पति ने आरोप लगाया कि पत्नी ने कई बार आधी रात को बाहर घूमने की जिद की. मना करने पर खुद को नुकसान पहुंचाने की धमकी देती थी. एक बार नया मोबाइल खरीदने के लिए सास के सोने के कुंडल तक बिकवा दिए गए. इन घटनाओं को अदालत ने गंभीरता से लिया.

झूठे केस और अदालत की सख्त टिप्पणी

जब पति ने रिश्ते को बचाने की कोशिश में दिल्ली हाई कोर्ट के मेडिएशन सेंटर का सहारा लिया, तो पत्नी ने दहेज और अन्य गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज करा दिया. जांच में कई आरोप संदिग्ध पाए गए. बाद में मामला ट्रांसफर होकर बरेली पहुंचा, जो सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया के आदेश से हुआ था.

जज ने अपने फैसले में कहा कि सिर्फ पढ़ाई-लिखाई से संस्कार नहीं आते. उन्होंने टिप्पणी की कि जो लोग शादी के बाद माता-पिता से अलग रहने की शर्त रखते हैं, उन्हें पहले ही साफ बता देना चाहिए. बुजुर्ग माता-पिता का सहारा छीनना नैतिक रूप से गलत है.

अतुल सुभाष केस का किया जिक्र

कोर्ट ने देश में चर्चित अतुल सुभाष केस का भी जिक्र किया और कहा कि मानसिक प्रताड़ना इंसान को खतरनाक कदम उठाने तक मजबूर कर सकती है. इसलिए ऐसे मामलों को हल्के में नहीं लिया जा सकता. अदालत ने पाया कि पति 2014 से अलग रह रहे थे और पत्नी बिना ठोस कारण मायके चली गई थीं. पति हर तारीख पर पेश होता रहा, जबकि पत्नी की तरफ से देरी होती रही.

आखिरकार कोर्ट ने शादी को पूरी तरह टूट चुका मानते हुए तलाक मंजूर कर लिया. पत्नी पर एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया, क्योंकि अदालत का समय खराब हुआ और झूठे आरोप लगाए गए. पति एसबीआई कार्ड्स एंड पेमेंट सर्विसेज में अधिकारी बताए गए हैं. फैसले में साफ कहा गया कि पति-पत्नी का रिश्ता सम्मान और जिम्मेदारी पर चलता है. जब रिश्ता बोझ बन जाए और सुधार की उम्मीद खत्म हो जाए, तो उसे खत्म करना ही बेहतर होता है.

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