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‘ठग क्वीन’, 50000 की इनामी, 18 FIR… कौन है प्रियंका सिंह, जिसे UP STF ने लखनऊ से दबोचा?

'ठग क्वीन', 50000 की इनामी, 18 FIR... कौन है प्रियंका सिंह, जिसे UP STF ने लखनऊ से दबोचा?

प्रियंका सिंह को UP STF ने लखनऊ से गिरफ्तार किया.

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के पॉश PGI इलाके में उस वक्त सनसनी फैल गई, जब यूपी एसटीएफ की टीम ने एक हाई-प्रोफाइल अपार्टमेंट के 12वें फ्लोर पर दबिश देकर 50 हजार रुपए की इनामी महिला ठग प्रियंका सिंह को धर दबोचा. फ्लैट नंबर 1205 में छिपी यह ‘ठग क्वीन’ साल 2011 से चल रहे एक विशाल निवेश घोटाले की मुख्य कड़ी थी, जिसमें निर्दोष लोगों की गाढ़ी कमाई को ‘सुरक्षित FD’ के नाम पर लूट लिया गया. बुधवार को हुई इस गिरफ्तारी ने न केवल ललितपुर की कोतवाली में दर्ज 2019 के मुकदमे को नई दिशा दी, बल्कि पूरे पूर्वांचल में फैले ठगी के जाल को उजागर करने का रास्ता खोल दिया.

सौभाग्यम अपार्टमेंट में छिपी थी प्रियंका सिंह

सूत्रों से मिली खुफिया जानकारी के आधार पर STF की टीम ने प्रियंका सिंह की लोकेशन ट्रेस की. सर्विलांस से पता चला कि वह लखनऊ के सौभाग्यम अपार्टमेंट में अपने फ्लैट में छिपी हुई है. बुधवार सुबह जैसे ही टीम ने फ्लैट का दरवाजा खटखटाया, प्रियंका के चेहरे पर खौफ साफ झलक रहा था. गिरफ्तारी के वक्त वह सामान्य कपड़ों में थी, लेकिन उसके चेहरे की घबराहट बयां कर रही थी कि अब खेल खत्म हो चुका है.

हजरतगंज में खोला था ऑफिस

पूछताछ में प्रियंका ने जो खुलासे किए, वे किसी बॉलीवुड थ्रिलर से कम नहीं थे. उसने कबूल किया कि साल 2011 में उसने अपने पति राजेश कुमार सिंह, दुर्गेश जायसवाल और विक्रांत त्रिपाठी के साथ मिलकर जेकेवी लैंड एंड डेवलपर्स इन्फ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड नाम की कंपनी शुरू की थी. कंपनी का रजिस्टर्ड ऑफिस लखनऊ के हजरतगंज स्थित महात्मा गांधी मार्ग पर था, जबकि एक ब्रांच ऑफिस ललितपुर में खोला गया. दीपक शुक्ला और आशीष श्रीवास्तव को डायरेक्टर बनाया गया, जबकि प्रियंका खुद असिस्टेंट डायरेक्टर की कुर्सी पर विराजमान थी.

‘सुरक्षित निवेश’ का लालच, फिर अरबों का गबन

कंपनी का मॉडस ऑपरेंडी बेहद शातिराना था. लोगों को लुभावने विज्ञापनों और मीठी-मीठी बातों से फंसाया जाता. “आपके पैसे पर 12-15% सालाना रिटर्न, पूरी तरह सुरक्षित FD स्कीम” यही लालच देकर लोगों से बैंक अकाउंट खुलवाए जाते और पैसे FD के नाम पर कंपनी के खातों में ट्रांसफर कराए जाते. ग्रामीण इलाकों से लेकर शहरों तक, बुजुर्गों से लेकर नौजवानों तक, कोई भी इस जाल से नहीं बचा.

इन जिलों के लोगों को लगाया ‘चूना’

ललितपुर, आजमगढ़, वाराणसी, गाजीपुर, जौनपुर, भदोही, मऊ, महोबा और लखनऊ तक फैले इस नेटवर्क में करोड़ों रुपए जमा हो गए, लेकिन जैसे ही रकम भारी हुई, कंपनी के मालिक गायब हो गए. लखनऊ में ऑफिस बंद, फोन स्विच ऑफ और निवेशकों के सामने सिर्फ धोखा. 2019 में ललितपुर कोतवाली में पहला मुकदमा दर्ज हुआ, जिसमें प्रियंका सिंह मुख्य आरोपी थी. तब से वह फरार चल रही थी.

50 हजार रुपए की इनामी थी प्रियंका सिंह

इससे पहले 29 जून 2025 को पुलिस ने कंपनी के डायरेक्टर आशीष श्रीवास्तव को मध्य प्रदेश के इंदौर से गिरफ्तार किया था. उसके बाद डीआईजी झांसी ने प्रियंका पर 50 हजार रुपए का इनाम घोषित कर दिया. STF के अनुसार, प्रियंका के खिलाफ 18 मुकदमे दर्ज हैं. सभी धोखाधड़ी, जालसाजी और निवेश ठगी से जुड़े हैं. STF ने कहा कि प्रियंका सिंह की सिर्फ एक गिरफ्तारी नहीं, बल्कि ठगी के पूरे साम्राज्य पर चोट है. प्रियंका से मिली जानकारी से हम बाकी फरार आरोपियों तक पहुंच रहे हैं.

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