350 दुकानें, 146 करोड़ खर्च… काशी में बनेगा ‘नमो बनारसी साड़ी सेंटर’, जानिए इसकी खासियत

बनारसी साड़ी (फाइल फोटो).
Varanasi News: वाराणसी नगर निगम शहर के धार्मिक, सांस्कृतिक और पर्यटन स्वरूप को ध्यान में रखते हुए कई बड़े बदलावों की तैयारी कर रहा है. इसी कड़ी में नगर निगम बनारसी साड़ी उद्योग को भी नई पहचान देने की दिशा में काम कर रहा है. इसके तहत कैंट क्षेत्र में 146 करोड़ रुपए की लागत से ‘नमो बनारसी साड़ी सेंटर’ विकसित किया जाएगा. मेयर ने बताया कि इस परियोजना के तहत करीब 350 आधुनिक दुकानें बनाई जाएंगी, जिन्हें बनारसी साड़ी कारोबारियों को उपलब्ध कराया जाएगा.
इसका उद्देश्य शहर के भीड़भाड़ वाले इलाकों से व्यापारिक गतिविधियों को व्यवस्थित करना और बनारसी साड़ी को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाना है. उन्होंने कहा कि इस परियोजना से पर्यटन, व्यापार और रोजगार को एक साथ जोड़ने में मदद मिलेगी. साथ ही बनारसी साड़ी की ब्रांडिंग और मार्केटिंग को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ावा मिलेगा.
शहर से हटेंगी मीट की दुकानें
वहीं नगर निगम की योजना के तहत आने वाले शारदीय नवरात्रि से पहले शहर के मुख्य हिस्सों से नॉनवेज और मीट की दुकानों को हटाकर शहर के चारों प्रवेश द्वारों पर विकसित किए जाने वाले विशेष मीट मार्केट में स्थानांतरित किया जाएगा.
वाराणसी के मेयर अशोक कुमार तिवारी ने बताया कि काशी बाबा विश्वनाथ और मां अन्नपूर्णा की नगरी है, जहां प्रतिदिन लाखों श्रद्धालु दर्शन-पूजन के लिए पहुंचते हैं. ऐसे में शहर की धार्मिक भावनाओं और सांस्कृतिक पहचान को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया है. उन्होंने कहा कि नए मीट मार्केट आधुनिक सुविधाओं से लैस होंगे और यहां कारोबार करने वाले दुकानदारों को विधिवत लाइसेंस भी जारी किए जाएंगे.
शहर में बनेंगे नए कॉम्प्लेक्स और व्यापारिक केंद्र
नगर निगम शहर के विभिन्न क्षेत्रों में नए व्यावसायिक केंद्र भी विकसित करने जा रहा है. बेनियाबाग में 138 दुकानों का निर्माण प्रस्तावित है. इसके अलावा सिगरा में रुद्राक्ष मार्केट और भोजूबीर व जेपी मेहता क्षेत्र में नए व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स बनाए जाएंगे। इन परियोजनाओं का उद्देश्य व्यापारिक गतिविधियों को संगठित करना और स्थानीय व्यवसायियों को आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराना है.
पार्किंग व्यवस्था पर जोर
वाराणसी में लगातार बढ़ रही पर्यटकों और श्रद्धालुओं की संख्या को देखते हुए नगर निगम पार्किंग सुविधाओं के विस्तार पर भी विशेष ध्यान दे रहा है. मेयर ने बताया कि परेड कोठी में नए पार्किंग स्थल का निर्माण किया जाएगा. इसके अलावा मैदागिन और लहुराबीर क्षेत्रों में मल्टीस्टोरी पार्किंग बनाई जाएगी.
सिगरा में अंडरग्राउंड पार्किंग और होटल परियोजना भी प्रस्तावित है. वहीं, अस्सी घाट पर बढ़ती भीड़ को देखते हुए वहां मैकेनाइज्ड मल्टी-लेवल पार्किंग का निर्माण कराया जाएगा. अस्सी घाट पर सुबह-ए-बनारस कार्यक्रम और विभिन्न आरतियों के कारण पूरे वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक पहुंचते हैं.
स्वच्छता रैंकिंग में वाराणसी की बड़ी छलांग
मेयर अशोक कुमार तिवारी ने पिछले तीन वर्षों की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए बताया कि स्वच्छता सर्वेक्षण 2023 में वाराणसी देश में 41वें स्थान पर था, जबकि 2025 में शहर 17वें स्थान तक पहुंच गया है. उन्होंने कहा कि नगर निगम का लक्ष्य आगामी स्वच्छता सर्वेक्षण में देश के शीर्ष पांच शहरों में शामिल होना है. इसके लिए सफाई व्यवस्था को और मजबूत किया जा रहा है. नगर निगम ने सफाईकर्मियों की संख्या 4,075 से बढ़ाकर 7,428 कर दी है। प्रमुख मंदिरों और प्रमुख मार्गों पर तीन शिफ्टों में सफाई कार्य कराया जा रहा है.
करसड़ा डंपिंग ग्राउंड से हटेगा कूड़े का पहाड़
नगर निगम की सबसे महत्वाकांक्षी योजनाओं में करसड़ा डंपिंग ग्राउंड का वैज्ञानिक निस्तारण भी शामिल है. मेयर के अनुसार, पिछले लगभग 10 वर्षों में यहां 12.64 लाख मीट्रिक टन कूड़ा जमा हो चुका है, जो आसपास के पर्यावरण और स्थानीय निवासियों के लिए बड़ी समस्या बन गया था. इस समस्या के समाधान के लिए नगर निगम ने 53.15 करोड़ रुपए की परियोजना तैयार की है. इसके तहत बायोमाइनिंग तकनीक के जरिए कूड़े का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण किया जाएगा.
मियावाकी तकनीक से विकसित होगा हरित वन क्षेत्र
कूड़े के निस्तारण के बाद खाली होने वाली लगभग 25 एकड़ भूमि पर जापानी मियावाकी तकनीक के जरिए घना जंगल विकसित किया जाएगा. नगर निगम का मानना है कि इससे शहर का कार्बन फुटप्रिंट कम होगा और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा. नगर निगम के इस रोडमैप को वाराणसी को एक स्वच्छ, व्यवस्थित, पर्यटन-अनुकूल और आधुनिक शहर के रूप में विकसित करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है. आने वाले वर्षों में इन परियोजनाओं के धरातल पर उतरने से काशी की तस्वीर और पहचान दोनों बदलने की उम्मीद जताई जा रही है.





