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‘2020 में जुल्म और 2026 में ओके’, डोनाल्ड ट्रंप के गाजा पीस बोर्ड पर पलटे शहबाज शरीफ, पाकिस्तान में उड़ रही खिल्ली

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को घरेलू स्तर पर कड़ी आलोचना का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के गाजा से जुड़े नए प्लान का समर्थन किया है. 22 जनवरी 2026 को स्विट्जरलैंड के दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) के दौरान ट्रंप ने ‘बोर्ड ऑफ पीस’ का चार्टर लॉन्च किया. शहबाज शरीफ ने इस चार्टर पर हस्ताक्षर किए और बोर्ड में शामिल होने की घोषणा की.

पाकिस्तान बोर्ड में शामिल, भारत ने किया इनकार

यह बोर्ड गाजा में युद्ध रोकने, सीजफायर लागू करने, मानवीय सहायता बढ़ाने और गाजा के पुनर्निर्माण के लिए बनाया गया है. ट्रंप ने इसे 2025 में प्रस्तावित किया था, जो अब गाजा से आगे बढ़कर वैश्विक संघर्षों को सुलझाने के लिए इस्तेमाल होगा. ट्रंप ने कहा कि गाजा का युद्ध ‘अब वाकई खत्म हो रहा है’ और हमास को हथियार डालने होंगे. बोर्ड में पाकिस्तान के अलावा UAE, हंगरी, कोसोवो और पराग्वे जैसे देश शामिल हैं. भारत ने इसमें शामिल होने से इनकार कर दिया है.

5 साल पहले शहबाज ने किया था ट्रंप का विरोध

समस्या यह है कि 2020 में शहबाज शरीफ (तब विपक्ष के नेता) ने ट्रंप के ‘पीस टू प्रॉस्पेरिटी’ प्लान का कड़ा विरोध किया था. उन्होंने इसे ‘अन्यायपूर्ण, पक्षपाती और दमनकारी’ बताया था. 29 जनवरी 2020 को उन्होंने X पर लिखा था, ‘ट्रंप का मिडिल ईस्ट पीस प्लान इजरायल को यरुशलम की कब्जे और फिलिस्तीन की जमीन पर अवैध बस्तियां बनाने की वैधता देता है. यह एक अन्यायपूर्ण, पक्षपाती और दमनकारी ‘पीस प्लान’ है जिसे फिलिस्तीनियों ने सही तरीके से फाड़ दिया.’

अब अपने बयान से पलटे शरीफ, पाकिस्तान में विरोध

अब 2026 में शरीफ ने ट्रंप के नए प्लान का स्वागत किया. उन्होंने कहा, ‘मैं राष्ट्रपति ट्रंप के 20-पॉइंट प्लान का स्वागत करता हूं जो गाजा में युद्ध खत्म करने और फिलिस्तीनियों को ज्यादा मानवीय सहायता देगा. मुझे यकीन है कि फिलिस्तीनी लोगों और इजरायल के बीच स्थायी शांति क्षेत्र में राजनीतिक स्थिरता और आर्थिक विकास लाएगी.’

इस बदलाव को यूटर्न कहकर पाकिस्तान में भारी विरोध हो रहा है. मुख्य विपक्षी पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) ने कहा, ‘PTI पाकिस्तान सरकार के बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होने के फैसले को नकारती है.’ PTI ने मांग की है कि फैसला पारदर्शी हो, सभी पक्षों से सलाह ली जाए और यह UN सिस्टम को मजबूत करे, न कि नया समानांतर ढांचा बनाए. PTI ने कहा कि कोई भी प्लान फिलिस्तीनी हितों के खिलाफ नहीं होना चाहिए.

पाकिस्तानी शहबाज के बयान पर क्या प्रतिक्रिया दे रहे?

पाकिस्तानी पत्रकार जाहिद हुसैन ने इसे ‘पाकिस्तान के लिए सबसे विनाशकारी कदम’ बताया और पूछा कि क्या पाकिस्तान ट्रंप की अच्छी किताबों में रहना चाहता है? उन्होंने इसे ‘नैतिक रूप से गलत और बचाव योग्य नहीं’ कहा है. वहीं, लेखिका फातिमा भुट्टो ने लिखा, ‘तो पाकिस्तान इजरायल के साथ पीस बोर्ड में बैठेगा. वही लोग जो फिलिस्तीनी होलोकॉस्ट के जिम्मेदार हैं? क्या शर्म की बात है.’

कार्यकर्ता अम्मार अली जान ने इसे ‘शर्मनाक विश्वासघात’ बताया और कहा कि यह मीडिया या संसद में चर्चा किए बिना लिया गया फैसला है, जो फिलिस्तीन की कब्जे को जारी रखने का नियोकोलोनियल इंतजाम है.



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