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स्कूल-हॉस्पिटल जाने के लिए भी रास्ता नहीं… झांसी में गांववालों ने रोकी ट्रेन, 1 घंटे तक किया हंगामा

स्कूल-हॉस्पिटल जाने के लिए भी रास्ता नहीं... झांसी में गांववालों ने रोकी ट्रेन, 1 घंटे तक किया हंगामा

गांव में फंसे लोग, नहीं बचा आने-जाने का रास्ता

झांसी के मऊरानीपुर तहसील क्षेत्र के रोरा भटपुरा मार्ग पर अंडर ब्रिज निर्माण को लेकर शनिवार को उस वक्त हंगामा खड़ा हो गया जब गुस्साए ग्रामीण रेलवे पटरी पर उतर आए. मामला तब भड़क उठा जब निर्माण कार्य के चलते रेलवे फाटक को पूरी तरह बंद कर दिया गया. जिससे ग्रामीणों का बाहर निकलना तक दूभर हो गया. इस अचानक बंदी ने पूरे गांव की जीवनरेखा जैसी सड़क को ठप कर दिया और देखते ही देखते सैकड़ों लोग मानिकपुर रेलवे लाइन पर उतर आए.

गुस्साए ग्रामीणों ने झांसी-मानिकपुर रेलवे ट्रैक पर धरना दे दिया. प्रदर्शनकारियों ने झांसी-मानिकपुर पैसेंजर ट्रेन को रोरा स्टेशन पर करीब एक घंटे तक रोक दिया, जिससे यात्रियों में हड़कंप मच गया. रेलवे और प्रशासनिक अधिकारी तुरंत मौके पर पहुंचे लेकिन तब तक हालात काफी बिगड़ चुके थे. ग्रामीणों ने जमकर नारेबाजी की, ‘हम रास्ता नहीं छोड़ेंगे’ और ‘अंडर ब्रिज बना लो, पर हमें कैद मत करो’. स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन ने बिना कोई वैकल्पिक रास्ता बनाए फाटक बंद कर दिया. जिससे गांव पूरी तरह घेराबंदी में बदल गया है.

स्कूल, इलाज और रोजमर्रा के रास्ते ठप

गांव के लोगों ने बताया कि तीन दिनों से कोई वाहन गांव में नहीं आ-जा पा रहा है. बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे, किसान अपने खेतों तक नहीं पहुंच पा रहे, और बीमार या बुजुर्ग लोगों को इलाज के लिए भारी परेशानी उठानी पड़ रही है. सबसे दिल दहला देने वाली बात यह सामने आई कि प्रसव पीड़ा से तड़प रही एक महिला को नाव से नदी पार कराना पड़ा, और रास्ते में ही उसने नांव में बच्चे को जन्म दे दिया. यह दृश्य जिसने देखा उसकी आंखें नम हो गईं. इस घटना के बाद ग्रामीणों का गुस्सा और भड़क गया.

एक ग्रामीण ने आक्रोशित लहजे में कहा कि ‘हम जानवर नहीं हैं, जो हमें बंद कर दो! फाटक बंद कर दिया, सड़क काट दी, अब कैसे जाएं अस्पताल या स्कूल.’

प्रशासन और रेलवे पर उठे सवाल

सूचना मिलते ही मौके पर पहुंचे तहसीलदार ललित पांडे और पुलिस बल ने स्थिति को संभाला. अधिकारीयों ने ग्रामीणों को समझा-बुझाकर ट्रैक खाली कराया, तब जाकर ट्रेन को आगे बढ़ाया गया. तहसीलदार ने ग्रामीणों को आश्वासन दिया कि जल्द ही एक वैकल्पिक मार्ग तैयार कराया जाएगा, ताकि लोगों को असुविधा न हो. लेकिन ग्रामीण इस आश्वासन से पूरी तरह संतुष्ट नहीं दिखे. उनका कहना है कि अधिकारी सिर्फ बोलते हैं, कोई ठोस काम नहीं होता.

निर्माण एजेंसी पर लापरवाही का आरोप

ग्रामीणों ने निर्माण कर रही एजेंसी और रेलवे विभाग पर भी लापरवाही के गंभीर आरोप लगाए. उनका कहना है कि बिना नोटिस दिए, बिना किसी पूर्व तैयारी के रास्ता बंद कर दिया गया. ‘अगर यह निर्माण जरूरी था, तो पहले वैकल्पिक रास्ता क्यों नहीं बनाया गया?’ यह सवाल अब प्रशासन की गर्दन पर तना हुआ है. ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि अगर 48 घंटे में वैकल्पिक रास्ता नहीं खुला, तो वे एक बार फिर पटरी पर उतरकर रेल रोक आंदोलन शुरू करेंगे.

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