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सहारनपुर में करोड़ों की आलीशान कोठियां बनीं कबाड़खाना, अब नशेड़ियों का हैं अड्डा, कारोबारी बोले- सब नगर निगम की लापरवाही है

सहारनपुर में करोड़ों की आलीशान कोठियां बनीं कबाड़खाना, अब नशेड़ियों का हैं अड्डा, कारोबारी बोले- सब नगर निगम की लापरवाही है

नगर निगम कर्मचारियों का था आवास.

स्मार्ट सिटी कहलाने वाले सहारनपुर का नगर निगम अपनी करोड़ों रुपये की संपत्ति की अनदेखी कर रहा है. खाता खेड़ी इलाके में नगर निगम की करीब 50 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति आज कबाड़खाना बन चुकी है. कभी जहां अधिकारियों के रहने के लिए आलीशान कोठियां बनाई गई थीं, अब वहां जंगली घास, टूटती दीवारें और कबाड़ का ढेर दिखाई देता है.

जानकारी के अनुसार, वार्ड 56 स्थित खाता खेड़ी में नगर निगम ने करीब चार बीघा भूमि पर अधिकारियों के आवासीय उपयोग के लिए कोठियों का निर्माण कराया था.

लेकिन अधिकारियों ने यहां रहना उचित नहीं समझा, जिसके बाद इन्हें नगर निगम कर्मचारियों को आवंटित कर दिया गया. समय के साथ कई कर्मचारी सेवानिवृत्त हो गए, फिर भी कोठियां खाली नहीं कराई गईं.

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स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्षों तक इन कोठियों में लकड़ी की नक्काशी के बड़े कारखाने चलाए गए. जब अवैध कब्जों की शिकायतें बढ़ीं, तो नगर निगम ने कार्रवाई कर परिसर को खाली तो करा लिया, लेकिन अब यह भूमि अनुपयोगी पड़ी है.

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क्या बोले कारोबारी?

खाता खेड़ी क्षेत्र के कारोबारियों का कहना है कि उन्होंने कई बार नगर निगम से यहां लकड़ी नक्काशी के शोरूम या हस्तशिल्प केंद्र बनाने की मांग की, ताकि शहर की पहचान वुडन सिटी को बढ़ावा मिल सके.

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लेकिन निगम की उदासीनता के कारण आज यह जगह नशेड़ियों और असामाजिक तत्वों का अड्डा बन गई है.

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इस मामले पर नगर निगम के महापौर डॉ. अजय सिंह ने कहा कि नगर निगम की हर जमीन का उपयोग तय होता है. खाता खेड़ी की भूमि उनके संज्ञान में आई है और इसकी स्थिति की जांच कराई जा रही है.उन्होंने कहा कि प्रारंभिक जानकारी के अनुसार यह भूमि किसी विभाग को निर्माण कार्य के लिए दी गई थी, लेकिन निर्माण नहीं हो सका.

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क्या बोले महापौर?

महापौर ने स्पष्ट किया कि अगर ऐसा नहीं है, तो नगर निगम खुद इस संपत्ति का उपयोग सुनिश्चित करेगा. उन्होंने कहा- हम नहीं चाहते कि निगम की कोई भी जमीन बेकार या कब्जे में पड़ी रहे. सभी खाली जमीनों की पहचान कर उन्हें उपयोगी बनाया जाएगा.

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