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राम गोपाल वर्मा की ‘कंपनी’ के लिए झुग्गियों में रहे थे विवेक ओबेरॉय, खुद किया खुलासा


बॉलीवुड एक्टर विवेक ओबेरॉय इस समय अपने करियर के बेस्ट फेज में हैं. वो बिजनेस के साथ फिल्मों में भी काम कर रहे हैं. उनकी फिल्म मस्ती 4 कल सिनेमाघरों में रिलीज होने जा रही है और वो अपनी फिल्म की रिलीज के लिए बहुत ज्यादा एक्साइटेड हैं. ये मस्ती फ्रेंचाइजी की चौथी फिल्म है. जिसका फैंस भी बेसब्री से इंतजार कर रहे थे. विवेक ने फिल्म के प्रमोशन के दौरान एक इंटरव्यू में अपनी फिल्म कंपनी के बारे में बात की. उन्होंने बताया कि कैसे राम गोपाल वर्मा को मनाने के लिए वो झुग्गियों में रहे थे.

पिंकविला को दिए इंटरव्यू में विवेक ओबेरॉय ने अपनी पर्सनल लाइफ और स्ट्रगल के बारे में बात की.जब विवेक से पूछा गया कि उन्हें राम गोपाल वर्मा के साथ पहली फिल्म कैसे मिली तो एक्टर ने बताया कि वो 2 सालों से स्ट्रगल कर रहे थे. हर रोज वो लोगों से मिलते थे और ऑडिशन देते थे.

2 साल तक दिए ऑडिशन
विवेक ने बताया मैं दो सालों से रोज ऑडिशन दे रहा था और रिजेक्ट हो रहा था लेकिन कोशिश कर रहा था.जब राम गोपाल वर्मा से पहली बार मिले थे तो कंपनी में गैंगस्टर के रोल के लिए रिजेक्ट हो गए थे. विवेक ने कहा- ‘रामू जी ने मिलकर मुझे बोला तुम बहुत पढ़े लिखे पॉलिश्ड चॉकलेट बॉय टाइप लग रहे हो और मुझे किसी ऐसे की जरुरत है तो हार्डकोर हो क्योंकि ये गैंगस्टर फिल्म है.’ 

झुग्गियों में रहे विवेक
विवेक ने बताया कि वो सोच रहे थे कि ये एक कॉरपोरेट फिल्म है क्योंकि इसका नाम कंपनी है. विवेक ने कहा- ‘पिक्चर का नाम कंपनी है तो ये पता था. अब कंपनी सुनकर लोगों को यही लगता है सूट-टाई पॉलिश्ड, यही लगता है ना. हमे क्या पता था कौन-सी कंपनी बन रही है. वो जब समझा मैं तो मैंने कहा मुझे एक मौका दे दो.मैं गया और झुग्गियों में रहा. 6 हफ्ते- 7 हफ्ते मैं एक स्लम में जाकर रहा. स्लम में भाड़े पर खोली ली. खोली में जाकर रहा. रात को बड़े-बड़े चूहे आते थे. ड्रम के अंदर से पानी निकालना पड़ता था. बाथरूम था नहीं, आपको सुलभ शौचालय इस्तेमाल करना पड़ता था. लाइन में खडे़ रहना पड़ता था. मैंने महसूस किया कि चंदू नागरे की लाइफ कैसी होगी. बीड़ी कैसे फूंकता है, चाय कैसे पीता है, बातें कैसे करता है.’

विवेक ने आगे कहा- ‘फिर जब मैं रामूजी के पास गया, मैं वो कैरेक्टर ही बनके गया. क्योंकि मुझे पता नहीं था कि वो मुझे ऑडिशन करने देंगे या नहीं. तो मैं कैरेक्टर की तरह ही तैयार होकर गया. मैं उनके कमरे में ढेर सारी तस्वीरों के साथ गया. उन्होंने मन बनाकर रखा था कि इसको आज मना करना है. मैं बीड़ी फूंकते हुए एंटर किया जैसे कोई गैंगस्टप एंटर करता है और कुर्सी पर बैठकर टेबिल के ऊपर पैर रखा. चप्पल दोनों टेबिल के ऊपर. आखिर में उन्होंने कहा- जबरदस्त ऑडिशन. मैंने कभी ऐसा ऑडिशन नहीं देखा था. आखिरकार उन्होंने बोला, तुम मेरी फिल्म कर रहे हो.’

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