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रानी बेतिया की कोठी का सर्वे पूरा, बिहार से आई टीम ने खंगाला; अब खुलेंगे कई राज

हिंदी फिल्मों के महानायक अमिताभ बच्चन का प्रयागराज से पुराना रिश्ता है. उनका बचपन और शुरुआती तालीम प्रयागराज में हुई. प्रयागराज से जुड़ी बचपन की एक ख्वाहिश की परते अब खुलने लगी है. अमिताभ के बाल मन की परी रानी बेतिया की उस कोठी का सर्वे किया जा रहा है जिसे अंग्रेजों ने रानी बेतिया से डॉक्ट्रिन ऑफ लेप्स की आड़ लेकर हड़प लिया. रानी बेतिया के गृह राज्य बिहार से आई राजस्व विभाग की टीम ने इस कोठी के चप्पे चप्पे का सर्वे किया.

हिंदी फिल्मों के शहंशाह अमिताभ बच्चन के पास गाड़ी है, बंगला है, दौलत है ,शौहरत है लेकिन उनकी एक ऐसी ख्वाहिश जो आज भी उनके सपनों में दबे पांव से उस वक्त दस्तक देती है, जब अमिताभ अपने बचपन को याद करते हैं. अमिताभ बच्चन की यह अधूरी ख्वाहिश है ” रानी – बेतिया ” जिसको एक झलक देखने की ललक आज भी उनके ख्वाबों में मौजूद है. वह “रानी -बेतिया ” जो आज भी अमिताभ के लिए एक राज हैं. एक कौतुहल हैं, जिसे उन्होंने मुंबई जाने से पहले अपने गृह नगर प्रयागराज छोड़ आये.

ग्यारह अक्टूबर 1942 को प्रयागराज के बरार नर्सिंग होम में जन्मे हरिवंश राय बच्चन के जिस बेटे, जिसे दुनिया अमिताभ के नाम से जानती है. उसे उनके पिता ने नाम दिया था ” इन्कलाब ” लेकिन हरिवंशराय बच्चन के नजदीकी कवि सुमित्रानंदन पन्त ने उसे इन्कलाब से अमिताभ कर दिया. जिसका मतलब होता है वह प्रकाश जिसका कभी अंत नहीं होता.

अभिताभ बच्चन की अधूरी ख्वाहिश

अमिताभ के प्रकाश से भले ही उन्हें आज उनकी हर एक ख्वाहिश पूरी हो गई हो लेकिन बिग बी की एक ख्वाहिश ऐसी है जो आज तक पूरी नहीं हो पाई. जिसका ताल्लुक प्रयागराज की उस आलीशान कोठी से है जिसे ” बेतिया -रानी ” की कोठी कहा जाता है. प्रयागराज के साहित्यकार यश मालवीय बताते हैं कि हरिवंश राय बच्चन ने अपनी आत्मकथा ‘अधूरे ख़्वाब’ में इस कोठी का बेहद रूमानी अंदाज में जिक्र किया है. यह वह दौर था जब अमिताभ प्रयागराज के इसी 7 क्लाइव रोड स्थित बंगले में अपने परिजनों के साथ किराये में रहते थे.

क्लाइव रोड से अपने स्कूल बॉयज हाईस्कूल पढ़ने जाते समय अमिताभ इसी रानी बेतिया की कोठी के पास रुककर उसकी चहारदीवारी से नन्हे-नन्हे पैरों में खड़े होकर उछलकर देखते थे कि आखिर कौन है -रानी बेतिया? कैसी हैं रानी बेतिया और इसी कौतुहल को लिए वह स्कूल आगे बढ़ जाते थे. यह प्रसंग खुद हरिवंश राय बच्चन ने अपनी आत्म कथा ” बसेरे से दूर” में लिखा है.

अमिताभ बच्चन के लिए क्यों रहस्य है ये कोठी?

बाल मनोविज्ञान के जानकार डॉ जनक पाण्डेय के मुताबिक, अमिताभ के पिता का साहित्यिक परिवेश और घर में होने वाला बाल विमर्श भी इस तरह के किरदार और कौतुहल को जन्म देता है. परियों की दुनिया भी इसी का हिस्सा होती है. अमिताभ 1956 में प्रयागराज छोड़कर शेरवुड और फिर वहां से मुंबई चले गए लेकिन ” रानी बेतिया ” कौन थी, रानी बेतिया की कोठी का क्या तिलस्म है. अमिताभ के लिए आज भी यह रहस्य है. बालमन के अपने कल्पना लोक से निकलकर अमिताभ आज भी अपने सपनों में इस कोठी के बारे में सोंचते हैं. इस बात का जिक्र उन्होंने कई बार अपने इंटरव्यू में किया है.

इस कोठी के पुराने समय से रखवाली करते आये माधव बताते है कि शहर के बीचों बीच 22 बीघे में बनी इस कोठी को 1951 में रानी बेतिया के मरने के बाद कोर्ट्स ऑफ़ वार्ड ने अपने कब्जे में ले लिया. जिला प्रशासन आज भी इस कोठी का किराया 267 रुपये मासिक लेती है, लेकिन अब बिहार राजस्व परिषद के अधिकारियों की एक टीम प्रयागराज पहुंच चुकी है.

कोठी का राजस्व टीम ने किया सर्वे

बिहार राजस्व विभाग की इस टीम के प्रभारी संजीव कुमार अपने चार सदस्यों को लेकर रानी बेतिया की कोठी में गए. रानी बेतिया जिनका नाम जानकी कुंवर था. इसी महलनुमा कोठी में रहती थीं. सुनील कुमार बताते हैं कि यूपी और बिहार के बीच बेहतर प्रशासनिक संबंधों के चलते रानी बेतिया की प्रयागराज की 4.54 हेक्टेयर की संपत्ति का सर्वे पूरा हो चुका है. अब इसके दस्तावेज सरकार को सौंपे जाएंगे. इसके बाद उनके अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू होगी.



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