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राजभर के बेटे ने शुरू किया डैमेज कंट्रोल, पूर्व डिप्टी CM के साथ ABVP छात्रों से मिलने पहुंचे अरविंद

राजभर के बेटे ने शुरू किया डैमेज कंट्रोल, पूर्व डिप्टी CM के साथ ABVP छात्रों से मिलने पहुंचे अरविंद

ओपी राजभर. (फाइल फोटो)

यूपी के बाराबंकी में आंदोलन कर रहे एबीवीपी (ABVP) कार्यकर्ताओं पर लाठी चार्ज मामले में सियासत गर्म हो चली है और डैमेज कंट्रोल एक्शन चालू है. सरकार में ही कई मंत्री खुद एबीवीपी में रहते हुए छात्र राजनीति के रास्ते मेनस्ट्रीम पॉलिटिक्स में आए, लेकिन पूरे मामले में वही मंत्री छात्रों से मिलने नहीं पहुंचे और न ही उनकी ओर से कोई प्रतिक्रिया ही सामने आई. हालांकि अब सवाल पर जवाब देते हुए जरूर देखे जा रहे हैं.

दरअसल विवाद और प्रदर्शनों का सिलसिला थमा नहीं था कि योगी सरकार में मंत्री ओपी राजभर ने ABVP के छात्रों के लिये गुंडे शब्द का प्रयोग कर दिया, जिसके बाद छात्र और भड़क उठे. आनन-फानन में उनके बेटों ने मोर्चा संभाला और सफाई देनी शुरू की.

सरकारी एक्शन से संतुष्ट नहीं एबीवीपी

ओपी राजभर की डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्या से मुलाकात की तस्वीर भी सामने आई लेकिन खुद राजभर ने इस पर आगे कुछ नहीं कहा. फिलहाल स्थिति ये है कि ABVP अब तक के सरकारी एक्शन से संतुष्ट नहीं है. तमाम नेता मंत्री घायल छात्रों से मिलने केजीएमयू अस्पताल पहुंच रहे हैं लेकिन इस पर अब एबीवीपी की ओर से एक बयान सामने आया है, जिसमें वो कह रहे हैं कि बजाय देखने आने के और सोशल मीडिया पोस्ट से अपनी संवेदनशीलता दिखाने की बजाय सरकार में बैठ कर उनके अधिकारियों पर दबाव बनाएं कि वो इस पूरे प्रकरण पर त्वरित कार्रवाई करें.

किनके इशारे पर हुई इस तरह की बर्बरता?

एबीवीपी के राष्ट्रीय कार्यकारिणी की सदस्य श्रृष्टि सिंह ने कहा कि जो लोग इसी संगठन से निकलकर सरकार में मंत्री भी बने हैं, उनमें से कुछ मिलने आए और जो नहीं भी आए हैं उनसे यही कहेंगे कि अपनी संवेदनशीलता अस्पताल में मिलने आने और उसकी तस्वीर सोशल मीडिया पर पोस्ट करके ना दिखाएं, बल्कि सरकार में हमारी आवाज़ उठाएं, अधिकारियों पर त्वरित कार्रवाई का दबाव बनाएं. किनके इशारे पर इस तरह की बर्बरता हुई?

अब विपक्ष भी इस प्रकरण पर सरकार को घेर रही है. सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने तो एबीवीपी का नया फुल फॉर्म अखिल भारतीय वीडियो ऑफ़ पिटाई बताते हुए कहा कि उन्हें बहुत दुख हो रहा है. अखिलेश ने इसे परिषद और वाहिनी की लड़ाई करार देते हुए सरकार पर तंज किया है.

सवाल तो ये भी उठ रहे हैं कि सरकार में कई मंत्री हैं जो खुद ABVP के सदस्य रहे, छात्र राजनीति से मेनस्ट्रीम पॉलिटिक्स में आए लेकिन पूरे प्रकरण पर उनकी चुप्पी सवालों के घेरे में है. हालांकि सवाल पूछे जाने पर अब अपनी बात जरूर रख रहे हैं. वहीं एबीवीपी ने चार मांगें रखी हैं और सरकार को 48 घंटे का समय दिया है, जिसकी मियाद कर खत्म हो रही है. मांगें पूरी न होने पर पूरे प्रदेश में बड़े आंदोलन की चेतावनी दी है.

एबीवीपी की मुख्य मांगें:

  • लाठीचार्ज घटना में संलिप्त पुलिसकर्मियों और बाहरी गुंडों पर मुकदमा दर्ज कर कठोरतम कार्रवाई.
  • विधि पाठ्यक्रम के अवैध संचालन की उच्च स्तरीय जांच कर जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारियों को दंडित किया जाए तथा विश्वविद्यालय को बंद किया जाए.
  • उच्च शिक्षा परिषद के सचिव द्वारा दर्ज प्राथमिकी के आधार पर विश्वविद्यालय पर कठोर कार्रवाई की जाए.
  • लगभग 6 बीघे सरकारी भूमि पर विश्वविद्यालय के अवैध कब्जे और तहसीलदार कोर्ट द्वारा लगाए गए ₹27.96 लाख जुर्माने व कब्जा हटाने के आदेश को तत्काल लागू किया जाए और विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा अवैध निर्माण पर बुलडोजर चलवाया जाए.
  • छात्र विश्वविद्यालय संचालकों को शिक्षा माफ़िया बताते हुए अवैध निर्माण पर बुलडोज़र कार्रवाई की मांग भी कर रहे हैं.

डिफेंसिव मोड पर सरकार

श्रृष्टि सिंह ने कहा कि आक्रोश बढ़ता देख सरकार पूरी तरह डिफेंसिव मोड पर आ गई है और आज भी सरकार में उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय घायल छात्रों से मिलने केजीएमयू पहुंचे. इसके बाद पूर्व उपमुख्यमंत्री और राज्यसभा सांसद दिनेश शर्मा ओपी राजभर के बेटे अरविंद राजभर के साथ केजीएमयू पहुंचे. कांग्रेस नेता सुरेंद्र राजपूत ने भी ओपी राजभर के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि अपने ही बयान से घिरे राजभर बहुत जल्दी पलटी मार गए.

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