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यहां उल्लुओं पर भारी पड़ती है दिवाली की रात, जानिए आखिर क्या है वजह

उत्तर प्रदेश के बिजनौर में दिवाली के त्योहार को देखते हुए वनों में बाहरी व्यक्तिओं की आवाजाही पर रोक लगा दी गई है. बिजनौर के अमानगढ टाइगर पार्क, सबलगढ, राजगढ रेंज, कौडिया रेंज, नगीना रेंज, बढापुर रेंज, साहनपुर, साहुवाला वन क्षेत्रों के साथ हस्तिनापुर वाइल्ड लाइफ सैंचुरी और चांदपुर वन रेंज में वन विभाग की गश्ती टीमों को अलर्ट कर दिया गया है.

दरअसल दीपावली आने से पहले घुमंतु वन्य जीव तस्कर इन फोरेस्ट इलाकों से वन्य जीवों सेही और उल्लुओं को पकड़ कर तस्करी करने के लिए विख्यात हैं. आंखों से सुरमा चुराने वाले वन्य जीव तस्कर दिवाली से चार-पांच दिन पहले से वनों की रेकी कर उल्लुओं की खोखर तलाश कर लेते है. अधिकांश उल्लु सूखे पेड़ों की खोखरों में रहते हैं जहां से ये उल्लुओं को दिन में आसानी से पकड लेते हैं. क्योकि उल्लु निशाचर पक्षी होता है, इसे दिन में दिखाई नहीं देता.

मुंह मांगी कीमतों पर होती है डील

अघोरी और तांत्रिक दीपावली की रात तंत्रमंत्र अनुष्ठान और तांत्रिक कर्मकांड में उल्लुओं की बलि देकर उसकी आंख, नाखून और पंजों को अभिमंत्रित करके सिद्ध करने का काम करते हैं. तान्त्रिक इन तस्करों से आठ से दस हजार रूपए तक में उल्लु खरीद लेते हैं. जिसे अनुष्ठान कराने वाले यजमान को मुंह मांगे दामों में बेचते हैं.

वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, देश में उल्लुओं की संख्या में लगातार कमी हो रही है. इसीलिए इस को लुप्तप्राय श्रेणी में शामिल किया गया है. उल्लू धन की देवी मां लक्ष्मी का वाहन माना जाता है, और कहा जाता है कि उल्लु भूत-प्रेत, पिशाच को भी देख लेता है. इसी अंधविश्वास की वजह से इसे तांत्रिक अनुष्ठानों में बलि के लिए उल्लुओं को बेमौत मार दिया जाता है. इसके आंख और नाखूनों के ताबीज बना कर गले में पहना जाता है.

क्या बोले डीएफओ?

डीएफओ ज्ञान सिंह के मुताबिक, बिजनौर के वन क्षेत्रों में स्पाटेड आऊल, बार्न आऊल, ब्राउन हाक आऊल, बैरेड आऊल प्रजाति के उल्लु दिखाई देते है. कभी कभार व्हाईट आऊल भी दिखते है. इसके अलावा पुरानी बड़ी हवेलियों, सरकारी इमारतों और खंडहर भवनों में भी उल्लु रहते हैं. उल्लु निशाचर होते हैं मतलब दिन में उल्लुओं को दिखाई नहीं देता है. इसीलिए रात को यह शिकार करते हैं. उल्लु एक मांसाहारी पक्षी होता है, इसके दांत नहीं होते हैं. यह अपने शिकार को निगल लेता है. चूहे, चिड़ियों, मेढ़क और छोटे कीड़े मकोड़े को निगल कर पेट भरता है.

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