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मुरादाबाद में घर के अंदर ही बना डाला फर्जी पेट्रोल पंप, तेल लेने पर मिलती थी रसीद भी… छापा पड़ा तो सन्न रह गए अधिकारी

मुरादाबाद में घर के अंदर ही बना डाला फर्जी पेट्रोल पंप, तेल लेने पर मिलती थी रसीद भी... छापा पड़ा तो सन्न रह गए अधिकारी

फर्जी पेट्रोल पंप.

उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जनपद में आपूर्ति विभाग कार्रवाई ने एक ऐसे फर्जीवाड़े का भंडाफोड़ किया है, जिसने सुरक्षा व्यवस्था और विभागीय सतर्कता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. मूंढापांडे थाना क्षेत्र के भैयानगला गांव में एक व्यक्ति अपने घर के अंदर ही बिना किसी लाइसेंस या एनओसी (NOC) के बाकायदा डिस्पेंसिंग मशीन (नोजल) लगाकर अवैध डीजल पंप संचालित कर रहा था.

यह पंप न केवल घनी आबादी के बीच स्थित था, बल्कि यहां से ग्राहकों को बकायदा कंप्यूटर जनित रसीदें भी दी जा रही थीं. जिला आपूर्ति अधिकारी को मिली गोपनीय सूचना के आधार पर जब टीम ने छापेमारी की, तो मौके का नजारा देखकर अधिकारी दंग रह गए. वहां पेट्रोल पंपों की तर्ज पर टैंक और मशीनें स्थापित थीं. विभाग ने तत्काल कार्रवाई करते हुए मशीन को सीज कर दिया और करीब 950 लीटर डीजल बरामद किया है.

इस मामले में मुख्य आरोपी तनवीर के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है. यह घटना सुरक्षा के लिहाज से बेहद खतरनाक थी, क्योंकि बिना लाइसेंस के रिहायशी इलाके में भारी मात्रा में ज्वलनशील पदार्थ का भंडारण किसी बड़े हादसे को दावत दे सकता था.

हाईटेक सेटअप और छापेमारी की कार्रवाई

आपूर्ति विभाग की जांच में सामने आया कि आरोपी तनवीर ने अपने घर को पूरी तरह से एक व्यावसायिक पेट्रोल पंप का रूप दे दिया था. क्षेत्रीय खाद्य अधिकारी आनंद प्रभु सिंह के अनुसार, मौके पर 950-950 लीटर क्षमता के दो टैंक स्थापित पाए गए थे. अवैध कारोबार को प्रामाणिक दिखाने के लिए आरोपी ने वहां एक आधुनिक डिस्पेंसिंग यूनिट (तेल भरने वाली मशीन) लगा रखी थी, जिससे पाइप और नोजल के जरिए केन और गाड़ियों में तेल भरा जाता था. छापेमारी से पहले विभाग ने एक डमी ग्राहक भेजकर तेल खरीदने की पुष्टि की, जिसके बाद टीम ने दबिश दी. संचालक मौके पर कोई भी वैध दस्तावेज, लाइसेंस या जिलाधिकारी द्वारा जारी अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) पेश नहीं कर सका. प्रशासन ने मौके से बिक्री की पर्चियां भी जब्त की हैं, जो इस अवैध धंधे के बड़े पैमाने पर चलने का प्रमाण हैं.

पुलिस की जांच और सुरक्षा पर उठते सवाल

एसपी सिटी कुमार रणविजय सिंह ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि थाना मूंढापांडे में आपूर्ति विभाग की तहरीर पर सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज किया जा रहा है. पूर्ति विभाग और पुलिस अब इस बात की तफ्तीश कर रही है कि आरोपी इतने बड़े पैमाने पर डीजल कहां से लाता था और यह अवैध सेटअप कितने समय से सक्रिय था. सबसे बड़ा सवाल सुरक्षा को लेकर है, क्योंकि घनी आबादी के बीच इस तरह का अवैध भंडारण एक ‘टाइम बम’ की तरह था. अधिकारियों को संदेह है कि अधिक मुनाफे के चक्कर में डीजल में मिलावट भी की जा रही थी, जिसके लिए सैंपल लेकर विधि विज्ञान प्रयोगशाला भेज दिए गए हैं.

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