मिर्जापुर का नाम होगा ‘विध्यांचल’? प्रशासन तैयार कर रहा प्रपोजल, मंत्री ‘नंदी’ के सामने उठी थी मांग

मिर्जापुर जिले का बदल सकता है नाम
उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले का नाम जल्द ही बदल सकता है. गुरुवार को हुई जिला प्रशासनिक समन्वय समिति की बैठक में जनपद का नाम ‘विंध्याचल धाम’ करने पर सहमति बन गई. इस बैठक में प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री और जिले के प्रभारी मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी भी मौजूद रहे. उन्होंने अधिकारियों को इस संबंध में औपचारिक प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजने के निर्देश दिए.
मिर्जापुर जिले की पहचान देशभर में प्रसिद्ध विंध्याचल धाम और यहां स्थित मां विंध्यवासिनी देवी मंदिर से जुड़ी है. यह मंदिर हिंदू आस्था का अत्यंत महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है जहां प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं. नवरात्र जैसे विशेष अवसरों पर तो यहां श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ता है. लंबे समय से स्थानीय लोग और कई जनप्रतिनिधि यह मांग उठाते रहे हैं कि जब देवी मंदिर की ख्याति पूरे देश में है तो जिले का नाम भी इसी धार्मिक पहचान से जुड़ा होना चाहिए.
इसी पृष्ठभूमि में अष्टभुजा डाक बंगले में आयोजित समिति बैठक में यह मुद्दा फिर उठा और जिला प्रशासन तथा जनप्रतिनिधियों ने नाम परिवर्तन पर अपनी सहमति व्यक्त की. कैबिनेट मंत्री नंदी ने स्पष्ट कहा कि विंध्याचल धाम की धार्मिक और सांस्कृतिक महत्ता को देखते हुए यह नाम जनपद का प्रतिनिधित्व बेहतर तरीके से करेगा.
मिर्जापुर सीरीज से खराब हुई जिले की छवि
पिछले कुछ सालों में मिर्जापुर वेब सीरीज़ रिलीज होने के बाद जिले की छवि को लेकर कई तरह की चर्चाएं हुई थीं. स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों का मानना है कि सीरीज़ में दिखाए गए काल्पनिक अपराध और हिंसा ने जिले की वास्तविक पहचान पर गलत प्रभाव डाला है. इसी वजह से जिले का नाम बदलने और उसकी धार्मिक पहचान को प्रमुखता देने की मांग जोर पकड़ती गई.
सदर विधायक पंडित रत्नाकर मिश्रा पहले ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से इस संबंध में पत्राचार कर चुके हैं. वहीं नगर पालिका अध्यक्ष श्याम सुंदर केसरी भी कई बार सार्वजनिक मंचों पर यह मांग उठा चुके हैं. उनका कहना है कि यदि जिले का नाम विंध्याचल धाम कर दिया जाए तो धार्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा और जिले की छवि और भी सुदृढ़ होगी.
और मजबूत होगी जिले की पहचान
स्थानीय लोगों का मानना है कि ‘विंध्याचल धाम’ नाम से जनपद की धार्मिक पहचान और मजबूत होगी और बाहर से आने वाले लोगों को यह बताने की जरूरत नहीं पड़ेगी कि प्रसिद्ध मां विंध्यवासिनी मंदिर किस जिले में स्थित है. अब जिला प्रशासन द्वारा प्रस्ताव भेजे जाने के बाद यह मामला राज्य सरकार के निर्णय का इंतजार करेगा.
रिपोर्ट – जय प्रकाश सिंह / मिर्जापुर

