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मां ने डांटा तो साइकिल पर बैठ लखनऊ से भागा 11 साल का बच्चा, 3 दिन बाद अहमदाबाद में मिला… कैसे पहुंचा, बना सस्पेंस

मां ने डांटा तो साइकिल पर बैठ लखनऊ से भागा 11 साल का बच्चा, 3 दिन बाद अहमदाबाद में मिला... कैसे पहुंचा, बना सस्पेंस

तीन दिन बाद मिला बच्चा.

छोटी-सी डांट भी कभी-कभी बच्चों के लिए बड़ा सदमा बन जाती है. लखनऊ के इंदिरानगर में ऐसा ही एक मामला सामने आया है, जहां 11 साल के एक बच्चे ने मां की फटकार से नाराज होकर घर छोड़ दिया. वह अपनी साइकिल लेकर निकला था, लेकिन तीन दिन बाद गुजरात के अहमदाबाद में पुलिस को मिला.

बच्चा पूरी तरह सकुशल है और अब उसे परिवार के पास लौटाया जा रहा है. बच्चे के पिता बृजेश कुमार सुमन पटेलनगर, इंदिरानगर में शिक्षक हैं. उनका बेटा रानी लक्ष्मीबाई स्कूल, सेक्टर-8 में कक्षा 6 में पढ़ता है. 10 दिसंबर को स्कूल से लौटने के बाद मां ने किसी मामूली बात पर उसे डांट दिया. इससे नाराज होकर बच्चा दोपहर करीब 3 बजे साइकिल लेकर घर से बाहर निकल गया.

परिवार को शुरू में यह अंदाजा नहीं था कि वह घर छोड़कर भाग जाएगा. जब देर शाम तक बच्चा घर नहीं लौटा, तो परिजनों ने आसपास तलाश शुरू की. रात में गाजीपुर थाने पहुंचकर गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई.

पिता बृजेश कुमार सुमन ने पुलिस को बच्चे की हालिया तस्वीर, कपड़ों का विवरण और अन्य जानकारी दी. लखनऊ पुलिस ने तुरंत कार्रवाई शुरू की. शहर और आसपास के थानों-जिलों में बच्चे का विवरण भेजा गया. साथ ही नेशनल पोर्टल ऑफ इंडिया पुलिस और ट्रैक चाइल्ड पोर्टल पर भी जानकारी अपलोड की गई.

1100 किलोमीटर दूर जाकर मिला

लखनऊ से करीब 1100 किलोमीटर दूर अहमदाबाद पहुंच चुके बच्चे को वहां की पुलिस ने बरामद कर लिया. अहमदाबाद पुलिस ने नेशनल पोर्टल पर बच्चे का विवरण मैच किया और 13 दिसंबर की सुबह करीब 9 बजे लखनऊ पुलिस से संपर्क किया. गाजीपुर थाने के इंस्पेक्टर राजेश मौर्य ने बताया कि बच्चा पूरी तरह सुरक्षित है.

कैसे पहुंचा लखनऊ से अहमदाबाद?

फिलहाल, लखनऊ पुलिस की एक टीम परिवार वालों को साथ लेकर अहमदाबाद रवाना हो गई है. जल्द ही बच्चा अपने घर लौट आएगा. पुलिस पूछताछ में यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि बच्चा लखनऊ से अहमदाबाद तक कैसे और किन साधनों से पहुंचा. यह घटना एक बार फिर बच्चों की भावनाओं की नाजुकता को उजागर करती है.

विशेषज्ञों का कहना है कि डांटने की बजाय प्यार और समझदारी से बात करनी चाहिए, ताकि बच्चे ऐसे कदम न उठाएं. परिवार वाले अब राहत की सांस ले रहे हैं और बच्चे की सुरक्षित वापसी का इंतजार कर रहे हैं.

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