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‘बिल्डर को तुरंत रिहा करो’… युवराज मेहता केस में इलाहाबाद HC का आदेश, नोएडा पुलिस से हुई ये बड़ी चूक

'बिल्डर को तुरंत रिहा करो'... युवराज मेहता केस में इलाहाबाद HC का आदेश, नोएडा पुलिस से हुई ये बड़ी चूक

बिल्डर अभय कुमार सिंह को रिहा किया गया.

नोएडा में सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत के मामले में बड़ी खबर सामने आई है. इस केस में जिस बिल्डर अभय कुमार सिंह को ग्रेटर नोएडा की नॉलेज पार्क थाना पुलिस ने सबसे पहले गिरफ्तार किया था, अब हाई कोर्ट से उसको रिहाई मिल गई है. कोर्ट ने बिल्डर अभय कुमार सिंह की ओर से दायर हैबियस कॉर्पस याचिका को मंजूर कर लिया और तुरंत रिहा करने का आदेश जारी किया. इस आदेश के बाद बीते गुरुवार देर रात अभय कुमार सिंह को जेल से रिहा कर दिया गया.

बता दें कि 16 जनवरी की देर रात ऑफिस का काम खत्म कर युवराज मेहता अपनी ग्रैंड विटारा कार से घर लौट रहे थे.
घर से महज 500 मीटर पहले ही मोड़ पर घने कोहरे की वजह से एक प्लॉट में भरे पानी में युवराज की कार डूब गई, जिसमें युवराज की मौत हो गई. युवराज मेहता के पिता राजकुमार मेहता की तहरीर नॉलेज पार्क थाने में मुकदमा दर्ज किया गया. बिल्डर की लापरवाही के कारण गैर इरादतन हत्या और BNS की अन्य धाराओं के तहत ये मुकदमा दर्ज हुआ.

लोअर कोर्ट से नहीं मिली थी जमानत

इसके बाद नोएडा पुलिस ने बिल्डर अभय कुमार सिंह को 20 जनवरी को गिरफ्तार कर लिया. निचली अदालत ने अभय कुमार सिंह की जमानत याचिका खारिज कर दी थी और न्यायिक हिरासत बढ़ाई दी थी, लेकिन अब कहानी में एक नया ट्विस्ट आया है. इलाहाबाद हाई कोर्ट ने माना कि बिल्डर की गिरफ्तारी के तरीके में सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का पालन नहीं किया गया. पुलिस की तरफ से चूक हुई है.

हाई कोर्ट ने हैबियस कॉर्पस याचिका मंजूर की

युवराज मेहता की मौत के मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने आरोपी बिल्डर अभय कुमार की हैबियस कॉर्पस याचिका मंजूर कर ली और उसे रिहा करने का आदेश दिया. इससे पहले मामले में दो आरोपी, लोटस ग्रीन्स कंस्ट्रक्शन के कर्मचारी रवि बंसल और सचिन करनवाल को जमानत मिल चुकी है. गुरुवार को नोएडा पुलिस की कार्रवाई पर कड़ी टिप्पणी करते हुए इलाहाबाद हाई कोर्ट ने बिल्डर की रिहाई के आदेश दिए.

बिल्डर की गिरफ्तारी में नोएडा पुलिस से हुई चूक!

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने गिरफ्तारी के दौरान सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित अनिवार्य दिशा-निर्देशों का पालन न किए जाने को गंभीर चूक मानते हुए हैबियस कॉर्पस याचिका स्वीकार कर ली और याचिकाकर्ता अभय कुमार सिंह को तत्काल रिहा करने का आदेश दिया, जिसके बाद बिल्डर को गुरुवार देर रात रिहा भी कर दिया गया.

बता दें कि हैबियस कॉर्पस याचिका ( Habeas Corpus) का मतलब है बंदी प्रत्यक्षीकरण यानी अवैध रूप से हिरासत में रखना. कोर्ट ऐसे मामलों में व्यक्ति को कोर्ट के सामने पेश करने या रिहा करने का आदेश देती है. इस मामले में भी यही हुआ है.

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