बिजनौर में किसान के पीछे भागे ‘गजराज’, खेत में खड़ी फसल हो गई बर्बाद; पत्थर मारना पड़ गया भारी

किसान के पीछे भागता हाथी.
उत्तर प्रदेश का बिजनौर जिला चारों तरफ से वनों से घिरा होने की वजह से बदहाल है. बिजनौर के गांवों में अक्सर वन्य जीव और मानव संघर्ष के मामले आए दिन देखने और सुनने के मिलते हैं. यहां खेतिहर किसान कभी तेंदुओं से जान बचाने की जुगत लगाते हैं तो कभी जंगली हाथियों से फसलो को बचाने की कोशिश में लगे रहते हैं.
अभी तक यहां के निवासी तेंदुओं का हमला तो सह ही रहे हैं. वहीं अब हाथियों से भी खतरा मंडराने लगा है. बड़ी तादात में जंगलों से निकल कर हाथी गंन्ने की फसल खाने और तहस-नहस करने आ जाते हैं. अगर फसल की देखभाल कर रहे किसान उन्हें भगाने की कोशिश करते हैं तो हाथी उल्टे किसानों की ही जान के दुश्मन बन जाते हैं.
गन्ने के खेतों को रौंद रहा था हाथी
बिजनौर के बढ़ापुर कस्बे के रामजीवाला गांव में वनों से निकल कर एक हाथी गन्ने के खेतों को रौंद रहा था, तभी खेत के पास काम कर रहे किसान उसे भगाने के लिए पत्थर फेंकने लगे. इसी बात से नाराज होकर हाथी ने एक किसान को दौड़ा लिया. पत्थर मार कर हाथी को भगाने की कोशिश किसान को भारी पड़ गई.
जान बचाने के लिए लगाई दौड़
उल्टे हाथी ने ही किसान के पीछे दौड़ लगा दी, जिससे किसान की सिट्टी-पिट्टी गुम हो गई और वो जान बचाने के लिए दौड़ पड़ा. उसके बाद हाथी फिर गन्ने के खेत में घुस गया. हाथी को पत्थर मारने वाले किसान के साथियों ने गुस्सैल हाथी का वीडियो बनाकर वन विभाग के अधिकारियों को भेज कर हाथियों को खदेड़ने के लिए गुहार लगाई है.
500 गांवों में खेती करना मुश्किल
किसानों का कहना है कि बिजनौर में वनों के सीमावर्ती स्थित 500 गांवों में खेती करना मुश्किल हो गया है. बिजनौर वन विभाग के डीएफओ जय सिंह कुशवाहा ने टीवी9 डिजिटल से बातचीत करते हुए बताया कि वन्यजीवों को वनों में ही रोकने के लिए वनों की सीमा पर कंटीली फेंसिंग की परियोजना शासन में भेजी गई है. परियोजना स्वीकृति होने के बाद करीब 100 किलोमीटर लंबाई में फेंसिंग कराई जाएगी.

