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बरेली में 41 घरों पर चलेगा बुलडोजर… सरकारी जमीन पर कब्जा कर बने थे, अब खुद खाली कर रहे आशियाना

बरेली में 41 घरों पर चलेगा बुलडोजर... सरकारी जमीन पर कब्जा कर बने थे, अब खुद खाली कर रहे आशियाना

बरेली में 41 घरों पर बुलडोजर एक्शन की तैयारी.

उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में नगर निगम की कार्रवाई से शहर के गरीब और मजदूर वर्ग में हड़कंप मचा हुआ है. डेलापीर तालाब किनारे 14 और शाहबाद मोहल्ले में बसे 27 परिवारों को अब अपना आशियाना छोड़ना पड़ेगा. नगर निगम ने इन घरों को अवैध बताते हुए 9 अक्टूबर को नोटिस जारी किया था, जिसमें 15 दिन के भीतर मकान खाली करने के निर्देश दिए गए थे. नोटिस की अवधि 25 अक्टूबर को खत्म हो गई. 7 दिन का और समय दिया है, जिसके बाद डेलापीर के लोगों ने घरों से सामान निकालना शुरू कर दिया है. कई परिवार अब भी यह सोच रहे हैं कि जाएं तो कहां जाएं.

50-60 सालों से यहीं पर रह रहे

डेलापीर में 14 घरों पर कार्रवाई की तैयारी है. यहां रहने वाले लोगों का कहना है कि वे करीब 50-60 सालों से इसी जगह पर रह रहे हैं. किसी ने अपनी बेटी की शादी यहीं की तो किसी के बच्चों का जन्म यहीं हुआ. अब उनके सिर से छत छिनने का डर सता रहा है. TV9 भारतवर्ष की टीम जब ग्राउंड जीरो पर पहुंची तो कई लोगों की आंखों में आंसू थे. एक 73 साल के बुजुर्ग ने कहा कि हमने एक-एक पैसा जोड़कर घर बनाया था. बीजेपी को ही वोट दिया, फिर भी हमारी कोई सुन नहीं रहा. अब हम बूढ़े लोग कहां जाएंगे. वहीं यहां की महिलाएं दिनहाड़ी मजदूरी कर अपना परिवार पालती हैं. उन्होंने यहां एक-एक पाई जोड़कर घर बनाया था, लेकिन अब ये घर टूटने जा रहा है.

खुले आसमान के नीचे आ गए परिवार

डेलापीर में रहने वाले लोगों का कहना है कि जब वे यहां आए थे, तब यह इलाका सुनसान था. तालाब के किनारे जंगल फैला हुआ था. धीरे-धीरे आबादी बढ़ी, कॉलोनियां बनीं और अब नगर निगम की नजर इस जमीन पर है. यहां ज्यादातर मजदूर वर्ग, दलित और ओबीसी समाज के परिवार रहते हैं. कोई रिक्शा चलाकर पेट पालता है तो कोई घरों में काम करके. अब सभी परिवारों को खुले आसमान के नीचे आने की चिंता हैं.

मेरी पढ़ाई खत्म हो जाएगी- छात्रा

कक्षा आठ में पढ़ने वाली एक छात्रा ने रोते हुए कहा कि, अगर घर टूट गया तो मेरी पढ़ाई खत्म हो जाएगी. मेरे पापा किराए का खर्चा नहीं दे सकते हैं. महिलाओं का भी यही कहना है कि वे घर छोड़कर कहां जाएं. उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से गुहार लगाई है कि उन्हें रहने के लिए नया घर दिया जाए या उनका आशियाना न तोड़ा जाए. लोगों ने अपना घर का सामान निकालकर सड़क पर रख लिया है.

शाहबाद मोहल्ले में भी खतरे की घंटी बजी

शहर के शाहबाद मोहल्ले में भी 27 घरों को नगर निगम ने नोटिस थमाया है. यहां भी नोटिस की समय सीमा 25 अक्टूबर को पूरी हो चुकी है. अब 7 दिन का और समय दिया है. वहीं लोगों ने इसको लेकर कोर्ट में केस फाइल किया है. उसको पीले रंग से अपने-अपने घरों पर लिख दिया है. स्थानीय लोगों ने बताया कि वे दशकों से यहां रह रहे हैं.

PM आवास योजना का एक घर भी बुलडोजर की जद में

हैरानी की बात यह है कि इसी क्षेत्र में बना एक प्रधानमंत्री आवास भी बुलडोजर की जद में है. मोहल्ले के कुछ लोगों को सितंबर में हुए एक विवाद के बाद पुलिस ने गिरफ्तार भी किया था, जिससे इलाके में तनाव बना हुआ है. लोगों का कहना है कि सरकार गरीबों के लिए आवास योजना चला रही है, लेकिन अब उन्हीं गरीबों के घर तोड़े जा रहे हैं. प्रशासन का कहना है कि ये मकान सरकारी जमीन पर बने हैं, इसलिए कार्रवाई तय है. वहीं, प्रभावित परिवार उम्मीद लगाए बैठे हैं कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ उनके दर्द को सुनेंगे और उनके सिर से छत नहीं छिनने देंगे.

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