पत्रलेखा ने होने वाले बच्चे को लेकर की बात, बताया कैसी करती हैं दिवाली पूजा

एक्टर कपल राजकुमार राव और पत्रलेखा जल्द ही अपने पहले बच्चे का स्वागत करने वाले हैं. मां बनने वाली पत्रलेखा के लिए इस बार की दिवाली-धनतेरस और भी खास बन गई है.
बेबी आने की खुशी और नई फिल्मों के साथ डबल सेलिब्रेशन
उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, “हम बहुत एक्साइटेड हैं. सबसे पहले तो बेबी आने वाला है, और साथ ही प्रोफेशनली भी हमारी पहली प्रोडक्शन फिल्म कुछ महीनों में रिलीज होने जा रही है. हमारी दूसरी फिल्म की एडिटिंग भी चल रही है. तो बहुत कुछ एक साथ हो रहा है, और यह हमारे लिए बहुत एक्साइटिंग फेज है.”
अपनी प्रेग्नेंसी जर्नी के बारे में बात करते हुए पत्रलेखा कहती हैं, “मेरी प्रेग्नेंसी मेरे लिए इस साल की सबसे बड़ी खुशी रही है. यह एक बहुत अलग और अनोखी जर्नी है. यह मुश्किल भी होती है, क्योंकि शारीरिक रूप से बहुत बदलाव आते हैं. 9 महीनों में शरीर पूरी तरह बदल जाता है. कभी-कभी यह थोड़ा इमोशनल भी कर देता है, क्योंकि आपको पता होता है कि अब आपके परिवार में एक नया सदस्य आने वाला है.”
प्रेग्नेंसी ने मुझे अंदर से नया रूप दे दिया है
वह अब अपने आखिरी ट्राइमेस्टर में हैं और कहती हैं कि उन्हें खुद में बहुत बदलाव महसूस हो रहा है. एक्ट्रेस ने कहा, “मुझे लगता है मैं अब वो इंसान नहीं हूं जो पिछले साल थी. हर दिन कुछ नया महसूस होता है. बच्चा अभी आया नहीं है, लेकिन फिर भी बहुत कुछ बदल रहा है. कोई भी आपको इस एक्सपीरियंस के लिए तैयार नहीं कर सकता. इसे खुद जीकर ही समझा जा सकता है,”
वह बताती हैं. जब उनसे कहा गया कि यह उनकी और राजकुमार की आखिरी दिवाली है जब वे सिर्फ दो लोग हैं, तो वह तुरंत मुस्कुराकर कहती हैं, “मुझे अब ऐसा नहीं लगता कि हम सिर्फ दो लोग हैं, क्योंकि बच्चा तो हमारे साथ ही है, बस आने वाला है.”
दिवाली पर राजकुमार खुद निभाते हैं पूजा के सारे रिवाज
दिवाली के अपने रिवाजों के बारे में वह मुस्कुराकर बताती हैं, “राज और मैं दोनों काफी स्पिरिचुअल हैं. हमारी शादी के बाद से हम हर साल दिवाली पूजा करते हैं, बिना किसी गैप के. राज अपने मंदिर को बहुत प्यार करते हैं और वहां बैठकर मेडिटेशन करना उन्हें बहुत पसंद है. वह खुद मंदिर साफ करते हैं. कभी पंडित जी आते हैं और कभी-कभी राज खुद ही पूजा कर लेते हैं,”.
बचपन की दिवाली याद कर भावुक हुईं
दिवाली की बात करते हुए पत्रलेखा अपने बचपन की यादों में खो जाती हैं. वह कहती हैं, “मैं शिलॉन्ग की रहने वाली हूं. मेरे माता-पिता का एक बहुत क्लोज फ्रेंड्स ग्रुप था. करीब आठ कपल्स, जिनके बच्चे भी हमारे अच्छे दोस्त थे. दिवाली से कुछ दिन पहले हर शाम हम सब पार्टी करते थे और दिवाली आने तक खूब मस्ती चलती थी. वह ट्रेडीशन आज भी शिलॉन्ग में जारी है. मेरे कई दोस्त आज भी वहां लौटकर दिवाली मनाते हैं. लेकिन इस बार मैं नहीं जा पाई, और मुझे इसकी बहुत कमी महसूस हो रही है,”.
दिवाली सिर्फ त्योहार नहीं, नई शुरुआत का एहसास है
पत्रलेखा बताती हैं कि दिवाली हमेशा से उनके जीवन का हिस्सा रही है. “मुझे जितना याद है, दिवाली हमेशा दोस्तों और परिवार के साथ मनाई गई है. मेरे लिए यह सिर्फ त्यौहार नहीं बल्कि एक तरह की सफाई का प्रतीक है. आप घर ही नहीं, मन को भी साफ करते हैं, पुरानी बातों को पीछे छोड़कर नई शुरुआत के लिए जगह बनाते हैं.’uc



