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नाबालिग ने शादी के 11 दिन बाद बच्चे को दिया जन्म,19 दिन बाद पति को हो गई जेल… क्या है पूरा मामला?

नाबालिग ने शादी के 11 दिन बाद बच्चे को दिया जन्म,19 दिन बाद पति को हो गई जेल... क्या है पूरा मामला?

सांकेतिक तस्वीर

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक नाबालिग मां और उसके बच्चे के मामले में फैसला सुनाया और दोनों को राजकीय शेल्टर होम से रिहा नहीं किया. दरअसल, ये मामला उत्तर प्रदेश के कानपुर से सामने आया है, जहां एक लड़की की 3 जुलाई, 2025 को शादी हुई थी. उसने अपनी मर्जी से शादी की और शादी के महज 11 दिन बाद यानी 14 जुलाई, 2025 को उसने एक बेटे को जन्म भी दे दिया.

लड़की की हाई स्कूल की मार्कशीट के मुताबिक उसका जन्म 5 अक्टूबर, 2008 को हुआ था. यानी शादी के समय लड़की की उम्र सिर्फ 16 साल 9 महीने थी, जो कि कानून के मुताबिक नाबालिग मानी जाती है. इसी बीच लड़की के पिता ने बेटी के अपहरण का केस दर्ज कराया था, जिसके बाद 22 जुलाई को लड़की के पति को गिरफ्तार कर लिया गया था और साथ ही लड़की को भी हिरासत में लेकर बाल कल्याण समिति (CWC) के सामने पेश किया गया.

राजकीय बालिका बाल गृह में रखने का आदेश

इस दौरान जब लड़की से पूछताछ की गई तो उसने अपने माता-पिता के साथ रहने से इनकार कर दिया और कहा कि वह अपने पति के साथ रहना चाहती है. ऐसे में लड़की के बयान और माता-पिता के साथ जाने से इनकार करने पर CWC ने उसे और उसके बच्चे को कानपुर नगर स्थित राजकीय बालिका बाल गृह में रखने का आदेश दिया.

इसके बाद लड़की की सास ने हाईकोर्ट में याचिका दायर करते हुए नाबालिग मां और उसके बच्चे को बाल गृह से रिहा करने की अपील की. याचिका में वकील ने केपी थिम्मप्पा गौड़ा बनाम कर्नाटक राज्य 2011 के एक मामले का हवाला दिया और कहा कि लड़की की सहमति से शादी हुई थी. ऐसे में संबंध जायज थे.

कोर्ट ने मामले को लेकर क्या कहा?

हालांकि, खंडपीठ ने इस दलील को खारिज कर दिया. जस्टिस जे.जे. मुनीर और जस्टिस संजीव कुमार की पीठ ने कहा कि केपी थिम्मप्पा गौड़ा मामले के बाद सहमति की उम्र कानून में बदलकर 18 साल कर दी गई है. इस मामले में शादी के समय लड़की की उम्र 18 साल से कम थी. इसलिए उसके साथ यौन संबंध पॉक्सो अधिनियम और भारतीय दंड संहिता की धारा 63 के तहत अपराध है. कोर्ट ने कहा कि नाबालिग पत्नी के साथ रहने से वयस्क पति भी अपराध के लिए जिम्मेदार होगा.

इसके अलावा यह भी कहा गया कि बालिग पति के रिहा होते ही शारीरिक संबंध बन सकते हैं, जिसे कानून रोक नहीं सकता. इसलिए, जब तक लड़की बालिग नहीं हो जाती, तब उसे और उसके बच्चे को सुरक्षित और कानूनी ऑप्शन सिर्फ राजकीय बालिका बाल गृह में रहना ही है.इसके साथ ही कोर्ट ने स्वास्थ्य की निगरानी के लिए कानपुर के CMO को निर्देश दिया कि वह हर महीने कम से कम दो बार डॉक्टर भेजकर नाबालिग और उसके बच्चे की देखभाल करें. इस तरह, कोर्ट ने नाबालिग मां की सुरक्षा और उसके बच्चे की भलाई को प्रायोरिटी देते हुए याचिका खारिज कर दी.

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