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तीन बच्चों को यूपी से ले गई मुंबई, फिर रेलवे स्टेशन में अकेला छोड़ गायब हुई मां… डेढ़ साल बाद दादी को इस हाल में मिले मासूम

तीन बच्चों को यूपी से ले गई मुंबई, फिर रेलवे स्टेशन में अकेला छोड़ गायब हुई मां... डेढ़ साल बाद दादी को इस हाल में मिले मासूम

दादी से मिले बच्चे

नौ महीने तक बच्चों को गर्भ में रखकर जन्म देने वाली मां भी कभी-कभी निष्ठुर हो जाती है, जिसका खामियाजा नवनिहालों को भुगतना पड़ता है. ऐसा ही कुछ गाजीपुर के बहरियाबाद थाना क्षेत्र की रहने वाली एक मां ने किया, जब उसके पति की मौत हो गई. पति की मौत के बाद उसने परिजनों से मायके जाने का बहाना बनाया. फिर अपने 3 बच्चों को वापी रेलवे स्टेशन पर छोड़ दिया.

अब काफी मशक्कत के बाद बाल कल्याण समिति के माध्यम से तीनों बच्चे करीब डेढ़ साल के बाद अपनी दादी से मिले और उनके गले लगकर रोते हुए दिखे. आज से लगभग डेढ़ साल पहले बहरियाबाद थाना क्षेत्र के बेलहरा गांव के रहने वाले किसान छोटू सिंह की बीमारी के चलते मृत्यु हो गई. इसके एक माह बाद ही छोटू सिंह की पत्नी ने परिजनों से अपने तीनों बच्चों को लेकर मायके जाने की बात की.

पुलिस की नजर बच्चों पर पड़ी

इसके बाद छोटू सिंह की पत्नी ससुराल से निकल गई, लेकिन वह अपने मायके न जाकर कहीं और चली गई. बच्चों के अनुसार, मां ने उन्हें मुंबई के वापी रेलवे स्टेशन पर अकेले छोड़ दिया, जिसके बाद उन बच्चों पर पुलिस की नजर पड़ी. पुलिस ने बच्चों को अकेला देखा तो अपने संरक्षण में ले लिया. फिर बाल कल्याण समिति को सौंपा. समिति से बच्चों ने सिलवासा का नाम लिया.

इसके बाद बच्चों को दादरनगर हवेली के सिलवासा स्थानांतरित कर दिया गया. इसके बाद समिति वालों ने काफी प्रयास के बाद पता किया कि बहरियाबाद थाना उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले में है. फिर यहां बाल कल्याण समिति और बाल संरक्षण इकाई से संपर्क साधा गया. खोज करने पर बेलहरा गांव में बच्चों का मूल निवास मिला. फिर आवश्यक पत्राचार आरंभ हुआ.

बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष ने बच्चों को सौंपा

इसके बाद बाल गृह के सुरेश भोया, महिला आरक्षी भावना भोया, आरक्षी सदानंद गान्वित बच्चों को अपने साथ लेकर छुट्टी के दिन गाजीपुर पहुंचे. बच्चों की दादी रेनू सिंह और चाचा गोलू सिंह भी बाल संरक्षण गृह आए. बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष सीमा पाठक, सदस्य जयप्रकाश भारती और निलेश सिंह ने बच्चों को उनकी दादी को सौंपा.

पोते पोती के दादी के गले लगकर रोने से माहौल कुछ देर के लिए गमगीन हो गया. कार्यालय प्रमुख प्रमोद कुमार पांडेय ने कागजी कार्रवाई पूर्ण करने में अपना योगदान दिया.

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