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जवाहर लाल नेहरू की जयंती पर बना जिला गाजियाबाद, UP में 2014 से ही बड़ी जीत का रिकॉर्ड बना रही BJP | District Ghaziabad became Pandit jawaharlal nehru jayanti ND tiwari lok sabha election 2024

जवाहर लाल नेहरू की जयंती पर बना जिला गाजियाबाद, UP में 2014 से ही बड़ी जीत का रिकॉर्ड बना रही BJP

जवाहर लाल नेहरू की जयंती पर बना था जिला गाजियाबाद

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार शाम को उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद शहर में रोड शो किया और लोगों को उनके प्रति सम्मान दिखाने के लिए सोशल मीडिया X पर धन्यवाद भी किया. यह शहर भारतीय जनता पार्टी के लिए बेहद खास है क्योंकि इस शहर ने केंद्र में मोदी राज की शुरुआत से लगातार दोनों बार प्रदेश में सबसे बड़ी जीत का रिकॉर्ड बनाया है. 2014 और 2019 में जीत का जो कीर्तिमान जिला गाजियाबाद की संसदीय सीट ने रचा वो उत्तर प्रदेश की अन्य सीट उसके करीब भी नहीं पहुंच सकी.

गाजियाबाद का जिले के रूप में इतिहास ज्यादा पुराना नहीं है. यह करीब 5 दशक पहले ही जिले के रूप में अस्तित्व में आया. 48 साल पहले 1976 में गाजियाबाद मेरठ जिले की एक तहसील के रूप में हुआ करती थी. लेकिन इसी साल 14 नवंबर को देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू की जयंती पर तत्कालीन मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी ने बड़ा ऐलान किया और गाजियाबाद को मेरठ से अलग करते हुए नए जिले के रूप में गठन करने का ऐलान कर दिया.

2 राज्यों के CM बनने वाले अकेले नेता

नारायण दत्त तिवारी देश के ऐसे मुख्यमंत्री हैं जिन्हें 2 राज्यों में मुख्यमंत्री बनने का गौरव हासिल है. कांग्रेस के दिग्गज नेताओं में शुमार किए जाने वाले नारायण दत्त तिवारी कुल 4 बार मुख्यमंत्री बने जिसमें 3 बार उत्तर प्रदेश के तो एक बार नवगठित राज्य उत्तराखंड के. उत्तर प्रदेश में भले ही वह अपना कार्यकाल कभी पूरा नहीं कर पाए, लेकिन उत्तराखंड में 5 साल तक सीएम रहने वाले वे एकमात्र मुख्यमंत्री हैं.

खैर, नारायण दत्त तिवारी पहले प्रजा सोशलिस्ट पार्टी से जुड़े हुए थे, लेकिन बाद में वह कांग्रेस में आ गए. वह 21 जनवरी 1976 में पहली बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने और इस पद के संभालने के करीब 9 महीने बाद उन्होंने बड़ा फैसला लिया और पंडित नेहरू की जयंती पर मेरठ से अलग करते हुए तहसील गाजियाबाद को नया जिला गाजियाबाद बना दिया. इस शहर की स्थापना 1740 में की गई थी. इसकी स्थापना वजीर गाजीउद्दीन ने की थी और उनके नाम पर इसे गाजीउद्दीन नगर कहा गया. इस घोषणा के करीब 6 महीने बाद उन्हें मुख्यमंत्री पद छोड़ना पड़ा था.

हापुड़ सीट के तहत आता था गाजियाबाद

गाजियाबाद क्षेत्र पहले हापुड़ लोकसभा सीट का हिस्सा हुआ करता था. हापुड़ में पहली बार लोकसभा चुनाव साल 1957 में कराया गया था. तब यहां पर हुए चुनाव में कांग्रेस के कृष्णचंद्र शर्मा सांसद चुने गए. उन्होंने जनसंघ के सुखदेव शास्त्री को हराया था. तब से लेकर हापुड़ संसदीय सीट पर हर बार चुनाव (1962, 1967, 197, 1977, 1980, 1984, 1989, 1991, 1996, 1998, 1999 और 2004) कराए गए. लेकिन 2008 में परिसीमन के बाद संसदीय सीट का अस्तित्व ही बदल गया. 2004 के चुनाव में यहां पर आखिरी बार चुनाव कराया गया और कांग्रेस के सुरेंद्र प्रकाश गोयल सांसद चुने गए. इस तरह से हापुड़ सीट पर पहला और आखिरी सांसद कांग्रेस से ही चुना गया.

2009 के लोकसभा चुनाव से पहले हापुड़ सीट की जगह गाजियाबाद को नया लोकसभा क्षेत्र बनाया गया और यहां पर पहली बार आम चुनाव कराए गए. तब इस सीट पर हुए पहले चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने राजनाथ सिंह को मैदान में उतारा. हापुड़ सीट के आखिरी सांसद सुरेंद्र प्रकाश गोयल को फिर से उतारा गया, लेकिन राजनाथ सिंह के हाथों हार का सामना करना पड़ा. बहुजन समाज पार्टी के पंडित अमर पाल शर्मा ने मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया. राजनाथ सिंह ने अंत में मुकाबला 90,681 मतों के अंतर के साथ जीत लिया.

2014 में देश की दूसरी बड़ी जीत रही

2014 के चुनाव में बीजेपी जब नरेंद्र मोदी की अगुवाई में चुनाव मैदान में उतरी तो पार्टी ने राजनाथ सिंह को लखनऊ भेज दिया और राजधानी दिल्ली से सटे गाजियाबाद सीट से सेना के रिटायर जनरल विजय कुमार सिंह यानी वीके सिंह को मैदान में उतारा. मोदी लहर के बीच वीके सिंह ने 7,58,482 वोट हासिल किए और कांग्रेस के उम्मीदवार राज बब्बर को 5,67,260 मतों के बड़े अंतर से हरा दिया. राज बब्बर को महज 1,91,222 वोट ही मिले.

वोट के अंतर से 2014 के आम चुनाव में यह देश की दूसरी सबसे बड़ी जीत रही थी. पीएम नरेंद्र मोदी वाराणसी के अलावा गुजरात की वडोदरा लोकसभा सीट से मैदान में उतरे थे और उन्हें यहां पर 5,70,128 मतों के रिकॉर्ड अंतर से जीत हासिल हुई थी. इसके बाद वीके सिंह का नंबर आया और उन्होंने 5,67,260 मतों के अंतर से जीत पाई थी. उत्तर प्रदेश की संसदीय सीटों में यह सबसे बड़ी जीत रही. 2014 के चुनाव में कुल 6 संसदीय सीटों पर हार-जीत का अंतर 5 लाख से अधिक वोटों का रहा था.

2019 में UP की सबसे बड़ी जीत

2019 के संसदीय चुनाव में बीजेपी फिर नरेंद्र मोदी की अगुवाई में मैदान में उतरी. पार्टी ने गाजियाबाद संसदीय सीट से वीके सिंह को दूसरी बार मौका दिया और उन्होंने पार्टी को निराश नहीं किया. वह फिर से 5 लाख से अधिक मतों के अंतर से चुनाव जीतने में कामयाब रहे. पार्टी देश में बड़ी जीत के साथ फिर सत्ती में लौटी.

गाजियाबाद सीट से वीके सिंह को 5,01,500 मतों के अंतर से जीत मिली और उन्होंने लगातार दूसरी बार उत्तर प्रदेश में हुए लोकसभा चुनाव में सबसे बड़ी जीत अपने नाम की थी. 2014 के आम चुनाव में वीके सिंह को 7,58,482 वोट मिले थे तो 2019 में उनके खाते में 944,503 यानी कुल पड़े वोट का करीब 62 फीसदी वोट आए थे.

अब अतुल गर्ग पर टिकी निगाहें

हालांकि देश में सबसे बड़ी जीत के लिहाज से वह काफी निचले पायदान पर चले गए. 2019 में सबसे बड़ी जीत मिली गुजरात के नवसारी लोकसभा सीट से. यहां पर बीजेपी के सीआर पाटिल ने 6,89,668 मतों के अंतर से जीत हासिल की थी. देश में सबसे बड़ी जीत के मामले में वीके सिंह इस बार 17वें पायदान पर रहे थे.

बीजेपी ने 2024 के संसदीय चुनाव में गाजियाबाद संसदीय सीट पर वीके सिंह को तीसरी बार मैदान में नहीं उतारा है, उनकी जगह विधायक अतुल गर्ग को मौका दिया गया है. अब देखना होगा कि अतुल गर्ग वीके सिंह की राह पर चलते हुए क्या पार्टी को 5 लाख से अधिक मतों के अंतर से चुनाव में जीत दिलाने की हैट्रिक लगा पाते हैं या नहीं. गाजियाबाद में दूसरे चरण में 26 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे. दूसरे चरण के तहत उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान समेत देश के 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश के 89 सीटों पर वोटिंग कराई जाएगी.

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