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चुनाव आयोग पर बरसे राहुल गांधी, लगाए आरोप- 5 तरीकों से चुराए गए वोट, सबूत भी दिखाए

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर लोकसभा चुनाव में वोट की चोरी के आरोप लगाए. उन्होंने दावा किया कि बेंगलुरु सेंट्रल लोकसभा सीट की महादेवपुरा विधानसभा में 1,00,250 फर्जी वोट जुड़े हुए हैं. राहुल ने कहा कि यह डेटा चुनाव आयोग द्वारा कांग्रेस को दिए गए 7 फुट ऊंचे दस्तावेजों के ढेर से निकाला गया है. इन दस्तावेजों को उन्होंने ‘आपराधिक सबूत’ बताया.

डुप्लिकेट वोटर्स के उदाहरण
पहला उदाहरण: गुरकीरत सिंह ढंग नामक वोटर चार अलग-अलग बूथों (116, 124, 125, 126) पर रजिस्टर्ड हैं. दूसरा उदाहरण: आदित्य श्रीवास्तव नामक व्यक्ति की एंट्री तीन राज्यों – उत्तर प्रदेश, कर्नाटक और महाराष्ट्र-  की वोटर लिस्ट में पाई गई.

फर्जी और अमान्य पते
राहुल गांधी ने दावा किया कि कई वोटर्स के पते या तो शून्य (0) दिखाए गए हैं, या पूरी तरह से अस्पष्ट हैं. जैसे- किसी के पिता का नाम “ilsdfhug” लिखा गया है, और किसी का “dfoigaidf”. उन्होंने कहा, इस तरह के 40,000 वोटर्स हैं जिनके पते या तो गलत हैं, अस्तित्वहीन हैं, या सत्यापित नहीं किए जा सकते.

एक ही पते पर सैकड़ों वोटर्स
कांग्रेस ने दो कमरों की तस्वीरें पेश कीं, जिनमें से एक कमरे में 80 वोटर और दूसरे में 46 वोटर दर्ज हैं. राहुल ने सवाल किया कि क्या इतने लोग एक ही छोटे से कमरे में रह सकते हैं?

गलत फोटो और दोहरी एंट्री
कुछ वोटर लिस्ट में या तो फोटो नहीं है या फोटो इतना छोटा है कि पहचानना मुश्किल है. एक उदाहरण में ‘शकुन रानी’ नाम की महिला का नाम दो बार वोटर लिस्ट में था – एक बार नाम और टाइटल अलग-अलग कॉलम में और दूसरी बार पूरा नाम एक साथ.

चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया
कर्नाटक के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने राहुल गांधी से औपचारिक घोषणा और हलफनामा मांगा है, जिसमें उन वोटरों के नाम शामिल हों जो कथित तौर पर गलत तरीके से लिस्ट में जोड़े गए हैं. चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि चुनाव परिणाम को सिर्फ हाई कोर्ट के समक्ष याचिका दायर कर ही चुनौती दी जा सकती है.

झूठे साक्ष्य देने पर सजा
चुनाव आयोग ने राहुल को चेतावनी दी कि झूठा साक्ष्य देने पर भारतीय दंड संहिता (BNS) की धारा 227 और 1950 के जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 31 के तहत कार्रवाई हो सकती है.

राहुल गांधी का पलटवार
राहुल गांधी ने जवाब में कहा- ‘मैं यह सब सार्वजनिक रूप से कह रहा हूं. इसे मेरी शपथ मानिए. यह डेटा हमारा नहीं, बल्कि चुनाव आयोग का है. वे इस डेटा को नकार नहीं रहे हैं.’ उन्होंने ANI से कहा – ‘अगर यह गलत है तो आयोग क्यों नहीं कहता कि वोटर लिस्ट झूठी है? क्योंकि वे जानते हैं कि हम सच जानते हैं और उन्होंने देशभर में ऐसा किया है.’

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