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कोविड में वायरल हुआ था SP का ‘मुसलमानों पर टिप्पणी’ वाला ऑडियो, अब सुप्रीम कोर्ट ने कहा-आवाज का सैंपल लिया जाए

कोविड में वायरल हुआ था SP का 'मुसलमानों पर टिप्पणी' वाला ऑडियो, अब सुप्रीम कोर्ट ने कहा-आवाज का सैंपल लिया जाए

संजीव त्यागी

सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के बिजनौर में एक व्यक्ति के खिलाफ दर्ज FIR को रद्द कर दिया है. कोर्ट ने पाया कि यह मामला एक ऑडियो क्लिप की वजह से सबक सिखाने या बदला लेने के लिए दर्ज किया गया था, जिसमें तत्कालीन SP बिजनौर को मुस्लिम समुदाय के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियां करते हुए सुना जा सकता है.

यह मामला कोविड-19 महामारी के दौरान मार्च 2020 का है, लेकिन पीड़ित इस्लामुद्दीन अंसारी को FIR रद्द कराने के लिए 5 साल की कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ी. निचली आदालतों से निराशा हाथ लगने के बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था.

इस्लामुद्दीन अंसारी ने दावा किया कि उन्होंने तत्कालीन SP बिजनौर संजीव त्यागी की एक ऑडियो क्लिप उन्हें भेजी थी, ताकि यह पुष्टि की जा सके कि क्या मुस्लिम समुदाय के खिलाफ अपमानजनक भाषा बोलने वाले व्यक्ति वही हैं या कोई और.

ऑडियो सुन भड़क गए SP संजीव त्यागी

ऑडियो क्लिप आने के बाद SP भड़क गए और इस्लामुद्दीन अंसारी के खिलाफ धारा 505 IPC (जनता के बीच शत्रुता फैलाने का इरादा) और धारा 67 IT एक्ट के तहत FIR दर्ज की. 2021 में चीफ जुडिशियल मैजिस्ट्रेट ने इस केस में चार्जशीट पर संज्ञान लिया. इसके बाद इस्लामुद्दीन हाईकोर्ट गए, लेकिन इलाहाबाद हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता के खिलाफ मामला रद्द करने से इनकार कर दिया था, जिसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया.

अब सुप्रीम कोर्ट ने इस ऑडियो की जांच के लिए तत्कालीन SP संजीव त्यागी को पक्षकार बनाया और उन्हें अपना वॉयस सैंपल देने का आदेश दिया. अगर ऑडियो जांच में ये ऑडियो उनकी पाई जाती है, तो उनके खिलाफ एक्शन लिया जा सकता है.

कोर्ट की सख्त टिप्पणी

न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और विनोद चंद्रन की बैंच ने कहा कि FIR दर्ज करना कानून के अधिकार का दुरुपयोग और न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग है. कोर्ट ने संजीव त्यागी से सवाल किया कि आरोप लगने के बाद ऑडियो की पुष्टि क्यों नहीं करवाई गई.

न्यायमूर्ति अमानुल्लाह ने कहा, “अगर आपने वो बातें कही हैं, तो आपको व्यवस्था के प्रति जिम्मेदार होना होगा. आपकी आवाज वायरल हो गई है, क्या आप वॉयस सैंपल नहीं देंगे?” कोर्ट ने इस्लाम को राहत देते हुए पुलिस थाना कोतवाली शहर, बिजनौर में दर्ज FIR और सभी कार्यवाही को रद्द कर दिया है.

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कोर्ट के इस फैसले से साफ हुआ है कि पद की शक्ति का इस्तेमाल व्यक्तिगत पूर्वाग्रहों से प्रेरित होकर कानूनी प्रक्रिया को प्रभावित करने के लिए नहीं किया जा सकता. भारतीय संविधान समानता, धर्मनिरपेक्षता और सभी नागरिकों की गरिमा की गारंटी देता है. किसी भी सरकारी अधिकारी की ओर किसी धर्म विशेष के नफरत या इस्लामोफोबिक दृष्टिकोण रखना न सिर्फ असंवैधानिक है, बल्कि लोक सेवक के रूप में उसके कर्तव्य का गंभीर उल्लंघन है.

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