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कथावाचक को गार्ड ऑफ ऑनर पर भड़के चंद्रशेखर, बोले- योगी सरकार धार्मिक सत्ता के आगे नतमस्तक

कथावाचक को गार्ड ऑफ ऑनर पर भड़के चंद्रशेखर, बोले- योगी सरकार धार्मिक सत्ता के आगे नतमस्तक

मशहूर कथावाचक पुण्डरीक गोस्वामी को गार्ड ऑफ ऑनर.

उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले में मशहूर कथावाचक पुण्डरीक गोस्वामी को गार्ड ऑफ ऑनर देने का मामला तूल पकड़ रहा है. नगीना सांसद और आजाद समाज पार्टी के मुखिया चंद्रशेखर आजाद ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे संविधान पर हमला बताया है. वहीं समाजवादी पार्टी ने इसे बाबा साहेब का अपमान बताया है. गार्ड ऑफ ऑनर देने का वीडियो पुराना बताया जा रहा है. फिलहाल इस मामले को लेकर बहराइच पुलिस का कोई बयान नहीं आया है.

दरअसल उत्तर प्रदेश के बहराइच में कथावाचक को गार्ड ऑफ ऑनर वाला वीडियो वायरल हो रहा है. बहराइच में कप्तान आरएन सिंह ने कथावाचक को एक दो गनर नहीं, पूरी परेड की सलामी दिलाई. अब इसको लेकर सियासी घमासान मचा हुआ है.

गार्ड ऑफ ऑनर का वीडियो वायरल

नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद ने 38 सेकेंड का वीडियो अपने एक्स हैंडल पर शेयर करते हुए योगी सरकार पर हमला बोला है. उन्होंने कहा, यह घटना बताती है कि उत्तर प्रदेश का प्रशासन अब संविधान के प्रति जवाबदेह नहीं, बल्कि धार्मिक सत्ता के आगे नतमस्तक है.

राज्य किसी धर्म-विशेष की जागीर नहीं

नगीना सांसद ने एक्स पर लिखा कि भारत कोई मठ नहीं, बल्कि एक संवैधानिक गणराज्य है. और राज्य किसी धर्म-विशेष की जागीर नहीं है. इसके बावजूद एक कथावाचक पुंडरीक गोस्वामी को उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा परेड और सलामी (Guard of Honour) दी जाती है. यह सिर्फ एक प्रशासनिक गलती नहीं, बल्कि संविधान पर खुला हमला है.

उन्होंने लिखा कि सलामी और परेड राज्य की संप्रभु शक्ति का प्रतीक होती है. यह सम्मान संविधान, राष्ट्र और शहीदों के नाम पर दिया जाता है. किसी कथावाचक, बाबा या धर्मगुरु का रुतबा बढ़ाने के लिए नहीं. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के तथाकथित रामराज्य में अब हालात ये हैं कि आस्था को संविधान से ऊपर, धर्म को कानून से ऊपर और कथावाचकों को संवैधानिक पदों से ऊपर बैठाया जा रहा है.

धार्मिक सत्ता के आगे नतमस्तक

यह घटना बताती है कि उत्तर प्रदेश का प्रशासन अब संविधान के प्रति जवाबदेह नहीं, बल्कि धार्मिक सत्ता के आगे नतमस्तक है. यह एक खतरनाक परंपरा की ओर इशारा करता है, जहां राज्य धीरे-धीरे अपने संवैधानिक चरित्र को त्याग रहा है. उन्होंने लिखा कि सवाल उठते है- पुंडरीक गोस्वामी हैं कौन?, वे कौन-सा संवैधानिक पद धारण करते हैं?, किस कानून या प्रोटोकॉल के तहत उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया?, क्या अब उत्तर प्रदेश में धार्मिक पहचान ही नया सरकारी प्रोटोकॉल है?

मुख्यमंत्री को याद दिलाना जरूरी

उन्होंने लिखा कि मुख्यमंत्री को याद दिलाना जरूरी है कि संविधान की प्रस्तावना भारत को धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र घोषित करती है, किसी एक धर्म का सेवक नहीं. अनुच्छेद 15: धर्म के आधार पर विशेषाधिकार देना असंवैधानिक है. और अनुच्छेद 2528: राज्य धर्म से दूरी बनाए रखेगा, चरणवंदना नहीं करेगा. इसका साफ मतलब है कि संविधान सर्वोच्च है, कोई धर्म नहीं. राज्य का कोई धर्म नहीं होता.



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