उत्तर प्रदेशभारत

‘आ नहीं सकते तो…’, दूल्हे ने शादी का ऐसा कार्ड छपवाया, सोशल मीडिया पर हो गया वायरल, आप भी देखें

'आ नहीं सकते तो...', दूल्हे ने शादी का ऐसा कार्ड छपवाया, सोशल मीडिया पर हो गया वायरल, आप भी देखें

शादी का कार्ड.

उत्तर प्रदेश के बागपत में शादी का एक अनोखा कार्ड वायरल हुआ है. दरअसल, यहां एक परिवार में शादी के दो प्रोग्राम हैं. यानि बेटी की भी शादी है और बेटे की भी. बेटे आकाश ने शादी का ऐसा कार्ड छपवाया है, जिसकी चर्चा हर कहीं हो रही है. शादी में एक QR कोड छपवाया गया है. इसके पीछे का कारण जानकर आप भी हैरान रह जाएंगे.

दूल्हा बनने जा रहे आकाश ने कहा- शादी में दूर-दूर से कई रिश्तेदार आते हैं. उन्हें पहले कार्ड देने के लिए भी जाना पड़ता है. मगर कई बार कार्ड देने जाने के चक्कर में और शादी समारोह में आने के वक्त सड़क हादसे हो जाते हैं. बस इन्ही को देखते हुए QR कोर्ड वाला कार्ड छपवाया गया है. यानि अगर रिश्तेदार शादी में किसी कारणवश नहीं भी आ पाएं तो QR कोड को स्कैन करके शगुन भेज सकते हैं. दूल्हे का ये भी मकसद है कि अनावश्यक खर्च और समय की भी बचत भी इससे हो सके.

7 और 8 फरवरी को हैं दोनों शादियां

दोघट कस्बा निवासी आकाश बाल्मीकि ने अपनी बहन और अपनी शादी के कार्ड पर QR कोड छपवाया है. आकाश ने बताया कि 7 फरवरी को उसकी बहन की शादी है और 8 फरवरी को उसकी खुद की शादी संपन्न होगी. दोनों शादियों के कार्ड पर छपे QR कोड के माध्यम से अब कन्यादान और दुल्हन की मुंह दिखाई का शगुन ऑनलाइन भेजा जा सकेगा. आकाश का कहना है कि शादी-विवाह के अवसर पर रिश्तेदार और परिचित अक्सर दूर-दराज से समारोह में शामिल होने के लिए यात्रा करते हैं. इस दौरान कई बार सड़क हादसे हो जाते हैं, जिससे खुशियों का माहौल मातम में बदल जाता है. इसी समस्या को देखते हुए उन्होंने यह कदम उठाया, ताकि दूर रहने वाले रिश्तेदार बिना यात्रा किए सुरक्षित तरीके से अपनी शुभकामनाएं और शगुन भेज सकें.

लोग कर रहे इस पहल की सराहना

उन्होंने बताया कि जिन रिश्तेदारों के लिए आना संभव नहीं है या जो दूरी और व्यस्तता के कारण नहीं आ पाते, वे QR कोड स्कैन कर ऑनलाइन कन्यादान या मुंह दिखाई का शगुन भेज सकते हैं. इससे न केवल उनकी सुरक्षा बनी रहेगी, बल्कि आने-जाने में होने वाला फजूल खर्च भी बचेगा. आकाश ने अपनी इस पहल के तहत पंजाब, चंडीगढ़, पानीपत समेत अन्य दूरस्थ क्षेत्रों में रिश्तेदारों को व्हाट्सएप के माध्यम से डिजिटल कार्ड भेजे हैं, जबकि आसपास के इलाकों में कार्ड स्वयं जाकर वितरित किए हैं.

इस अनोखी सोच की क्षेत्र में काफी सराहना हो रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह पहल समय की जरूरत है और इससे समाज में सकारात्मक संदेश जाएगा. तकनीक के सही इस्तेमाल से परंपराओं को सुरक्षित और सुविधाजनक बनाया जा सकता है. आकाश की यह सोच आने वाले समय में अन्य लोगों के लिए भी प्रेरणा बन सकती है.

Show More

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button