आगरा एक्सप्रेस-वे के पास इन 18 गांवों में जमीन की खरीद पर रोक, LDA का क्या है प्लान? 40935 किसान अथॉरिटी के नाम करेंगे जमीन की रजिस्ट्री

नैमिष नगर और वरुण विहार योजना पर बड़ी खबर
लखनऊ विकास प्राधिकरण (Lucknow Development Authority) की नैमिष नगर व वरूण विहार आवासीय योजना में आ रहे गांवों में अब जमीन की खरीद-फरोख्त नहीं हो सकेगी. इसके लिए एलडीए ने योजना से संबंधित गांवों में जमीन की रजिस्ट्री पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाने के सम्बंध में उप निबंधक को पत्र भेजा है.
एलडीए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने बताया कि आगरा एक्सप्रेस-वे के पास लगभग 6,580 एकड़ क्षेत्रफल में वरूण विहार योजना विकसित की जाएगी. इसके लिए सदर व सरोजनीनगर तहसील के ग्राम-भलिया, आदमपुर इन्दवारा, बहरू, जलियामऊ एवं मदारपुर, इब्राहिमगंज, नकटौरा, गहलवारा, तेजकृष्ण खेड़ा, रेवरी, सकरा व दोना की भूमि चिन्हित की गयी है.
इसी तरह सीतापुर-रैथा रोड पर प्रस्तावित नैमिष नगर योजना के लिए 18 गांवों की लगभग 3670 एकड़ जमीन ली जानी है. इसमें बीकेटी व सदर तहसील के ग्राम-भौली, लक्ष्मीपुर, पूरब गांव, पुरवा, सैरपुर, फरूखाबाद, कोड़री भौली, कमलाबाद, कमलापुर, पलहरी, गोपरामऊ, बारूमऊ, धतिंगरा, सैदापुर, पश्चिम गांव, धोबैला, उमरभारी व दुग्गौर शामिल हैं.
40935 किसान अथॉरिटी के नाम करेंगे जमीन की रजिस्ट्री
उपाध्यक्ष ने बताया कि वरूण विहार के लिए लगभग 22403 किसान और नैमिष नगर के लिए लगभग 18532 किसानों से प्राधिकरण के पक्ष में जमीन का बैनामा कराया जाना है. इस क्रम में एलडीए लगातार किसानों से संपर्क करके सहमति के आधार पर जमीन का बैनामा करा रहा है, जिसकी पूर्ण धनराशि सीधा किसानों के बैंक खाते में भेजी जा रही है. इस बीच संज्ञान में आया कि दोनों आवासीय योजनाओं के अंतर्गत आ रहे गांवों के कुछ किसान प्राधिकरण के अलावा थर्ड पार्टी के पक्ष में जमीन की रजिस्ट्री कर रहे हैं, जिससे मुख्यमंत्री शहरी विस्तारीकरण योजना के अंतर्गत स्वीकृत इन महत्वपूर्ण आवासीय योजनाओं पर गलत प्रभाव पड़ सकता है.
इसे ध्यान में रखते हुए बीकेटी, सदर व सरोजनीनगर तहसील के उप निबंधक को पत्र भेजा गया है, जिसमें इन दोनों योजनाओं में आ रहे गांवों की जमीन को प्राधिकरण के अतिरिक्त अन्य पक्षों को किये जाने वाले विक्रय अनुबंधों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाने के लिए कहा गया है. इससे योजना में सक्रिय बिचौलियों व प्रॉपर्टी डीलरों के गठजोड़ पर शिकंजा कसेगा और भविष्य में भूमि-स्वामित्व को लेकर किसी भी तरह के विवाद की स्थिति उत्पन्न नहीं होगी.
