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अयोध्या: विकास पर खर्च होंगे 74256 लाख, नगर निगम का ऐतिहासिक बजट; जानें कहां से आएगा पैसा

अयोध्या में वित्तीय वर्ष 2025-26 में नगर निगम क्षेत्र के विकास और जनसेवाओं पर 74256 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे. बुधवार को गांधी सभागार में आयोजित नगर निगम बोर्ड की बैठक में यह बजट सर्वसम्मति से पारित किया गया. बैठक की अध्यक्षता महापौर महंत गिरीशपति त्रिपाठी ने की, जबकि संचालन अपर नगर आयुक्त सुमित कुमार ने किया. इस दौरान नगर आयुक्त संतोष कुमार शर्मा भी उपस्थित रहे.

आय-व्यय का ब्यौरा पेश करते हुए वित्त एवं लेखा अधिकारी नरेंद्र सिंह ने बताया कि इस वर्ष कुल अनुमानित आय 75661.27 लाख रुपये आंकी गई है. इसमें प्रारंभिक अवशेष भी शामिल है. इसी आधार पर 74256 लाख रुपये के व्यय का प्रस्ताव तैयार किया गया, जिसे ध्वनिमत से पास कर दिया गया. अयोध्या नगर निगम का यह बजट न केवल शहर की जरूरतों को पूरा करेगा, बल्कि आने वाले समय में अयोध्या को स्मार्ट सिटी की दिशा मेंभीआगेबढ़ाएगा.

इन स्रोतों से होगी आय

उन्होंने बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए अलग-अलग स्रोतों से आय होगी. करों से 2972.50 लाख रुपए की आय होगी. इसमें संपत्तिकर, जलकर, पशुकर आदि शामिल हैं. वहीं सर्फ किराया से 57 लाख रुपए नगर निगम को मिलेंगे. विभिन्न शुल्क से 2146.90 लाख रुपए, उत्पादों की बिक्री से 77.70 लाख रुपए, राजस्व अनुदान/अंशदान से 16391 लाख रुपए प्राप्त होंगे.

केंद्र सरकार से अनुदान के रुप में 2740 लाख रुपए मिलने की उम्मीद है. राज्य सरकार से 24107.60 लाख रुपए अनुदान के रुप मे प्राप्त होंगे. ब्याज व अन्य आय से 31.60 लाख रुपए मिलने की उम्मीद है. इस बजट से कर्मचारियों के वेतन, बुनियादी सुविधाओं के विस्तार, सफाई व्यवस्था, जलापूर्ति, प्रकाश व्यवस्था, सड़क निर्माण सहित कई जनोपयोगी कार्यों को गति दी जाएगी.

बैठक में लिए गए अन्य निर्णय

सफाईकर्मियों का बीट तय किया गया है. प्रवर्तन दल को व्यवहार सुधारने के निर्देश दिए गए हैं. वहीं अलाव की लकड़ी की खरीद की जांच के आदेश भी दिए गए हैं. सभी सामग्री की निविदा समय से आमंत्रित करने का निर्णय भी लिया गया है.

एक राष्ट्र, एक चुनाव प्रस्ताव को मिली मंजूरी

बैठक में वरिष्ठ पार्षद बृजेंद्र सिंह ने ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव का प्रस्ताव पेश किया. हालांकि सपा पार्षद विशाल पाल ने आपत्ति जताई, लेकिन महापौर ने 1967 तक लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराए जाने का हवाला देते हुए इसके लाभ गिनाए. उन्होंने कहा कि इससे आचार संहिता की अवधि घटेगी, चुनाव खर्च कम होगा, और विकास कार्यों में तेजी आएगी. जिसके बाद प्रस्ताव को सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया.



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