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अखिलेश की सुरक्षा में राजनाथ-मायावती से ज्यादा सुरक्षा कर्मी, केशव मौर्य का तंज- ‘मुंगेरीलाल के हसीन सपने’

अखिलेश की सुरक्षा में राजनाथ-मायावती से ज्यादा सुरक्षा कर्मी, केशव मौर्य का तंज- ‘मुंगेरीलाल के हसीन सपने’

उत्तर प्रदेश विधान परिषद में शुक्रवार को पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की सुरक्षा को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक हुई. उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने सदन में खुलासा किया कि अखिलेश यादव की सुरक्षा में राजनाथ सिंह और मायावती से अधिक कर्मी तैनात हैं, जबकि एनएसजी सुरक्षा केवल मायावती को ही प्रदान की गई है. इस मुद्दे पर समाजवादी पार्टी ने अखिलेश के लिए एनएसजी सुरक्षा की मांग की, जिसे बीजेपी ने ‘मुंगेरीलाल के हसीन सपने’ करार दिया.

विधानसभा में यह मामला सपा विधायक आशुतोष सिन्हा ने उठाया. उन्होंने कहा कि सपा और बीजेपी की विचारधाराओं में भले ही अंतर हो, लेकिन सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं होना चाहिए. आशुतोष सिन्हा ने पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के लिए एनएसजी कमांडो की सुरक्षा की मांग की, ताकि उनकी जान-माल की रक्षा सुनिश्चित हो.

किसको कितनी मिलती है सुरक्षा

इस पर उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने विस्तार से जवाब दिया. उन्होंने बताया कि एनएसजी सुरक्षा का फैसला केंद्र सरकार का है और राज्य सरकार इसमें हस्तक्षेप नहीं कर सकती. केशव ने आंकड़ों के साथ तुलना पेश की. उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री और केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के लिए 81 सुरक्षा कर्मियों की सिफारिश है, जबकि वर्तमान में 82 कर्मी तैनात हैं.

बसपा सुप्रीमो मायावती के लिए 156 कर्मियों की सिफारिश है और 161 कर्मी लगे हुए हैं. वहीं, अखिलेश यादव के लिए 185 सुरक्षा कर्मियों की सिफारिश है और 186 कर्मी तैनात हैं. प्रदेश में पूर्व मुख्यमंत्री की हैसियत से राजनाथ सिंह और मायावती से ज्यादा अखिलेश यादव की सुरक्षा में कर्मी लगे हुए हैं.

अखिलेश की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं

डिप्टी सीएम ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्रियों के लिए जेड प्लस सुरक्षा का प्रावधान है और सरकार अखिलेश की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करेगी. हालांकि, केशव मौर्या ने विपक्ष पर तंज कसते हुए कहा कि सपा को सिर्फ मायावती की एनएसजी सुरक्षा से दिक्कत है. उन्होंने अखिलेश को पूर्व मुख्यमंत्री बताते हुए कहा, वे पूर्व ही बने रहेंगे.

‘मुंगेरीलाल का हसीन सपना’

इस पर सपा सदस्य राजेंद्र चौधरी ने पलटवार किया और दावा किया कि 15 मार्च 2027 को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ही होंगे. केशव मौर्या ने इसे ‘मुंगेरीलाल का हसीन सपना’ बताकर खारिज कर दिया, जिससे सदन में हंगामा मच गया. यह बहस ऐसे समय में हुई है, जब प्रदेश में राजनीतिक सरगर्मियां तेज हैं और 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारी शुरू हो चुकी है. सपा लगातार बीजेपी सरकार पर पूर्व मुख्यमंत्रियों की सुरक्षा में भेदभाव का आरोप लगाती रही है, जबकि बीजेपी इसे राजनीतिक स्टंट बताती है.

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