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लैंबॉर्गिनी केस: 4 दिन बाद शिवम मिश्रा अरेस्ट, 4 घंटे में जमानत… पहले ड्राइवर तो बाद में पुलिस की कहानी हुई फेल

लैंबॉर्गिनी केस: 4 दिन बाद शिवम मिश्रा अरेस्ट, 4 घंटे में जमानत... पहले ड्राइवर तो बाद में पुलिस की कहानी हुई फेल

कानपुर लैंबॉर्गिनी केस में शिवम मिश्रा को जमानत मिली.

कानपुर के हाई प्रोफाइल चर्चित लैंबॉर्गिनी कार एक्सीडेंट मामले में असली उतार चढ़ाव कोर्ट में देखने को मिला. बीते बुधवार को जहां तंबाकू व्यापारी केके मिश्रा के ड्राइवर मोहन की कहानी कोर्ट में फेल हो गई तो वहीं गुरुवार को पुलिस की कहानी कोर्ट में नहीं चल पाई. कोर्ट ने न सिर्फ केके मिश्रा के बेटे शिवम मिश्रा को जमानत दे दी, बल्कि पुलिस को फटकार लगाते हुए ऑर्डर की कॉपी DGP को भेजने के निर्देश भी दिए. हैरान करने वाली बात यह रही कि पुलिस ने शिवम मिश्रा की 14 दिन की रिमांड मांगी थी, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया.

दरअसल, रविवार 8 फरवरी को शहर के VIP रोड पर करोड़ों रुपए की लैंबॉर्गिनी कार ने मोटरसाइकिल को टक्कर मार दी, जिसमें बताया गया कि कई लोग घायल हो गए. पुलिस ने बताया कि इस कार को तंबाकू कारोबारी केके मिश्रा का बेटा शिवम मिश्रा चला रहा था. कार को थाने ले जाया गया और उसको VIP ट्रीटमेंट देने की वजह से पूरे मामले ने तूल पकड़ लिया.

दिल्ली के अस्पताल में भर्ती था शिवम मिश्रा

इसके बाद शिवम मिश्रा दिल्ली के अस्पताल में भर्ती हो गया. इधर, 11 फरवरी को केके मिश्रा के ड्राइवर मोहन ने कोर्ट में हलफनामा देकर कहा कि कार वो चला रहा था और उसको जमानत दी जाए. इस पर कोर्ट में कानपुर पुलिस ने कहा कि ड्राइवर मोहन न तो आरोपी है और न ही वांछित है. इसलिए उसकी अर्जी को खारिज किया जाए. इसके बाद ड्राइवर की कहानी कोर्ट में नहीं चल पाई और एसीजेएम-7 की कोर्ट ने ड्राइवर की अर्जी खारिज कर दी.

आज शिवम मिश्रा को कोर्ट में पेश किया गया

गुरुवार को पुलिस ने शिवम को गिरफ्तार करके कोर्ट में पेश किया. शिवम के अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि जिन धाराओं में FIR दर्ज है, उसमें सजा सात साल से कम है. इसके साथ ही पुलिस ने BSN की धारा 35(3) का पालन नहीं किया और बिना आरोपी को लिखित नोटिस दिए गिरफ्तार कर लिया. इसके जवाब में पुलिस ने कहा कि शिवम मिश्रा ने नोटिस पर हस्ताक्षर करने से मना कर दिया.

कानपुर कोर्ट ने क्या कहा?

इस बार कोर्ट में पुलिस की कहानी नहीं चल पाई. कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि नोटिस देने के लिए दो हफ्ते का समय होता है, लेकिन पुलिस ने 12 फरवरी को नोटिस दिया और 12 को ही गिरफ्तार भी कर लिया. इसके अलावा सात साल से कम सजा वाली धाराओं में किसी कोर्ट का आदेश भी नहीं था. इसके बावजूद पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया. पुलिस की कमियों को बताते हुए कोर्ट ने शिवम मिश्रा की जमानत मंजूर कर ली और आदेश की कॉपी DGP को भेजने के निर्देश भी दिए हैं.

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