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रणथंभौर नेशनल पार्क पहुंचे CJI गवई, बाघों के संरक्षण से जुड़े कानून में बदलाव का दिया सुझाव

भारत के सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश (CJI) भूषण रामकृष्ण गवई (बीआर गवई) शनिवार (13 सितंबर, 2025) को सुप्रीम कोर्ट के कई अन्य न्यायाधीशों के साथ राजस्थान के सवाई माधोपुर जिले में स्थित रणथंभौर नेशनल पार्क पहुंचे. चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया बीआर गवई व अन्य न्यायाधीशों ने रणथंभौर नेशनल पार्क का भ्रमण किया और यहां की पूरी व्यवस्थाओं को सुक्ष्मता से देखा. अपने भ्रमण के दौरान सीजेआई गवई ने देश में बाघों के संरक्षण को लेकर कई अहम बातें कही.

उन्होंने कहा कि कानून में यूं तो शिकारियों को अपने अंजाम तक पहुंचाने के लिए कई कड़े प्रावधान हैं, लेकिन फिर भी जानवरों के अवैध शिकार (पोचिंग) को रोकने के लिए इसे और अधिक सशक्त बनाए जाने की आवश्यकता है.

वन और वन्य जीवों के संरक्षण में कानून की अहम भूमिका

भारत के मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई ने कहा कि देश में वन और वन्य जीवों के संरक्षण में भारत के कानून की अहम भूमिका है. इसकी वजह से ही जंगल और जंगलों में रहने वाले सभी प्राणी सुरक्षित हैं. लेकिन, वन्यजीवों के पूर्ण संरक्षण के लिए देश भर में कॉरिडोर की संख्या को बढ़ाने की भी जरूरत है.

CJI बीआर गवई ने नालसा का किया जिक्र

उन्होंने राष्ट्रीय कानूनी सेवा प्राधिकरण (NALSA) के बारे में जिक्र करते हुए कहा कि देश में राष्ट्रीय लोक अदालत के माध्यम से आपसी रजामंदी के जरिए लाखों मुकदमों का निस्तारण हो रहा है, जो  अपने आप में बड़ा सकारात्मक कदम है. इसके अलावा, महाराष्ट्र के कोल्हापुर में मुंबई हाई कोर्ट की एक बेंच बनाए जाने का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि राजस्थान में भी अगर ऐसा होता है तो अपने आप में यह एक सकारात्मक प्रयास होगा, लेकिन फिलहाल अभी इसके लिए कुछ नहीं कहा जा सकता है.

सुप्रीम कोर्ट के करीब 20 न्यायाधीश परिवार संग मना रहे छुट्टी

इस मौके पर सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस संदीप मेहता और विजय विश्नोई भी मौजूद रहे. उल्लेखनीय है कि भारत के मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई सहित करीब 20 न्यायाधीश अपने परिवारों के साथ 12 से 14 सितंबर तक सवाई माधोपुर के तीन दिवसीय निजी दौरे पर है.

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